दावा: 5 हजार साल से लोगों पर नजर रख रहे हैं एलियंस, मजे से सुनते हैं FM स्टेशन

वैज्ञानिकों का दावा है कि इन ग्रहों से एलियंस हमें देखते हैं.

वैज्ञानिकों ने कम से कम 29 संभावित रहने योग्य ग्रहों (Scientists enlisted habitable planets) का खाका तैयार किया है. उनका मानना है कि एलियंस (Aliens are Watching Earth) हमारी तरह दूरबीन की तकनीकों का इस्तेमाल कर हमारी दुनिया को देखते होंगे.

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    एलियंस को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कभी यूएफओ देखे जाने का दावा किया जाता है तो कई बार एलियंस नजर आने का दावा भी किया गया है. एक नए शोध में न सिर्फ एलियंस की मौजूदगी को लेकर दावा किया गया है बल्कि यह भी कहा गया है कि हो सकता है कि एलियंस हमें 5,000 सालों से देख रहे हों और हमारे पुराने रेडियो शो भी सुन रहे हों.

    एलियंस के असतित्व को लेकर यह दावा न्यूयार्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय (Cornell University) ने एक शोध में किया है. विश्वविघायल से जुड़े प्रोफेसर लीसा कल्टेनेगर (Lisa Kaltenegger) ने बताया कि उन्होंने यह शोध उन ग्रहों की पहचान करने के लिए किया था जहां से पृथ्वी को देखा जा सकता है. साथ ही इसके जरिए यह जानने की कोशिश भी की गई कि और कहां जीवन संभव है. दरअसल, इसके लिए वैज्ञानिकों ने फिरौन (Pharaoh) के समय से ही कम से कम 29 संभावित रहने योग्य ग्रहों की पहचान की, जहां से पृथ्वी पर नजर रखी जा सकती है. इस क्रम में शोधकर्ताओं ने ब्रह्मांड में ऐसे सौर मंडलों का नक्शा तैयार किया है जहां संभवत: एलियन्स रहते होंगे और हमारी तरह दूरबीन की तकनीकों के इस्तेमाल से पृथ्वी पर नजर रखते होंगे. शोध में ऐसे ग्रहों की पहचान भी की गई है जो धरती से 45 लाइट ईयर की दूरी पर हैं. जिनमें से कुछ चट्टान और पानी से भरे पृथ्वी के आकार के ग्रह हैं. साथ ही इनमें से 4 संतुलित तापमान वाले, रहने लायक ग्रह हैं और हो सकता है कि इन ग्रहों पर एलियंस का जीवन संभव हो.

    वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारी धरती से 326 लाइट ईयर के दायरे में कुल 2,034 तारे हैं. जिनमें से कुछ को रेडियो सिगनल भी मिलते होंगे. जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि हो सकता है एलियंस हमारे रेडियो शो भी सुनते होंगे. वैज्ञानिक रिसर्च के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि आने वाले समय में भी एलियंस हमारी धरती पर नजर रख सकते हैं. इसी कड़ी में यह बात भी समाने आई है कि अगले 5,000 साल में 319 ग्रहों पर रहने वालों को ट्रांजिट तकनीक के जरिए हमारी दुनिया की झलक पाने का मौका मिल सकता है. इन सब की जानकारी गिया से मिले आंकड़ों की वजह से मिल पाई है. दरअसल, वैज्ञानिक यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) के गिया (GAIA) उपग्रह के आंकड़ों के आधार पर रिसर्च करते हैं. न्यूयार्क के अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के सह-लेखक डॉ. जैकी फाहर्टी (Dr Jackie Faherty) ने बताया, "गिया ने हमें आकाशगंगा का सटीक मैप प्रदान किया है. इसने हमें समय में पीछे और आगे की ओर देखने का मौका दिया है और यह देखने की सहुलियत दी है कि तारे और ग्रह कहां स्थित हैं और वह कहां जा रहे हैं. वहां जीवन संभव है या नहीं.'' गिया के जरिए आकाशगंगा का आंकलन किया गया है. साथ ही 300 लाइट ईयर के भीतर के तारों की एक सूची तैयार की गई है. जिसकी मदद से उन ग्रहों की गिनती होने लगी है जहां से पृथ्वी को देखा जा सकता है. इनमें से 75 इतने पास हैं कि वहां हमारे 75 रेडियो स्टेशनों की आवाजें सुनाई देती होंगी जो लगभग एक सदी पहले प्रसारित होने लगे थे.

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