यहां अपनों की लाश जलाकर खा जाते हैं लोग, भूनी हुई चमड़ी से लेकर हड्डियां तक चबाने की है परंपरा

लाश को जलाकर साथ पकाकर खाते यानोमामी जनजाति के लोग

लाश को जलाकर साथ पकाकर खाते यानोमामी जनजाति के लोग

कोरोना की वजह से दुनिया में लाशों का अंबार लग गया है. भारत में भी इस वायरस की दूसरी लहर ने तबाही मचा दी है. लाशों का अंतिम संस्कार करने के लिए वेटिंग चल रही है. इस बीच दुनिया में एक ऐसी जनजाति की चर्चा है, जो लाशों को जलाकर खा जाते हैं.

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वैसे तो दुनिया में कई जनजातियां (Tribes) हैं. हर जनजाति किसी ना किसी ख़ास कारण चर्चा में रहती हैं. कई जनजातियों में अजीबोगरीब परम्पराएं (Weird Ritual) भी होती हैं. भारत की एक जनजाति की महिलाएं जानवरों को छाती का दूध (Breast Milk) पिलाती हैं. वहीं बात अगर ब्राजील के यानोमामी जनजाति (Yanomami Tribe) की करें, तो ये लोग अपनों की लाश जलाकर उसे ही खा जाते हैं. जी हां, इस जनजाति की परंपरा है कि यहां लाश को जलाकर खाया जाता है.

काफी अलग है अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

यानोमामी जनजाति के लोग आधुनिकरण से काफी दूर हैं. ये लोग मॉडर्न सोसाइटी से कोसो दूर हैं. यहां के लोग अपने पारंपारिक तरीकों से ही जीते हैं. कपड़ों के नाम पर इनकी बॉडी पर सिर्फ एक लंगोट बंधा होता है. इस जनजाति की अंतिम संस्कार की परंपरा काफी अजीब है. जहां हर समुदाय लाशों को या तो जला देता है या दफना देता है, वहीं इस जनजाति के लोग लाश को जलाकर खा जाते हैं.

अच्छे से पकने पर खाते हैं साथ
यानोमामी जनजाति के लोगों का मानना है कि परिजनों की मौत के बाद उनकी आत्मा सहेजनी पड़ती है. आत्मा को संरक्षित करने के लिए इस जनजाति के लोग लाश को पहले अच्छे से जलाते हैं. जब लाश पक जाती है तो पूरे परिवार से साथ मिलकर इसे खा जाते हैं. लाश को जलाने से पहले सभी रिश्तेदारों को भी इकठ्ठा किया जाता है. सब मिलकर लाश खाते हैं.
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