जिसे मान लिया था मरा हुआ, वो 100 साल बाद लौट आया ! अब दुनिया हैरान

1906 के बाद इस प्रजाति को देखा नहीं गया था. Gustavo Manrique M. (Photo Credit- Twitter)

1906 के बाद इस प्रजाति को देखा नहीं गया था. Gustavo Manrique M. (Photo Credit- Twitter)

वैज्ञानिकों ने जिसका इस धरती से अस्तित्व ही 100 साल पहले खत्म घोषित कर दिया था, वो अब भी ज़िंदा है. अब दुनिया इस बात को देखकर हैरान है कि आखिर ये इतने दिन कहां रहा और इसका परिवार कहां है?

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सोचिए, जिसे दुनिया मरा हुआ समझकर इतिहास बना चुकी हो, वो लौटकर आ जाए तो कैसा होगा? सब हैरान रह जाएंगे न ? तो ऐसी ही हैरानी वैज्ञानिकों को तब हुई, जब कछुए की उस प्रजाति का एक सदस्य उन्हें दिखाई दे गया, जिसे वे 100 साल पहले समाप्त मान चुके थे.

कछुओं की इस प्रजाति का नाम है शिलोनोयडिस फैंटास्टिकस (Chelonoidis phantasticus).इस प्रजाति की जो आखिरी सदस्य दिखाई दी है, वो मादा कछुआ है. ये पिछले 100 साल से (Extinct 100 Years ago) दिखाई नहीं दी लेकिन हाल ही में इक्वाडोर के गैलापैगोस आइलैंड (Galapagos Island) पर इसे वापस देखा गया है.

पूरी तरह स्वस्थ है मादा कछुआ

ये विशालकाय मादा कछुआ फर्नांडिना आइलैंड पर देखी गई थी. तब इसका हेल्थ चेक अप किया गया और खाने-पीने की व्यवस्था की गई. अब वैज्ञानिकों ने जब इसकी प्रजाति पता की तो वे चक्कर खा गए क्योंकि जिस प्रजाति को धरती से 100 साल पहले ही खत्म घोषित किया जा चुका था, ये मादा कछुआ उसी प्रजाति की है. इसकी उम्र 100 से भी ज्यादा है और ये पूरी तरह स्वस्थ है.


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अब वैज्ञानिक ढूंढेंगे इसका परिवार



मादा कछुआ को सांतक्रूज आइलैंड के ब्रीडिंग सेंटर में रखी गई है और अब वैज्ञानिक इसके जैसे और कछुओं की खोज करेंगे. उन्हें लगता है कि जिस आइलैंड पर ये मिली, वहां इस प्रजाति के और भी कछुए हो सकते हैं. इस कछुए के डीएनए टेस्ट का काम येल यूनिवर्सिटी (Yale University) के वैज्ञानिकों ने किया. उन्होंने 1906 में विलुप्त हुई प्रजाति के कछुओं के DNA से इसा मिलान किया तो पता चला ये उसी प्रजाति की है. शिलोनोयडिस फैंटास्टिकस (Chelonoidis phantasticus)कछुए को आखिरी बात 1906 में देखा गया था.

बेहद खास है गैलापैगोस आइलैंड

जहां से ये मादा कछुआ मिली है, वो गैलापैगोस आइलैंड भी बेहद खास है. ये वही जगह है जहां महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन (British scientist Charles Darwin) ने इवोल्यूशन की ध्योरी रखी थी. यहां आज भी तमाम प्रजातियों के जीव-जंतु और पेड़-पौधे मौजूद हैं. यहां अकेले कछुओं की ही संख्या 60 हजार के करीब है. ये बात अलग है कि अब ये धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं.

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