इंसानों की तरह अब मधुमक्खियों में भी फैला वायरस, जॉम्बी बन खा रही हैं अपने ही लार्वा

मधुमक्खियों में फैला खतरनाक वायरस.

मधुमक्खियों में फैला खतरनाक वायरस.

इंसानों में कोरोनावायरस (Coronavirus) के भयानक परिणाम पूरी दुनिया देख रही है. अब इससे भी ज्यादा खतरनाक वायरस मधुमक्खियों (honeybees) में लग रहा है. इस वायरस के चलते मधुमक्खियां जॉम्बी (zombie) जैसा व्यवहार कर रही हैं और अपनी ही कॉलोनी खत्म कर देती हैं.

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नई दिल्ली. बीमारी का क्या कहें? कब किसे कौन सा मर्ज़ लग जाए कुछ कहा ही नहीं जा सकता. ये बात सिर्फ इंसान ही नहीं, जानवरों पर भी लागू होती है. इंसानों की बीमारी का फिर भी इलाज ढूंढ लिया जाता है लेकिन अगर बीमारी मधुमक्खियों में हो तो कैसे दूर होगी? एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि मधुमक्खियां (honeybees)भी आजकल एक ऐसी बीमारी से परेशान हैं, जो उन्हें नरभक्षी बना रही है.

मधुमक्खियों (honeybees)का ज़ॉम्बी बनाने वाली इस बीमारी का प्रभाव इस कदर है कि वो अपने ही प्यूमा को मारकर खा ले रही हैं. इस खतरनाक वायरस के चलते मधुमक्खियों में तीन तरह के लक्षण आ रहे हैं- पहला तो ये कि उनके पंख खत्म हो रहे हैं, दूसरा पेट फूल रहा है और दिमाग सुस्त होता जा रहा है.

क्या है ये बीमारी?

मधुमक्खियां जिस वायरस की ज़द में आ रही हैं, इसका नाम है डिफॉर्म्ड विंग वायरस (DWV) या फिर ट्रोज़न हॉर्स वायरस (Trojan Horse Virus). बताया जा रहा है कि ये वायरस एक माइट (Mite)यानि घुन के ज़रिये मधुमक्खियों के छत्ते में प्रवेश करता है. पहले तो ये प्यूमा का खाता है और जैसे ही मधुमक्खियों को ये पता चलता है, वे जाकर उसे खा लेती हैं. इस तरह ट्रोजन हॉर्स वायरस मधुमक्खियों के भी शरीर में पहुंच जाता है. इसके बाद उनका पेट फूलना, पंख खत्म होना शुरू हो जाता है. दिमाग इतना सुस्त हो जाता है कि वे अपनी कॉलोनी का भला-बुरा भी भूल जाती हैं.
मधुमक्खियों की आबादी खत्म करने वाली बीमारी

स्टडी में खुलासा हुआ है कि ट्रोजन हॉर्स वायरस (Trojan Horse Virus) या फिर DWV मधुमक्खियों की आबादी के लिए किसी महामारी से कम नहीं है. ये कई जगहों मधुमक्खियों की कॉलोनी ही खत्म कर चुका है. वे वायरस के चलते जॉम्बी की तरह अपने ही प्यूमा को मारकर खाती जा रही हैं. इस रिसर्च को साइंटिफिक रिपोर्ट्स (Scientific Reports) नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

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मधुमक्खियां सफाई के लिए खाती हैं लार्वा और बन जाती हैं जॉम्बी

मधुमक्खियों में अक्सर देखा गया है कि उनके लार्वा की तबियत अगर खराब होती है तो वे दूसरों को बचाने के लिए उसे कैप्सूल से निकालकर मार देती हैं और खा जाती हैं. इसे हाजीनिक कैनिबैलिज्म (Hygienic Cannibalism) कहा जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये व्यवहार मधुमक्खियां कॉलोनी को सुरक्षित रखने के लिए करती हैं.

अमेरिकन कृषि विभाग के मधुमक्खी रिसर्च लेबोरेटरी के एक्स्पर्ट जे इवांस के मुताबिक वायरस ने घुन के अंदर घुसकर उसे ट्रोजन हॉर्स बनाया. जब वो कैनिबल होकर मधुमक्खियों के लार्वा को खाता है तो बीमार लार्वा को मधुमक्खियां सफाई के मकसद से खा जाती हैं. इसी प्रक्रिया में वायरस मधुमक्खियों को लग जाता है और उनकी ज़िंदगी खतरे में पड़ जाती है. यूं तो मधुमक्खियां बैक्टीरिया और फंगस के हमले को रोक लेती हैं लेकिन ये वायरस उनकी पहुंच से बाहर है.

बचाव ही बन रहा है मर्ज़

DWV के केस में मधुमक्खियों का बचाव वाला व्यवहार ही उन्हें मार रहा है. घुन के साथ ये वायरस उनके लार्वा और फिर पूरी की पूरी कॉलोनी को संक्रमित कर रहा है. वायरस के चलते जॉम्बी बनीं मधुमक्खियां अपनी कॉलोनी खत्म कर दे रही हैं. चूंकि मधुमक्खियां इंसानों की तरह ही समाज बनाकर रहती हैं और उनकी सामाजिक संस्था काफी मजबूत होती है. ऐसे में उनका ये व्यवहार उनके लिए घातक होता जा रहा है.

कोरोना (Covid-19) की तरह ही घुल-मिलकर रहने से फैलता है वायरस

मधुमक्खियों के साथ में खाने की प्रक्रिया पर एक्सपेरिमेंट करने से पता चला है कि वायरस एक साथ खाना खाने से भी फैलता है. माना जाता है बेहद सामाजिक मधुमक्खियों का कनेक्शन लगभग 2000 मधुमक्खियों से होता है और एक के संक्रमित होने से वायरस हजारों तक पहुंच रहा है.

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