पाकिस्तान के इस आइलैंड को कहते हैं छिपा हुआ खजाना, लेकिन अब हो रहा है बर्बाद... जानिए कैसे?

एस्टोला द्वीप को पाकिस्तान का छिपा हुआ खजाना कहा जाता है (फाइल फोटो, फोटो क्रेडिट- ICUN)
एस्टोला द्वीप को पाकिस्तान का छिपा हुआ खजाना कहा जाता है (फाइल फोटो, फोटो क्रेडिट- ICUN)

ज्यादातर लोगों के लिए अनजान इस द्वीप (island) पर किसी पर्यटक (tourist) को पसंद आने वाली सभी चीजे हैं. वो तो भला हो कि यहां का रास्ता (way) इतना दुर्गम है कि द्वीप की बेहतरीन सुंदरता अब भी बची है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 4:05 PM IST
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अरब सागर (Arabian Sea) में स्थित है वो द्वीप, जिसे पाकिस्तान का छिपा खजाना (Pakistan’s Hidden Gem) कहते हैं. यह बलूचिस्तान (Coast of Balochistan) के तट से सिर्फ 25 किमी की दूरी पर है. लगभग 7 किमी लंबा और 2.5 किमी चौड़ा यह द्वीप (Island), लगभग खाली पड़ा हुआ है. इस पर चारों ओर सफ़ेद चट्टानें हैं, जिनसे आगे समुद्र (Sea) का नीला पानी शुरु होता है. इस जगह को देखकर ऐसा लगता है, जैसे भूमध्य सागर (Mediterranean) के तट पर खड़े हों.

इस एस्टोला द्वीप (Astola Island) को स्थानीय जज़ीरा हफ़्ता तलार (सात पहाड़ियों के द्वीप) के नाम से भी जानते हैं. लंबे समय से यह पाकिस्तान (Pakistan) में रहस्य रहा है. ज्यादातर लोगों के लिए अनजान इस द्वीप (island) पर किसी पर्यटक (tourist) को पसंद आने वाली सभी चीजे हैं. वो तो भला हो कि यहां का रास्ता (way) इतना दुर्गम है कि द्वीप की बेहतरीन सुंदरता अब भी बची है.

पुराने लाइट हाउस और छोटी मस्जिद के अलावा यहां कोई सुविधा उपलब्ध नहीं
एस्टोला जाना हो तो कराची से पासनी तक 7 घंटे ड्राइव करना होता है. पासनी, अरब सागर का एक समुद्री बंदरगाह है, जो एस्टोला से लगभग 40 किमी दूर है. पासनी से 3 घंटे का नाव का सफर तय कर एस्टोला जाया जाता है. द्वीप पर कोई सुविधाएं नहीं हैं, एक पुराने लाइट हाउस और एक छोटी मस्जिद के अलावा यहां कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. द्वीप पर जाने वाले पर्यटक आमतौर पर समुद्र तट पर डेरा डालते हैं. यहां आने वाले पर्यटक समुद्र में तैराकी और गहरे समुद्र में गोताखोरी का मज़ा लेते हैं.
पाकिस्तानी मछुआरे सितंबर से मई के बीच एस्टोला में अस्थायी आवास बना लेते हैं. वे यहां झींगे, केकड़े और सीप पकड़ने आते हैं. एस्टोला जाने का यही आदर्श समय होता है. पूरे दिन हल्की हवा चलती रहती है. समुद्री पानी का रंग और पैटर्न भी ज्वार के साथ बदलता रहता है. यहां पानी इतना साफ है कि समुद्र में लगभग 20 फीट गहराई तक देखा जा सकता है. लेकिन जून से अगस्त तक, मानसून के मौसम के दौरान एस्टोला जाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा समुद्र के बहुत उथल-पुथल होने के चलते होता है.



सिवाय कुछ झाड़ियों और घासों के अलावा यहां कोई पेड़ नहीं हैं
ताजे पानी की कमी के चलते एस्टोला ज्यादातर बंजर ही है. सिवाय कुछ झाड़ियों और घासों के अलावा यहां कोई पेड़ नहीं हैं. लेकिन द्वीप के आसपास का पानी समुद्री जीवों जैसे कोरल, डॉल्फ़िन, व्हेल और विभिन्न प्रकार की मछलियों की प्रजातियों से भरा हुआ है. रेतीला समुद्र तट कई पक्षियों की प्रजातियों के प्रजनन के मैदान का काम भी करता है.

हालांकि दुर्भाग्य से मछली पकड़ने की कानूनी और अवैध दोनों ही गतिविधियों ने द्वीप की पारिस्थितिकी को बहुत नुकसान पहुंचाया है. मछुआरों ने तट पर कचरे और टूटे हुए जालों को छोड़ दिया है, जो कोरल में उलझ जाते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं. सूटी गुल नाम का पक्षी, जिसके लिए यह जगह एक प्रमुख प्रजनन स्थान था, बढ़ते चूहों के चलते यहां से चला गया है. इनसे निपटने को द्वीप पर छोड़ी गई बिल्लियां कछुए के बिल खोद देती हैं और अंडों और बच्चों को भी खा जाती हैं.

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2017 में, एस्टोला द्वीप को पाकिस्तान का पहला समुद्री संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था. हालांकि अब भी वहां प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कोई योजना तैयार होनी बाकी है.
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