बिना लाइट के भी घर में चमचमाती है रोशनी, बेहद खास तरीके से बना है ये 16 कोने वाला घर

इंग्लैंड के डेवोन में दिन भर रौशन रहने वाला यह घर स्थित है. यहां के लिम्पस्टोन गांव के पास 18वीं सदी की यह अनोखा घर है (फाइल फोटो, क्रेडिट- नेशनल ट्रस्ट, यूके)
इंग्लैंड के डेवोन में दिन भर रौशन रहने वाला यह घर स्थित है. यहां के लिम्पस्टोन गांव के पास 18वीं सदी की यह अनोखा घर है (फाइल फोटो, क्रेडिट- नेशनल ट्रस्ट, यूके)

यूरोप यात्रा (Europe Tour) पर निकली घर बनवाने वाली निडर महिलाएं 1795 में फिर ब्रिटेन (Britain) लौटने से पहले फ्रांस, इटली, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और शायद स्पेन और पुर्तगाल का भी दौरा कर चुकी थीं. इसके बाद इन महिलाओं ने अपनी यात्रा की याद दिलाने के लिए एक घर बनाने का फैसला किया और यह भी तय किया कि इस लंबी यात्रा के दौरान जुटाये गई सभी यादगारों (Souvenir) को इसी घर में एक साथ रखा जायेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 6:03 PM IST
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जब तक दिन रहे, घर में लगातार रौशनी (Light) बनी रहे और एक बल्ब तक जलाने की जरूरत न पड़े तो कितना अच्छा हो. लेकिन ऐसा घर (house) बना पाना सिर्फ बेहद मंझे हुए आर्किटेक्ट (Architect) के बस में ही होता है. हो सकता है आपने ऐसे ही एक घर के तौर पर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की वर्धा आश्रम (Wardha Ashram) की कुटी के बारे में सुना हो. लेकिन एकमंजिला कुटी और पूरी तरह से ईंट-गारे से बने तीन मंजिला घर (Three storey home) में अंतर होता है. इंग्लैंड (England) के डेवोन (Devon) में ऐसा ही घर स्थित है. यहां के लिम्पस्टोन गांव के पास 18वीं सदी की यह अनोखा घर बना हुआ है.

16 कोनों वाले इस घर को दो हमेशा के लिए अविवाहित रहीं चचेरी बहनों (spinster cousins) जेन और मैरी परमिंटर ने बनवाया था. इन दोनों महिलाओं ने यूरोप (Europe) के दशक लंबे दौरे से लौटने के बाद इस घर का निर्माण कराया था. जेन परमिंटर डेवन शहर के एक धनी शराब व्यापारी (wealthy wine merchant) की बेटी थीं. साल 1784 में अपने पिता की मृत्यु के बाद जेन यूरोप के एक लंबे दौरे पर निकल गई. जैसा कि उस समय में उच्च वर्ग (upper-class) के ब्रिटेन के लोगों के बीच रिवाज था, उनके साथ इस दौरे पर उनकी सौतेली बहन एलिजाबेथ (orphaned cousin), एक अनाथ चचेरी बहन मैरी और एक अन्य महिला मित्र भी थीं.

करीब 11 साल की यात्रा के दौरान इंग्लैंड लौटी महिलाएं
कई वर्षों के अपने सफर के दौरान इन निडर महिलाओं ने 1795 में फिर इंग्लैंड लौटने से पहले फ्रांस, इटली, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और शायद स्पेन और पुर्तगाल का भी दौरा कर लिया था. इसके बाद इन महिलाओं ने अपनी यात्रा की याद दिलाने के लिए एक घर बनाने का फैसला किया और यह भी तय किया कि इस लंबी यात्रा के दौरान जुटाये गई सभी यादगारों को इसी घर में एक साथ रखा जायेगा.
दोनों चचेरी बहनों ने एक्समाउथ नाम की जगह पर नए फैशनेबल रिसॉर्ट के पास 15 एकड़ जमीन खरीदी और एक आकर्षक 16-कोनों वाले कॉटेज का निर्माण कराया. इसका डिजाइन रावेना में सैन विटेल की अष्टकोणीय बेसिलिका से प्रेरित था. इन बहनों का जो पारिवारिक इतिहास मिलता है, उसके मुताबिक जेन ने खुद ही घर को डिजाइन किया था, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह शायद बाथ आर्किटेक्ट जॉन लोडर का काम था.



तीन मंजिलों के इस घर में हैं 20 कमरे
इस घर को ए ला रोंडे के नाम से जाना जाता है. जिसमें तीन मंजिलों में 20 कमरे बने हुए हैं. सबसे निचले फ्लोर पर स्टाफ क्वार्टर, एक स्ट्रांग रूम और रसोईघर है. जबकि पहली मंजिल महिलाओं के लिए है. घर के केंद्र में एक अष्टकोणीय दालान है जिसमें आठ दरवाजे हैं जो इतने ही कमरों में ले जाते हैं. कमरे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी कमरे से निकल किसी भी कमरे में जाया जा सकता है. यह इसलिए जरूरी था क्योंकि जेन और मैरी को सूरज की गर्मी बढ़ने के साथ ही एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना पसंद था. वे पूर्व की तरफ वाले कमरे में नाश्ते के साथ दिन शुरू करती थीं और फिर शाम को पश्चिम में एक अंडाकार कमरे में चाय के साथ खत्म करने के बाद घूमती थीं.

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आधुनिकता के हिसाब से घर में कुछ बदलाव इसके आने वाले मालिक लेकर आये लेकिन 1991 में जब इसे नेशनल ट्रस्ट ने अपने प्रबंधन में लिया तो इसे फिर से इसके मूल रूप में लाने की कोशिश की गई.
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