यहां बीमार बच्चों को श्रापित मानते हैं लोग, अपने ही बच्चे को मौत के घाट उतार देते हैं मां-बाप

कारो जनजाति ने एक साथ 15 बच्चों को मगरमच्छ के मुंह में डाल दिया था (फेसबुक)

कारो जनजाति ने एक साथ 15 बच्चों को मगरमच्छ के मुंह में डाल दिया था (फेसबुक)

साउथ अफ्रीका (South Africa) के इथोपिया (Ethiopia) में रहने वाले कारो जनजाति (Karo Tribe) के लोग कुछ बच्चों को श्रापित मानते हैं. अगर बच्चा कमजोर है या किसी बीमारी से ग्रस्त है, तो उसका इलाज करवाने की जगह मां-बाप उसे नदी में जिंदा फेंक देते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2021, 1:05 PM IST
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आजतक अपने देखा-सुना होगा कि मांबाप अपने बच्चों के लिए किसी भी मुश्किलों से लड़ जाते हैं. अगर बच्चे को कुछ हो जाए, तो पेरेंट्स की रातों की नींद उड़ जाती है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा समुदाय है, जहां मां-बाप अपने ही हाथों से अपने बच्चों को मौत के घाट उतार देते हैं. अगर बच्चा कमजोर पैदा हुआ है या उसे किसी तरह की बीमारी होती है, तो मां-बाप पानी में डुबोकर उसे मार डालते हैं.

डॉक्टर नहीं पहुंचा देते हैं यमराज के पास

इथोपिया में रहने वाले कारो समुदाय के लोग बीमार बच्चों को श्रापित मानते हैं. यहां कमजोर या दिव्यांग बच्चों को श्रापित माना जाता है. मां बाप बच्चे के बीमार होने पर उसे डॉक्टर के पास नहीं ले जाते. ना खिला पिला कर उसकी सेहत सुधारने की कोशिश करते हैं. यहां ऐसे बच्चों को सीधे मार दिया जाता है. अगर मां-बाप की सहमति ना मिले तो गांव वाले ही जबरदस्ती बच्चों को मौत के घाट उतार देते हैं.

जिंदा फेंक देते हैं नदी में
कारो समुदाय में बीमार बच्चों को मां-बाप ही मौत दे देते हैं. इसके लिए कई तरह के तरीके अपनाए जाते हैं. कुछ लोग इन बच्चों को ऊंचाई से नदी में फेंक देते हैं तो कुछ बच्चों को पानी से भरे बर्तन में डुबोकर मार डालते हैं. कारो समुदाय तब चर्चा में आया था जब यहां रहने वाली एक महिला ने गांव वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी. उसने बताया था कि गांव वालों ने मिलकर एक साथ 15 बच्चों को, जिन्हें वो श्रापित मानते थे, को जिंदा ही मगरमच्छ को खिला दिया था.

इन बच्चों को मानते हैं श्रापित

करो समुदाय के लोग बीमार बच्चों को श्रापित मानते हैं. इसके अलावा अगर कोई बच्चा कमजोर है, दिव्यांग है तो वो भी श्रापित माना जाता है. इसके अलावा जुड़वा पैदा हुए बच्चे, या जिन बच्चों के दांत के ऊपर दांत हो, वो भी श्रापित की केटेगरी में आते हैं. गांव वालों का मानना है कि अगर इन बच्चों को जिंदा छोड़ा गया तो गांव में प्रलय आ जाएगा. महामारी फ़ैल जाएगी और गांव वालों की मौत हो जाएगी. इसलिए इन बच्चों को मार डाला जाता है.
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