VIDEO: न्यूटन से कम नहीं थे भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त

ये दावा तो गलत है कि न्यूटन ने नहीं बल्कि ब्रह्मगुप्त ने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत की खोज की थी. हालांकि ब्रह्मगुप्त ने 'ध्यानग्रहोपदेश' में इस बात का ज़िक्र ज़रूर किया है कि मनुष्य का शरीर हमेशा धरती की तरफ उसी प्राकृतिक बल के कारण गिरता है जिस वजह से पानी हमेशा नीचे की और बहता है.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: May 12, 2018, 8:32 PM IST
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: May 12, 2018, 8:32 PM IST
राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का दावा है कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन से पहले भारत महान गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त द्वितीय ने दिया था. हालांकि देवनानी ने भी बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके कहने का मतलब था कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने ही दिया था लेकिन इस पूरे मामले में गहराई से रिसर्च करने पर पता चलता है कि न्यूटन के सिद्धांतों का आधार ब्रह्मगुप्त द्वारा की गईं खोज ही थीं. देवनानी इससे पहले ये दावा भी कर चुके हैं कि गाय ही दुनिया में ऐसी जानवर है जो श्वांस के ज़रिए ऑक्सीजन अंदर लेती है और ऑक्सीजन ही बाहर निकालती है.

कौन थे ब्रह्मगुप्त
ब्रह्मगुप्त का जन्म साल 598 में राजस्थान की भीनमाल नामक जगह हुआ था. इस दौरान इसे गुर्जर प्रदेश के तौर पर जाना जाता था और यहां चावड़ा वंश के राजा व्यघरामुख का शासन था. इनके पिता का नाम विष्णुगुप्त था और वे एक जाने-माने ज्योतिषी थे. इस दौरान उज्जैन में देश की सबसे बड़ी खगोलीय वेधशाला (astronomical observatory) हुआ करती थी जो कि गणितीय खोजों का केंद्र भी थी. ब्रह्मगुप्त खुद भी खगोलविद (astronomer) थे और इस वेधशाला के हेड भी थे.

ब्रह्मगुप्त का योगदान

मध्यकालीन यात्री अलबरूनी ने भी ब्रह्मगुप्त के लिखे ग्रंथों और शून्य से जुड़ी उनके गणितीय सिद्धांतों का ज़िक्र किया है. ब्रह्मगुप्त ने प्राचीन ब्रह्मपितामह सिद्धांत के आधार पर 'ब्राह्मस्फुट सिद्धांत' और 'खण्डखाद्यक' नाम के दो विश्वप्रसिद्ध ग्रंथ लिखे, जिनमें प्रमुख रूप से खगोल विज्ञान और गणित के सिद्धांतों पर बात की गई है.

बताया जाता है कि खलीफा मंसूर ने इन ग्रंथों का अरबी भाषा में भी सिंदहिंद और अल अकरंद नाम से अनुवाद कराया था. इनके आलावा ब्रह्मगुप्त ने 'ध्यानग्रहोपदेश' नाम का एक और ग्रंथ लिखा था जिसमें शून्य से जुड़े सिद्धांतों पर बात की गई है. हालांकि उस दौर के ज्यादातर गणितज्ञों ने ब्रह्मगुप्त के सिद्धांतों को कल्पना करार दिया और उनकी काफी आलोचना भी की गई थी. बाद में ब्रह्मगुप्त की कई गणनाओं में गलतियां भी पाई गईं.

ब्रह्मस्फुट सिद्धांत
ब्रह्मस्फुटसिद्धांत दुनिया का ऐसा पहला ग्रंथ माना जाता है जिसमें शून्य को एक स्वतंत्र अंक माना गया है. इसके आलावा इसमें ही पहली बार पॉजिटिव और नेगेटिव अंकों जैसे कि 1, 0 और -1 को आधार मानकर गणना करने के नियमों का ज़िक्र किया गया है. हालांकि ब्रह्मगुप्त शून्य से भाग (डिवाइड) करने का नियम सही नहीं दे पाए थे और उन्होंने 0/0 = 0 माना था.

इन्होने ही आर्यभट्ट के रैखिक अनिर्धार्य समीकरण (linear indeterminate equation) को सॉल्व करने का तरीका बताया. इन्हीं के नाम पर ही साल 628 में इस गणितीय विधि को 'कुट्टक गणित' कहा गया था. ब्रह्मगुप्त ने ax−by=c जैसे सिद्धांतों के बाद Nx2+1=y2 का भी हल खोज निकाला. इन्होने इस विधि को चक्रवाल सिद्धांत नाम दिया था. ब्रह्मगुप्त ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने गणित के सिद्धान्तों का ज्योतिष में प्रयोग किया और बताया कि अंतरिक्ष और धरती सपाट नहीं हैं बल्कि गोल हैं.

ब्रह्मगुप्त ने पृथ्वी की परिधि की गणना की जो कि उसके आधुनिक मान के बेहद निकट थी. उन्होंने पाई का मान 3.16 बताया था जिसे बाद में 3.14 माना गया. इतिहास में पाई की खोज का श्रेय विलियम जोन्स को दिया जाता है. ब्रह्मगुप्त ने ही गणितीय गणना को आधार बनाकर पहली बार अन्तरिक्ष में ग्रहों की स्थिति पता करने की कोशिश की.

इसके अलावा सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं की सही-सही तारीख की गणना करने का तरीका खोजने का सिद्धांत दिया. ब्रह्मगुप्त ने उसी दौरान एक साल में 365 दिन 5 मिनट और 19 सेकेंड होने का दावा किया था जिसे आधुनिक खगोलशास्त्र में बदलकर 365 दिन 5 घंटे और 19 सेकेंड कर दिया गया.

गुरुत्वाकर्षण पर क्या कहा था
ये दावा तो गलत है कि न्यूटन ने नहीं बल्कि ब्रह्मगुप्त ने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत की खोज की थी. हालांकि ब्रह्मगुप्त ने 'ध्यानग्रहोपदेश' में इस बात का ज़िक्र ज़रूर किया है कि मनुष्य का शरीर हमेशा धरती की तरफ उसी प्राकृतिक बल के कारण गिरता है जिस वजह से पानी हमेशा नीचे की और बहता है. अलजेब्रा, जियोमेट्री, ट्रिग्नोमेट्री और अल्गोरिदम्स के जुड़े सिद्धांतों के लिए उन्हें 'गणित चक्र चूड़ामणि' की उपाधि से नवाज़ा गया था.
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