भारत में दिखा 'कॉर्न मून', इस वजह से 'फुल मून' को मिला ये नाम

भारत में दिखा 'कॉर्न मून', इस वजह से 'फुल मून' को मिला ये नाम
भारत में कॉर्न मून दिखाई दिया है.

नासा (Nasa) के मुताबिक इस खगोलीय घटना (Corn Moon) की तारीख पर दिन और रात एक ही समय की अवधि के होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 2:45 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारत में एक सितंबर यानी बीती रात को 'कॉर्न मून' (Corn Moon) की रोशनी से आकाश जगमगा उठा. अमेरिकी अतंरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक 2 सितंबर को भी 'फुल मून' (Full Moon) दिखेगा, लेकिन इस फुल मून को 'कॉर्न मून' कहा जा रहा है. नासा के मुताबिक इस खगोलीय घटना की तारीख पर दिन और रात एक ही समय की अवधि के होते हैं. भारत में यह खगोलीय घटना 1 सितंबर की रात में हुई और 2 सितंबर को भी देखने को मिलेगी.

इस फुल मून को 'कॉर्न मून' इसलिए कहा जा रहा है, क्‍योंकि शरद ऋतु के पहले होने वाली इस खगोलीय घटना की तिथि पर दिन और रात एक बराबर होते हैं. 'कॉर्न मून' को इसका नाम अमेरिकी लोगों से मिला है. वह भी मानते हैं कि इस समय मकई की फसल उगाने का सही वक्‍त होता है. इसके बाद 1 अक्‍टूबर को 'हार्वेस्‍ट मून' और 31 अक्‍टूबर को 'हंटर मून' की खगोलीय घटना होगी. इसका मतलब यह भी है कि हैलोवीन की रात एक दुर्लभ नीला चांद चमकता दिखाई देगा.

किसानी पंचांग के अनुसार, नीला चांद केवल 18 से 19 साल में एक बार दिखाई देता है. हैलोवीन पर अगला नीला चांद 2039 में दिखाई देने वाला है. चांद को जौ यानी 'बार्ले मून' (Barley Moon) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि किसान इसे जौ की फसल काटने का सही समय मानते हैं.



CNN के मौसम विज्ञानी जडसन जोन्स के मुताबिक यह फुल मून एक दृश्य है, जो पूर्वी क्षितिज पर दिखता है. जोन्‍स के मुताबिक, 'जब चांद क्षितिज पर निचले हिस्‍से पर होता है, तो यह बड़ा दिखाई देता है. जब आप शहर में होते हैं और आप दो इमारतों के बीच या आसमान पर देख रहे होते हैं तो यह बहुत बड़े आकार का दिखाई देता है.'
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