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Amazing: यहां कोई चीज़ आसमान में उछाली जाए, तो ज़मीन पर वापस नहीं गिरती !

Amazing: यहां कोई चीज़ आसमान में उछाली जाए, तो ज़मीन पर वापस नहीं गिरती !

अमेरिका (United States) का हूवर डैम (Hoover Dam) पर गुरुत्वाकर्षण यानि ग्रैविटी (Gravity) न के बराबर है. (Credit- Pixabay)

अमेरिका (United States) का हूवर डैम (Hoover Dam) पर गुरुत्वाकर्षण यानि ग्रैविटी (Gravity) न के बराबर है. (Credit- Pixabay)

Place where gravity does not work: कोई चीज़ ऊंचाई से अगर नीचे आती है, तो उसके ज़मीन पर गिरने की वजह ग्रैविटी (Gravity) या गुरुत्वाकर्षण शक्ति है. यही वजह है कि अंतरिक्ष में चीज़ें (Space) तैरती रहती हैं. आपको आज हम धरती पर एक ऐसी जगह (Anti Gravity Places on Earth) के बारे में बता रहे हैं, जहां नीचे से आसमान में उछाली गई कोई भी चीज़ नीचे नहीं आती बल्कि आसमान में ही तैरती रहती है. इस तरह की घटना विज्ञान को भी हैरान करने वाली है.

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    दुनिया में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं. उन जगहों में शुमार है अमेरिका (United States) का हूवर डैम (Hoover Dam). इस जगह पर गुरुत्वाकर्षण यानि ग्रैविटी (Gravity) बिल्कुल न के बराबर है. यही वजह है कि यहां आसमान से चीज़ें नीचे आने के बजाय ऊपर ही तैरने लगती है.

    हूवर डैम (Hoover Dam) अमेरिका के नेवादा (Nevada) और एरिजोना (Arizona) राज्य की सीमा पर बना हुआ है. हूवर बांध कोलोराडो नदी (Colorado River) पर बना है. दरअसल हूवर डैम की बनावट ही ऐसी है जिसकी वजह यहां चीजें हवा में उड़ने लगती हैं और उनपर ग्रेविटी का असर नहीं होता है. अगर कोई भी चीज़ यहां ऊपर की ओर उछाली जाए, तो डैम की दीवार से टकराकर वो ऊपर ही तैरती रहती है.

    ज़ीरो ग्रैविटी के करीब है ये जगह
    हूवर डैम (Hoover Dam has zero gravity) के आस-पास ग्रैविटी लगभग ज़ीरो है. इसकी वजह डैम की बनावट है. ये डैम धनुष के आकार में बना हुआ है. यही वजह है कि कोई भी चीज़ यहां ऊपर की तरह उछालने पर ये बांध की दीवार से टकराकर हवा (Place where gravity does not work) में उड़ने लगती है. डैम की दीवार से भी कुछ नीचे फेंका जाए, तो वो नीचे नहीं आता बल्कि ऊपर ही तैरता रहता है. देखने में ये नज़ारा किसी चमत्कार या साइंस फिक्शन मूवी की तरह लगता है. ये अमेरिका के सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशंस में से एक है. इसके निर्माण को 90 साल बीत चुके हैं, लेकिन बांध आज भी सक्रिय है.

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    ऊंचाई की वजह है कम है गुरुत्वाकर्षण
    कोलोराडो नदी पर बना हुआ ये बांध अपनी इसी खासियत की वजह से दुनिया भर में मशहूर है. बांध की लंबाई 2334 किलोमीटर है, जबकि ऊंचाई की बात करें तो बांध 726 फीट ऊंचा है. बांध के बेस की मोटाई 660 फीट है. आम भाषा में ये फुटबॉल के दो स्टेडियम्स के बराबर है. बांध का निर्माण 1931 से 1936 के बीच हुआ था. इसका नामकरण अमेरिका के 31वें राष्ट्रपति हर्बर्ट हूवर के नाम पर हुआ था. अपनी इंजीनियरिंग की वजह से इसने दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रखी हैं.

    Tags: Bizarre story, Interesting story, United States (US)

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