'समंदर के कचरे' से बनेगा सुंदर रिसॉर्ट, हमारे साथ करिए सपनों के संसार की सैर

हिंद महासागर में बनेगा आर्टिफिशियल आइलैंड. (फोटो-मार्गोट क्रासोजेविक आर्किटेक्चर)

धरती के साथ-साथ समंदर में भी कचरा एक बड़ी समस्या बन गया है. अब इस समस्या के समाधान का अनोखा तरीका लेकर आए हैं मशहूर आर्किटेक्ट मार्गोट क्रॉसोजेविक (Architect Margot Krasojevic). वे हिंद महासागर ( Indian Ocean) में कचरे से एक खूबसूरत आइलैंड बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुके हैं.

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    हिंद महासागर ( Indian Ocean) में फैली कचरे की मात्रा को कम करने के लिए एक आर्किटेक्ट ने बेहद खूबसूरत प्लान तैयार किया है. आर्किटेक्ट का नाम है मार्गोट क्रॉसोजेविक (Margot Krasojevic) और उन्होंने हिंद महासागर को नुकसान पहुंचाने वाले कचरे से एक तैरता हुआ आइलैंड रिसॉर्ट बनाने का मॉडल तैयार कर लिया है. ये एक आर्टिफिशियल आइलैंड (Artificial Island) होगा, जो कोकोस (कीलिंग) (Cocos Keeling) द्वीप समूह के सुदूर ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र के तट पर रहेगा. गुड न्यूज़ ये है कि साल 2025 तक ये बनकर तैयार हो जाएगा और टूरिस्ट के लिए यहां सुविधाएं भी मौजूद होंगी.

    सीबेड से बंधे लकड़ी के पुल बैग में कचरे को इकट्ठा करने वाले ‘एक्सट्रूडेड आर्म्स’से सेंट्रल स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा जबकि पैदल रास्ते को बनाने के लिए रेत और गाद से ढके कंक्रीट का जाल लगाया जाएगा. आर्किटेक्ट मार्गोट क्रॉसोजेविक ने हिंद महासागर ( Indian Ocean)को नष्ट करने वाले कचरे की मात्रा को कम करने के एक तैरते हुए आइलैंड (Floating Island) रिसॉर्ट का सपना देख रहे हैं.

    इस बेहद अनोखे प्रोजेक्ट को लेकर क्रॉसोजेविक (Margot Krasojevic)बताते हैं कि द्वीप के निर्माण में पहला कदम तीन फुटब्रिज बनाना होगा, जो ऑयल रिग पर इस्तेमाल होने वाले ‘स्ट्रेच लेग स्ट्रक्चर’का उपयोग करके ओशन फ्लोर से जोड़े जाएंगे. वॉकवे पर समंदर में आने वाला कचरा इकट्ठा होगा और इन बैग्स को बायोडिग्रेडेबल कंक्रीट फाइबर जाल से ढक दिया जाएगा. साथ ही रेत और गाद को समुद्र तल से पंप करने के बाद पैदल मार्ग और प्लेटफॉर्म बनेंगे.

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    फोटो क्रेडिट- मार्गोट क्रासोजेविक आर्किटेक्चर


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    इस तरह से बनेगा रिसॉर्ट
    क्रॉसोजेविक (Margot Krasojevic) ने अपने प्रोजेक्ट का खुलासा करते हुए बताया कि ‘मैंग्रोव का उपयोग बाढ़ से बचने की एक विधि के तौर पर किया गया है. इसके जरिये पानी का अवशोषण होगा और द्वीप पलटने या डूबने से बचा रहेगा. उन्होंने बताया कि नावों का इस्तेमाल कंक्रीट और किसी भी आवश्यक सामग्री को ले जाने के लिए होगा, ताकि तरल कचरा न बन सके. ये रेस्क्यू राफ्ट की तरह काम करेंगे. जो फैलते और सिकुड़ते रहेंगे. इस तरह एक आर्टिफिशियल बैरियर के चलते बाढ़ की स्थिति नहीं आएगी. उनका कहना है कि जैसे-जैसे कचरा बढ़ता जाएगा, द्वीप का भी विस्तार होगा. वे बताते हैं कि ये एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट है और इसे काफी निर्माण और डिजाइनिंग की ज़रूरत है.

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    फोटो क्रेडिट- मार्गोस क्रासोजेविक आर्किटेक्चर


    पहले कैंपिंग और फिर होटेल की योजना
    एक बार फ़्लोटिंग द्वीप विकसित हो जाने के बाद, होटेल बनाने से पहले इसे कैंपसाइट के तौर पर खोला जाएगा. आर्किटेक्ट बताते हैं कि होटल एक हल्की संरचना होगी. ये लचीले कार्बन फाइबर फ्रेम की तरह होगी, जिसे बढ़ाया जा सकेगा. इसकी नींव सबसे मुश्किल होगी, जिसके लिए एंकर डालने की ज़रूरत पड़ेगी.

    होटल में कैनोपी की तरह कमरे होंगे. सोलर एनर्जी का इस्तेमाल होगा और शॉवर्स के लिए समंदर का ही फिल्टर पानी इस्तेमाल होगा. आर्किटेक्ट का कहना है कि उन्होंने रिसार्ट के कॉन्सेप्ट के लिए दक्षिण अफ्रीका माइनिंग कंपनी से कमीशन और फाइनेंसिंग ली है. जिसके जरिये वे कचरे और प्रदूषण के प्रबंधन के लिए काम कर रहे हैं.