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Discovery: भूल जाइए कोरोना, अब तिब्बत के पहाड़ों में मिले दर्जनों वायरस, जो हैं 15 हजार साल पुराने!

शोधकर्ताओं ने गुलिया आइस कैप से लाई बर्फ पर किया शोध (Image-  The Byrd Polar and Climate Research Center)

शोधकर्ताओं ने गुलिया आइस कैप से लाई बर्फ पर किया शोध (Image- The Byrd Polar and Climate Research Center)

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (Researchers from Ohio State University) को गुलिया आइस कैप (Guliya ice cap) से लाई गई बर्फ की स्टडी करने के बाद वाररस की 28 ऐसी प्रजातियों के बारे में पता चला है, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को पहले से नहीं पता था. अब इन्हें लेकर नए-नए दावे किए जा रहे हैं, जिनका संबंध कोरोना वायरस (Corona virus) से भी हो सकता है.

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    कोरोना वायरस (Corona Virus or COVID19) की वजह से देश-दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन अब तिब्बत ग्लेशियर (Tibetan glacier) में दर्जनों वायरस के मिलने की पुष्टि हुई है. जानकारी के मुताबिक यह वायरस 15 हजार साल पुराने हैं. हालांकि, जानकारी के अनुसार ये वायरस अभी तक पौधों में ही मिले हैं और इनका किसी जीव या किसी इंसान में मिलने का प्रमाण नहीं मिला है.

    दरअसल, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (Researchers from Ohio State University) ने गुलिया आइस कैप (Guliya ice cap) से बर्फ ला कर अपनी प्रयोगशाला में उसकी जांच की और अच्छे से स्टडी की तो उन्हें वायरस के ऐसे नमूने मिले जो संभवतः मिट्टी या पौधों में पनपे होंगे. हैरान कर देने वाली बात यह है कि इनमें से 28 वाररस की प्रजातियों के बारे में वैज्ञानिकों को पहले से नहीं पता था. माइक्रोबायोम पत्रिका (Journal Microbiome) में प्रकाशित एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं की टीम ने कुल 33 वायरस के मिलने का खुलासा किया और कहा कि इससे यह पता चल पाएगा कि समय के साथ वायरस कैसे विकसित (Evolution of virus) हुए हैं.

    ग्लेशियर पर सालों पहले जमा हुए वायरस

    आपको बता दें कि ओहियो स्टेट के प्रोफेसर झी-पिंग झोंग (Ohio State professor Zhi-Ping Zhong) ने कहा, 'ये ग्लेशियर धीरे-धीरे बने थे. धूल और गैसों के साथ-साथ कई वायरस भी उस बर्फ में जमा हो गए थे. शोधकर्ताओं का कहना है कि पश्चिमी चीन (Western China) के ग्लेशियरों का अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है और उनका लक्ष्य इस जानकारी का उपयोग खोजे गए वायरस के विकास के दौरान आसपास क्या हुआ होगा, इसका पता लगाने का है. जानकारी के मुताबिक अध्ययन किए गए बर्फ के नमूने साल 2015 के हैं, लेकिन मूल रूप से हजारों साल पहले ग्लेशियर पर जमा हो गए होंगे क्योंकि हर साल, बर्फ नई परतों में जमा हो जाती है.

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    नए वायरसों की स्टडी से क्या पता चलेगा?
    जानकारी के लिए बता दें कि यह प्राकृतिक रिकॉर्ड वैज्ञानिकों को अतीत की वायुमंडलीय संरचना, जलवायु और माइक्रोबायोटा के बारे में जानने का मौका देगा. वैज्ञानिकों के पास पिछले रिकॉर्ड वाले चार वायरस हैं, जो आमतौर पर बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं और बहुत कम कॉन्सनट्रेशन (Lower concentration) में पाए जाते हैं, जो कि उसी प्रकार के हैं जो मिट्टी या समुद्र में पाए जाने वाले वायरस में होते हैं.

    कोरोना वायरस को लेकर भी हो सकते हैं नए दावे

    पेपर लेखक मैथ्यू सुलिवन (Paper author Matthew Sullivan) ने बताया 'ये ऐसे वायरस हैं जो एक्सट्रीम एनवायरनमेंट में पनपे होंगे.' उन्होंने आगे कहा, 'इन वायरसों में ऐसे जीन (Gene) मौजूद होते हैं जो उन्हें ठंडे वातावरण में कोशिकाओं को संक्रमित करने में मदद करते हैं.' आपको बता दें कि इसके जरिए शोधकर्ताओं ने यह आशंका जताई है कि पिछले डेढ़ साल से महामारी की जड़ बना कोरोना वायरस हो सकता है पौधों या मिट्टी से आया हो. अब इन वायरस के सैंपल्स के जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि एक्सट्रीम एनवायरनमेंट में वायरस और सूक्ष्मजीव कैसे जीवित रहते हैं और इन्हें कैसे नष्ट किया जा सकता है.

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