जमीन पर लेटे इंसानों को रौंदती रही गाय फिर भी नहीं आई किसी को खरोंच

लोग जमीन पर लेटे, भारी गायें उनके ऊपर से गुजरीं और कोई जख्मी तक नहीं हुआ. भीड़ में कोई घायल दिखा नहीं या उन्हें सामने लाया ही नहीं गया.

News18Hindi
Updated: April 13, 2019, 9:47 PM IST
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आधी हकीकत आधा फसाना. 550 से 600 किलोग्राम की वजन वाली गाय किसी इंसान को रौंदते हुए गुजर जाए तो क्या होगा? सवाल थोड़ा अजीब है लेकिन जवाब बहुत ही सीधा. या तो वो इंसान बुरी तरह जख्मी हो जाएगा या गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो जाएगी लेकिन दावा किया जाता है कि एक गांव में ऐसा कुछ नहीं होता. एक साथ कई गाय और बैल लोगों को पैरों से रौंदते हुए निकल जाते हैं और किसी को चोट तो दूर, एक हल्की सी खरोंच तक नहीं आती. ऐसा दावा करने वालों के मुताबिक एक अंजान शक्ति उनकी रक्षा करती है. इसी दावे की पड़ताल करने न्यूज़ 18 की टीम उस गांव में पहुंची और हर तस्वीर को हक़ीक़त में देखा. इस प्रथा को गौहरी पढ़ना कहते थे.

सुबह गांव की गायों को सजाने से दिन की शुरुआत हुई. गौहरी पढ़ने की पूरी तैयारी कर ली गई. जिस जगह पर गौहरी पढ़ी जाएगी वहां लेटने के लिए मिट्टी बिछाई गई और सॉफ्ट कुशन तैयार किए गए ताकि गाय के गुजरने पर ज्यादा तकलीफ ना हो. गौहरी पढ़ने वाले सैकड़ों लोग आए और प्रथा शुरू हुई. गाय जमीन पर लेटे इंसानों को लगातार रौंद रही थीं और लोग जमीन पर चुपचाप लेटे थे. ये सिलसिला दो मिनट तक चला और कोई दर्द से कराहता नहीं दिखा. नीचे लेटे लोगों के कपड़े चीथड़े-चीथड़े हो चुके थे लेकिन उन्हें एक खरोंच भी नहीं आई.



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तो क्या चमत्कार का दावा सही था या दावे से जुड़ी असली तस्वीर का सामने आना अभी बाकी था. लोग जमीन पर लेटे, भारी गायें उनके ऊपर से गुजरीं और कोई जख्मी तक नहीं हुआ. भीड़ में कोई घायल दिखा नहीं या उन्हें सामने लाया ही नहीं गया. अगर गांववालों ने कुछ छिपाया है तो जख्मी हुए लोग इलाज कराने अस्पताल तो पहुंचे होंगे. अस्पताल जाकर पता चला कि ऐसा कोई मामला नहीं आया.

डॉ. एम के राय ने बताया कि कुछ लोग छोटी-मोटी खरोंच के साथ आए थे. जब डॉक्टर से गाय-गौहरी-पढ़ने की प्रथा के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि गाय गौहरी में गायों का एक झुंड पतली गली से गुजरता है जहां लोग घेरा बनाकर रहते हैं ताकि गायें गली से निकल सकें. इसकी वजह से इंजरी बहुत मेजर नहीं होती.

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इसी कड़ी में न्यूज़ 18 की टीम उस मंदिर में पहुंची जहां अगले दिन फिर गाय गौहरी की प्रथा निभाई जानी थी. पुजारी से बात करते हुए एक नई बात सामने आई. पुजारी के मुताबिक गाय हम सब की मां हैं और एक मां कभी अपने बच्चों पर पैर नहीं रखती, गाय दोनों खुरों को चौड़ी करके निकल जाती है ताकि उसके बच्चों को ज्यादा चोट न आए.ऐसी ही अजब-ग़ज़ब कहानियों और VIDEOS के लिए क्लिक करें
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