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इमारत के बीचोबीच से गुजरता है ये हाईवे! आसाना नहीं था इसे बनाना, जानिए कैसे हुआ है निर्माण

इमारत को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ट्रैफिक के कारण इमारत में वाइब्रेशन ना मेहसूस हो
इमारत को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ट्रैफिक के कारण इमारत में वाइब्रेशन ना मेहसूस हो

जापान (Japan) के ओसाका (Osaka) शहर में आर्किटेक्चर (Architecture) का बेमिसाल नमूना देखने को मिलता है. यहां 16 मंजिल (16 storey building) की एक इमारत है जिसका नाम गेट टावर बिल्डिंग (Gate Tower Building) है. इस बिल्डिंग की खासियत ये है कि कि इसके बीचोबीच से एक हाईवे (Highway) गुजरता है. ऐसा दुनिया में और कहीं देखने को नहीं मिला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 11, 2021, 12:39 PM IST
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जापान की तकनीक पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. इस देश ने कई ऐसी चीजें बनाई हैं जो लोगों को हैरान करती हैं. ऐसी ही हैरान करने वाली एक इमारत जापान में है जो पिछले काफी समय से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती रही है. इस बिल्डिंग की खासियत ये है कि इसके बीच से एक हाईवे गुजरता है. जी आपने सही सुना! पहले आप इस हाईवे की तस्वीर देख लीजिए तब आपको हमारी बातों पर यकीन होगा!
जापान के ओसाका शहर में आर्किटेक्चर का बेमिसाल नमूना देखने को मिलता है. यहां 16 मंजिल की एक इमारत है जिसका नाम गेट टावर बिल्डिंग है. इस बिल्डिंग की खासियत ये है कि कि इसके बीचोबीच  से एक हाईवे गुजरता है. ऐसा दुनिया में और कहीं देखने को नहीं मिला है. इमारत के बीच से हाईवे जाने के कारण भी इमारत पर कोई असर नहीं पड़ता और ना ही ट्रैफिक पर किसी तरह की रोक है. इमारत को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ट्रैफिक के कारण इमारत में वाइब्रेशन ना मेहसूस हो और ना ही ट्रैफिक के कारण शोर हो. इमारत के अंदर एलिवेटर लगे हुए हैं और हाईवे भी इमारत को नहीं छूता है.


गेट टावर बिल्डिंग एक जमीन के लिए 5 साल चले एक केस के बाद हुए समझौते का नतीजा है. जहां ये बिल्डिंग मौजूद है उसके प्रॉपर्टी राइट एक कंपनी के पास थे. यहां बनी इमारत को मरम्मत की सख्त जरूरत थी. 1983 में जब इस प्लॉट के रीडेव्लपमेंट की बाद शुरु हुई जापानी सरकार की ओर से इस प्लॉट के मालिकों को जमीन के अधिकार से वंचित कर दिया गया क्योंकि सरकार ने हान्शिन एक्सप्रेसवे की परियोजना बनाई थी जिसे उस प्लॉट से होते हुए ही जाना था. इसके बाद कोर्ट में जमीन को लेकर केस शुरु हो गया. एक्सप्रेसवे बनने में देरी ना हो इसलिए पांच साल बाद प्रशासन ने तय किया कि प्लॉट का अधिकार प्लॉट के असली मालिकों के पास ही रहेगा और प्लॉट के मालिक भी इस बात पर राजी हो गए कि प्लॉट से होते हुए ही एक्सप्रेसवे बनेगा. इसलिए ये हाइवे किरायदार के रूप में इस इमारत से होकर गुजरता है. हाईवे का नाम इमारत के किरायदारों की लिस्ट में लिखा हुआ है और हाईवे प्रशासन को इमारत में किरायदार होने के चलते किराया देना पड़ता है.

इस इमारत की 5वीं से 7वीं मंजिल तक लिफ्ट से नहीं जा सकते क्योंकि उस फ्लोर से हाईवे गुजरता है. आठवीं मंजिल से हाईवे के ट्रैफिक को देखा जा सकता है. गेट टावर इमारत फिलहाल टीकेपी कॉरपोरेशन का हेडक्वार्टर है. लोगों को लगता है कि हाईवे गुजरने के कारण इमारत में मौजूद लोगों को कितना शोर का सामना करना पड़ता होगा, खासकर चौथी और आठवीं मंजिल के लोगों को मगर ऐसा नहीं है. हाईवे ऐसे बना है कि वो इमारत से छूकर नहीं जाता है और इमारत को भी अंदर से इट ढंग से तैयार किया गया है कि कोई शोर नहीं आता है.
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