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climbed everest for the 16th time even after serious injuries to both knees made a record as the first non nepalese shitri

दोनों घुटनों में गंभीर चोट के बाद भी 16वीं बार की एवरेस्ट की चढाई, पहले गैर नेपाली के तौर पर बनाया रिकॉर्ड

 सौ.इंस्टाग्राम- घुटनों में चोट के बाद बिना सहारे के चलना भी था मुश्किल, लेकिन हौसले से जीत लिया पहाड़, ऐसा करने वाले पहले अंग्रेज बने

सौ.इंस्टाग्राम- घुटनों में चोट के बाद बिना सहारे के चलना भी था मुश्किल, लेकिन हौसले से जीत लिया पहाड़, ऐसा करने वाले पहले अंग्रेज बने

ब्रिटेन के रहने वाले 48 साल के केंटन कूल ने 16वीं बार एवरेस्ट फतह कर नया रिकॉर्ड बना दिया. केटन कूल पहले ऐसे पर्वतारोही बन गए हैं जिसने गैर नेपाली होते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया. अब तक ऐसे सारे रिकॉर्ड किसी न किसी नेपाली शख्स के ही खाते में दर्ज है.

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दुनिया के सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचना इतना आसान नहीं होता. सैकड़ों जोखिम का सामना कर पूरी होती है एक पर्वतारोही की शिखर फतह यात्रा. लेकिन कुछ पर्वतारोही ऐसे भी हैं जिन्होंने एक नहीं दो नहीं बल्कि 15-16 बार ऐसे कारनामा कर दिखाया है. लेकिन अब तक इस कारनामें में सबसे ज्यादा नाम नेपाली नागरिकों के ही रहे हैं.

ब्रिटेन के केंटन कूल ने इस मिथ को तोड़ा और अपने हौसले और हिम्मत के बल पर वो कारनामा कर दिखाया जिसका सपना उनके जैसा हई होता तो कबका छोड़ चुका होता. 48 साल के केंटन कूल ने 16वीं बार एवरेस्ट फतह कर नया रिकॉर्ड बना दिया. इसी के साथ वो पहले ऐसे पर्वतारोही भी बन गए हैं जिसने गैर नेपाली होते हुए ये रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अब तक ऐसे सारे रिकॉर्ड किसी न किसी नेपाली शख्स के ही खाते में दर्ज है.

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16 बार एवरेस्ट चढ़ने वाले पहले अंग्रेज बने
केंटन की इस उपलब्धि का सारा श्रेय उनकी हिम्मत और ज़ज्बे को ही जाता है. इसकी वजह है कम उम्र में हुआ एक ऐसा हादसा जिसके बाद कहा गया था कि वो अब कभी पर्वत पार नहीं कर कर सकते. लेकिन केंटन ने इस कमज़ोरी को चुनौती के रूप में लिया और सारी मेडिकल और शारीरिक रूकावट को दरकिनार कर 16 बार माउंट एवरेस्ट को न सिर्फ फतह किया बल्कि ऐसा करने वाले अपने देश के पहले नागरिक भी बन गए. मात्र 22 साल की उम्र में कूल एक रॉक-क्लाइम्बिंग के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे जिसके बाद कहा गया था कि वो अब कभी नहीं चल पाएंगे. यानि बिना सहारे के सामान्य चाल भी नहीं चल सकते थे ऐसे में एवरेस्ट पर चढने का सपना देखना तो दूर की बात थी.

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बिना सहारे के चलना भी था मुश्किल, और फतह कर लिया एवरेस्ट
1996 में रॉक क्लाइम्बिंग के दौरान हुए हादसे में कूल की दोनों एड़ी की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं. लेकिन अपने हौसले के बल पर उन्होंने अपना सपना चकनाकूर नहीं होने दिया. और 16 बार एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले पहले अंग्रेज के तौर पर अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे. मई का महीना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का सबसे पसंदीदा समय है, नेपाली सरकार ने भी मौजूदा पीक सीजन को देखते हुए एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए 316 परमिट जारी किए हैं.

Tags: Ajab Gajab news, Khabre jara hatke, Mount Everest, OMG News

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