सूरज की सतह की सबसे साफ तस्वीरें सामने आई, जानिए इस पर क्या सोचते हैं साइंटिस्ट?

सूरज की सतह की सबसे साफ तस्वीरें सामने आई, जानिए इस पर क्या सोचते हैं साइंटिस्ट?
सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर की मदद से वैज्ञानिकों ने सूर्य की अभी तक की सबसे बेहत तस्वीरें खींची है. ( फोटो सौजन्य से नासा)

सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर (Solar Telescope Gregor) की मदद से वैज्ञानिकों (Scientist) ने सूर्य की अभी तक की सबसे साफ तस्वीरें (photo) खींची है. इन तस्वीरों की मदद से वैज्ञानिकों को सूर्य का अध्ययन करने में मदद मिलेंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 2:41 PM IST
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सूर्य में होने वाले बदलावों पर रिसर्च करने वाले यूरोप के वैज्ञानिकों ने सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर (Solar Telescope Gregor) की मदद से अभी तक की सबसे साफ सूरज की तस्वीरें (photos) खींची है. वैज्ञानिक इन तस्वीरों को सूरज की एचडी तस्वीर कर रहे हैं. साथ ही वैज्ञानिक इस बात से भी हैरान है कि सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर से सूरज की इतनी बेहतरीन तस्वीरें नहीं ली गई. इन तस्वीरों का फिलहाल लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर सोलर फीजिक्स (Leibniz Institute for Solar Physics) के वैज्ञानिक कर रहे है. जिससे सूरज की गतिविधियों के बारे में और जानकारी मिल सकें.

लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर सोलर फिजिक्स के इंजीनियरों के अनुसार सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर के लेंस को नए सिरे से तैयार किया गया है. जिसकी वजह से टेलीस्कोप सूरज की इतनी बेहतर फोटो लेने में कामयाब हो सका. इन तस्वीरों को देखने के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे पहले यूरोपीय टेलीस्कोप से ऐसी तस्वीरें नहीं ली गई. ये तस्वीरें अभी तक की सर्वश्रेष्ठ है, जिसकी वजह से सूरज की गतिविधियों का विश्लेषण करना आसान हुआ है.

शोधकर्ताओं की लीडर डॉ. लुसिया क्लेइंट ने कहा कि सूरज को पहली बार इस तरीके से देख पाना एक सुखद अनुभव है. इससे पहले यह दूरबीन इतने साफ तरीके से सूर्य को नहीं देख पाई थी. दूरबीन में किए गए तकनीकी बदलावों की वजह से सूर्य साफ दिखने लगा है.



आपको बता दें ग्रेगोर टेलीस्कोप का लेंस इतना शक्तिशाली है यह सूर्य की जो भी तस्वीर खींचता है वह 48 किलोमीटर की दूरी से सूरज को देखने जैसा होता है. इससे पहले नासा ने पार्कर सोलर प्रोब के सूर्य अभियान के तहत नजदीकी फोटो खींचने में कामयाबी हासिल की थी. वैज्ञानिकों के अनुसार सोलर टेलीस्कोप ग्रेगोर से ली गई इन तस्वीरों का छोटा सा कण भी करीब 8 लाख 65 हजार मील के व्यास का है.
आपको बता दें, इन तस्वीरों के जरिए सूर्य के सारे सन स्पॉट और उभरती हुई लपटों को आसानी से समझा जा सकता है. सूर्य की लपटों में जो प्लाज्मा किरणें होती हैं, वह अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर तक जाने के बाद वापस सूर्य की ओर आती है. इन तस्वीरों के जरिए वैज्ञानिक सौर प्लाज्मा के बारे में भी रिसर्च कर सकेंगे. इन तस्वीरों में कई जगह अंधेरे इलाके भी है जो सन स्पॉट हैं, और वह लगातार अपनी जगह बदलते रहते है. क्योंकि सूर्य में लगातार विस्फोट होते रहते है. इन्हीं विस्फोटों की वजह से सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में लगातार बदलाव होता रहता हैं.

वहीं केईएस के निदेशक डॉ. स्वेतलाना बर्डिगुईना ने कहा कि इस खगोल दूरबीन में परिवर्तन करना एक चुनौतीपूर्ण काम था. लेकिन उनकी संस्था ने आपसी तालमेल बैठाते हुए बहुत ही कम समय में यह काम पूरा कर दिखाया है. जिसकी वजह से ही सूर्य की करीबी तस्वीरें खींची जा सकी.
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