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इंसान और जंगली वानर एक जैसे इशारों में करते हैं बातचीत , वीडियो स्‍टडी में चौंकाने वाले दावे, आप भी रह जाएंगे दंग

scientific journal PLOS Biology में पब्लिश एक वीडियो स्‍टडी से पता चला है कि  इंसान और जंगली वानर एक जैसे इशारों में बातचीत करते हैं . (Photo-canva)

scientific journal PLOS Biology में पब्लिश एक वीडियो स्‍टडी से पता चला है कि इंसान और जंगली वानर एक जैसे इशारों में बातचीत करते हैं . (Photo-canva)

scientific journal PLOS Biology में पब्लिश एक वीडियो स्‍टडी से पता चला है कि इंसान और जंगली वानर एक जैसे इशारों में बा ...अधिक पढ़ें

साइंस इस बात को मानता है कि इंसानों के पूर्वज वानर ही थे. आप भी इस बात से सहमत होंगे. पर क्‍या दोनों के कम्‍युनिकेशन का तरीका भी एक है? एक स्‍टडी में चौंकाने वाले दावे किए गए हैं. कहा गया है कि वानर बातचीत के लिए जिन संकेतों का इस्‍तेमाल करते हैं वह इंसानों की तरह ही है. जैसे इंसान अपने लोगों से बात करते हैं ठीक उसी तरह वानर भी बातचीत करते हैं. इतना ही नहीं, इंसान जो कुछ संवाद करते हैं चिंपांजी उसे समझते हैं और उस पर रिएक्‍ट भी करते हैं.

इशारे और संवाद एक जैसा
स्‍कॉटलैंड की सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का यह अध्‍ययन साइंस जर्नल पीएलओएस बायोलॉजी ( scientific journal PLOS Biology) में प्रकाशित हुआ है. लीड रिसर्चर डॉ कर्स्टी ग्राहम ने समझाया कि संवाद करने का यह इशारा-आधारित तरीका गोरिल्ला और वनमानुषों सहित वानरों और मानवों की सभी प्रजात‍ियों में एक जैसा पाया गया. इससे पता चलता है कि हमारे पूर्वज जो चिंपैंजियों के साथ रहते थे वे इसी तरह की भाषा का इस्‍तेमाल करते थे. यहीं से हमारी भाषा बनी है जो आज हम बोलते या समझते हैं.

नवजात शिशु उन्‍हीं इशारों का करते इस्‍तेमाल
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ कर्स्टी ग्राहम ने बताया कि इंसानों के नवजात शिशु भी इनमें से कुछ इशारों का इस्तेमाल करते हैं. ध्‍यान से देखें तो इसे हम समझ पाएंगे. हमें पहले संदेह था लेकिन अब इससे पुष्टि हो गई है. दरअसल, साइंटिस्‍ट वानरों में कम्‍युनिकेशन का तरीका क्‍या है, इसकी पड़ताल कर रहे हैं ताक‍ि पता चल सके कि इंसान आज जो भाषा बोलता है उसकी उत्‍पत्‍त‍ि कैसे हुई.

चिंपैंजी सबसे ज्‍यादा निकट
साइंटिस्‍ट के मुताबिक, चिंपैंजी इंसानों के सबसे ज्‍यादा इशारे समझता है या उनकी तरह बात कर सकता है. कम्‍युनिकेशन के 80 तरीके ऐसे हैं जिसमें दोनों एक ही तरह बात करते हैं. चिंपैंजियों के पास एक तरह का शब्‍दकोश है. इन्‍हीं के जर‍िए वे अपने साथ‍ियों से संवाद करते हैं.

किस तरह के इशारे
जैसे किसी को बताना हो कि मैं हूं तो हम अपने सीने पर हाथ मारते हैं. ठीक उसी तरह चिंपांजी भी करते हैं. जब हमें खाना मांगना होता है तो हम अपने मुंह पर बार-बार हाथ रखते हैं. चिंपैंजियों का तरीका भी बिल्‍कुल यही है. दांतों से पत्तियां फाड़ना चिंपैंजी के चुलबुलेपन का इशारा है.

कैसे हुआ यह प्रयोग
वैज्ञानिकों ने इशारे समझने के लिए वीडियो प्‍लेबैक एक्‍सपेरिमेंट का सहारा लिया. उन्‍होंने सबसे पुराने वीडियोज देखे जिनमें इंसानों और चिंपैंजियों के इशारे दिख रहे थे. वालंटियर्स ने चिंपैंजी और बोनोबोस के इशारों के वीडियोज देखे, फिर उसे समझने के लिए ट्रांसलेटर्स को दिए. सेंट एंड्रूज यूनिवर्सिटी की डॉ. कैथरीन होबैटर ने कहा, हम नतीजों से वास्तव में हैरान थे. उन इशारों को हम सहज रूप से समझ सकते हैं.

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