हिमालय में पहली बार दिखी उड़ने वाली गिलहरी, 130 सालों से वैज्ञानिक कर रहे थे तलाश

युनान वूली फ्लाइंग स्क्वेरल. (photo credit-PR IMAGE)

उड़ने वाली गिलहरी (Flying Squirrels) की प्रजातियां पहले भी भारत के पहाड़ी इलाकों में देखी जा चुकी हैं लेकिन इस बार जो गिलहरियां दिखी हैं, ये काफी विशालकाय (Giant flying squirrels ) हैं. शायद दुनिया की सबसे बड़ी गिलहरियों में इनकी गिनती की जाएगी.

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    गिलहरी को ज़मीन पर तेज़ी से भागते और उछल-कूद करते हुए तो आपने खूब देखा होगा लेकिन दुनिया की सबसे ऊंची जगहों पर ऐसी भी गिलहरियां पाई जाती हैं, जो उड़ सकती हैं. ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों (Australian Scientists) ने ऐसी ही एक विशालकाय गिलहरी (Flying Squirrels) को ढूंढ निकाला है. ये गिलहरी जीवों की कुछ बेहद दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है.

    इस गिलहरी का वजन करीब ढाई किलो है और लंबाई एक मीटर है. आमतौर पर गिलहरियां न तो इतनी वज़नदार और न ही इतनी लंबी होती हैं. इस तरह की गिलहरियां दुनिया की कुछ सबसे ऊंची पहाड़ियों पर मिलती हैं. खास तौर पर एशिया में हिमालय की पहाड़ियों पर इनका डेरा है. इनके इंतज़ार में वैज्ञानिकों ने 130 साल बिता दिए, उन्हें उम्मीद थी कि ये पाकिस्तान में सुदूर घाटियों पर कहीं रहती हैं. फिलहाल दो गिलहरियों को हिमालय के पहाड़ों पर देखा गया है.

    दुनिया की विशालयकाय गिलहरियां 

    ऑस्ट्रेलियन म्यूजियम के चीफ साइंटिस्ट प्रोफेसर क्रिस्टोफर हेलगन और रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर स्फीफन जैक्सन के शोध के मुताबिक म्यूजियम में मौजूद डेटा को देखकर ये पता चलता है कि इस तरह की गिलहरियों में दो नई प्रजातियां सामने आई हैं - ताइबेतन वूली उड़ने वाली गिलहरी (Tibetan Woolly Flying Squirrel) और युनान वूली उड़ने वाली गिलहरी (Yunnan Woolly Flying Squirrel). जो गिलहरियां अब देखी गई है, ये काफी ज्यादा बड़ी है. ऐसे में प्रोफेसर हेलगन कहते हैं कि इसको साल के अंत तक ही कोई वैज्ञानिक नाम दिया जा सकेगा. ये दुनिया की कुछ सबसे विशालकाय गिलहरियों में से एक है.

    भेड़िए जैसी पूंछ, खूबसूरत रोएं 
    इन गिलहरियों के रोएं सॉफ्ट हैं और ये काफी खूबसूरत हैं. यही चीज़ उन्हें दूसरों से अलग बताती है. इनकी किसी भेड़िए की तरह बड़ी और रोएंदार है. इन्हें ऊंची जगहों पर रहना पसंद है. डॉक्टर जैक्सन कहते हैं कि ये गिलहरियां करीब 4800 मीटर की ऊंचाई पर रहती हैं, जो एवरेस्ट की आधी है. ऐसे में कहा जा सकता है कि इन्हें आबादी के बीच रहना पसंद नहीं. यही वजह है कि लोग इनसे ज्यादा परिचित भी नहीं हैं.