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...तो एलियंस के संपर्क में था हिटलर, जीत सकता था पूरी दुनिया!


Updated: May 18, 2016, 10:26 AM IST
...तो एलियंस के संपर्क में था हिटलर, जीत सकता था पूरी दुनिया!
जर्मनी जब प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हुआ, तो उसे बेहद अपमानजनक संधियों पर हस्ताक्षर करने पड़े थे। तभी उन्हें थोड़े ही समय बाद मिला हिटलर, जो उन्हें सम्मान देने को आतुर था।

जर्मनी जब प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हुआ, तो उसे बेहद अपमानजनक संधियों पर हस्ताक्षर करने पड़े थे। तभी उन्हें थोड़े ही समय बाद मिला हिटलर, जो उन्हें सम्मान देने को आतुर था।

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बर्लिन। जर्मनी जब प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हुआ, तो उसे बेहद अपमानजनक संधियों पर हस्ताक्षर करने पड़े थे। तभी उन्हें थोड़े ही समय बाद मिला हिटलर, जो उन्हें सम्मान देने को आतुर था। पर हिटलर ने जर्मन सम्मान और आर्यों की श्रेष्ठता के नाम पर जो किया, उसे सोचकर ही लोगों की रूह कांप जाती है।

नए खुलासे में पता चला है कि हिटलर दूसरी दुनिया के जीवों के संपर्क में था। यही नहीं, वो ऐसे एयरक्राफ्ट बनाने की ओर आगे बढ़ रहा था, जो यूएफओ की तकनीकी से बने हो और समूची दुनिया में उनका कोई तोड़ न हो। शुरुआत में जब नाजी पार्टी अंडरग्रॉउंड रहकर अपना काम करती थी, तो वो जर्मन श्रेष्ठता को उकसाने के लिए स्वास्तिक चिन्ह का इस्तेमाल करती थी। इसे वो आर्यों की श्रेष्ठता की पहचान के तौर पर देखता था। ये आर्य यहूदियों से नफरत करते थे। इसी दौरान हिटलर जर्मनों का मसीहा बनकर उभरा था।

बताया जा रहा है कि हिटलर एलियंस के संपर्क में था। हिटलर की नाजी पार्टी को जो शुरुआती फंड मिलता था, उसे थ्यूल सोसाइटी दिया करती थी। इस सोसाइटी का नाम 'अल्टिमा थ्यूल' के नाम था, जो कभी उत्तरी यूरोप में प्राचीन ग्रीस और रोमन किवदंतियों में एक देश हुआ करता था। एक जर्मन स्टडी ग्रुप ने दावा किया है कि वो खोया थ्यूल राज्य आर्यन रेस की असली जगह था।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि थ्यूल सोसाइटी के वरिष्ठ लोग माना करते थे कि एलियंस धरती के नीचे रहकर अपने काम काज को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने ही 'व्रिल' योजना बनाई थी, जिसमें यूएफओ जैसी तकनीकी का इस्तेमाल कर भविष्य के जहाज बनाए जाने थे और वो इसके बेहद करीब पहुंच गए थे।



 

 

 

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First published: May 18, 2016, 10:24 AM IST
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