खतरनाक साइंस: गर्भवतियों के शरीर में डाले जाते थे जानलेवा वायरस, होश में रखकर किया जाता था ये काम!

खतरनाक साइंस की इस सीरीज़ में मानवजाति पर किए गए अब तक के क्रूरतम प्रयोग के बारे में जानिए, जिसके खुलासे ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था.

Vandana Tiwary | News18Hindi
Updated: March 26, 2019, 10:37 PM IST
खतरनाक साइंस: गर्भवतियों के शरीर में डाले जाते थे जानलेवा वायरस, होश में रखकर किया जाता था ये काम!
प्रतीकात्मक तस्वीर
Vandana Tiwary | News18Hindi
Updated: March 26, 2019, 10:37 PM IST
विश्व युद्ध के दौरान खुद को सशक्त करने की होड़ में दुनिया भर में कई तरह के 'खतरनाक' और 'भयानक' प्रयोग किए जा रहे थे. इन्हीं में से एक था 'यूनिट 731'. यह 'खौफनाक' प्रयोग जापानी सेना ने चीन के बंदी बनाए हुए लोगों पर किया था. जिंदा लोगों के शरीर को चीर फाड़ कर उनमें प्लेग और कई खतरनाक बीमारियों के विषाणु छोड़े थे, जिससे करीब 3000 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई. खतरनाक साइंस की इस सीरीज़ में हम मानवजाति पर किए गए अब तक के सबसे क्रूरतम प्रयोग के बारे में बताएंगे, जिसके खुलासे ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था.

साल 1931 में द्वितीय विश्व युद्ध़ के दौरान जापान ने मंचूरिया पर हमला कर चीन के साथ युद्ध की शुरुआत की थी. इसके बाद साल 1937 में जापान ने चीन पर हमला कर दिया. इस हमले ने चीन को बिलकुल कमजोर कर दिया, जिसके कारण गृह युद्ध और अकाल की स्थिति पैदा हो गई. इस दौरान कई हजार लोग मारे गए.सिर्फ इतना ही नहीं, जापान के इंपरियल आर्मी ने चीन के लोगों पर इस कदर जुल्म ढ़ाए, जिसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी.

साल 1932 में जापान ने चीन पर जैविक हमला भी किया गया, जिसमें हवाई जहाज से प्लेग के विषाणु का छिड़काव किया गया था. इस घटना के बाद उस पूरे इलाक़े में प्लेग फैल गया था.

'यूनिट 731' की बिल्डिंग (विकिपीडिया)


जापानी सैनिक ने चीन में रिसर्च और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के लिए एक यूनिट बनाई, जिसका नाम रखा गया- 'यूनिट 731'. इस यूनिट का आधिकारिक नाम महामारी निवारण और जल शुद्धिकरण विभाग था. इस यूनिट को मूल रूप से जापाकेम्पेटाई सैन्य पुलिस ने गठित की थी और इसका मुख्य लीडर जनरल शीरो ईशी. इस यूनिट में कई तरह की जानलेवा बिमारियों पर शोध की जाती थी. इस शोध के लिए दुश्मन सेना के बंदी बनाए हुए कैदियों को अपना विषय बनाया जाता था. उन कैदियों के शरीर में जानलेवा बिमारियों के विषाणु छोड़े जाते थे, जिससे उनके अंदर होने वाले बदलाव का पता लगाया जा सके.

(फोटो सोर्स: ज़िन्हुआ)


क्या था 'यूनिट 731':
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यूनिट 731 को चीन के पिंगफांग शहर में बसाया गया था , जो बाद में जाकर तबाही का सबसे बड़ा केंद्र बना. जापान की इंपरियल आर्मी यहां इंसानों पर जानलेवा और घातक एक्सपेरिमेंट किया करती थी. शुरुआत में ये प्रयोग चीनी सेना की सिपाहियों के ऊपर किया जाता था, लेकिन बाद में ये आम नागरिकों पर भी किया जाने लगा. इस प्रयोग का मकसद था- भयंकर से भयंकर बीमारियों का मानव शरीर पर होने वाले असर को देखना. इस प्रयोग के दौरान क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं. यहां तक कि, गर्भवती महिलाओं के पेट को चीर-फाड़ कर उनके शरीर में प्लेग जैसे खतनाक बीमारियों के जीवाणु छोड़े जाते थे.और ये सबकुछ उन्हें होश में रखकर किया जाता था. 'यूनिट 731' ने चीनी आर्मी पर कई खतरनाक प्रयोग किए थे. जैसे:

फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग- इस प्रयोग के दौरान कैदियों के हाथ को बर्फ से भरे ठंडे पानी मे डालकर तब तक रखा जाता था, जब तक उसका हाथ बर्फ से पूरी तरह ढक न जाए. कभी-कभी कैदियों के हाथ को खौलते हुए पानी और आग में डाल दिया जाता था, सिर्फ ये देखने के लिए की उनके हाथ कितनी तकलीफ झेल सकते हैं.

(फोटो सोर्स: ज़िन्हुआ)


हथियारों का प्रशिक्षण- जापानी आर्मी अपने हथियारों के प्रशिक्षण के लिए कैदियों का इस्तेमाल करती थी. कैदियों को बांधकर उनपर गोला-बारूद फेका जाता था. इसके अलावा तरह-तरह के हथियारों का इस्तेमाल उनपर किया जाता था, और उसके बाद उन्हें लगने वाले चोट और घाव का निरीक्षण किया जाता था. सिर्फ इतना ही नहीं, कैदियों को बिना खाना-पानी दिए बगैर बंदी बनाकर रखा जाता था, सिर्फ ये देखने के लिए की वह लोग कितने दिन तक जिंदा रह सकते हैं.

(फोटो सोर्स: ज़िन्हुआ)


सिफलिस एक्सपेरिमेंट- उस दौरान इजिप्ट में एक जानलेवा बीमारी फैल रही थी, जिसका नाम था सिफलिस.जापान ने इस बीमारी का अध्ययन करने के लिए इसके जीवाणु बंदी बनाये हुए कैदियों में डाल दिये थे.इस बीमारी को फैलाने के लिए इससे ग्रसित हुए कैदियों को वह चीन के औरतों के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने के लिए भी मजबूर करते थे.

बलात्कार और औरतों को गर्भधारण करने के लिए किया जाता था मजूबर - महिला कैदियों के साथ जापानी आर्मी जबरदस्ती संबंध बनाकर उन्हें गर्भधारण के लिए मजबूर करती थी. जिसके बाद गर्भवती महिलाओं के ऊपर वह तरह-तरह के हथियारों का प्रयोग करती थी. इतना ही नहीं, वह उनके शरीर में जानलेवा बीमारियों के जीवाणु भी छोड़ देते थे, सिर्फ ये देखने के लिए की वो कितने दिन तक जिंदा रह पाती है.

(फोटो सोर्स: ज़िन्हुआ)


अगस्त 1945 में, हिरोशिमा और नागासाकी दोनों पर बमबारी होने के बाद, सोवियत सेना ने मंचूरिया पर आक्रमण कर दिया. इस लड़ाई में जापानी सेना बुरी तरह से हार गई और यूनिट 731 को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था.हालांकि, इस यूनिट में किए गए ज्यादातार प्रयोग को जला दिया गया था. इसके साथ ही जापान ने 13 वर्षों के रिसर्च में पाए गए सभी उपयोगी जानकारी को भी नष्ट कर दिया.

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