दुनिया की सबसे महंगी कॉफी की कीमत जान उड़ जाएंगे होश, स्मार्टफोन के बराबर है एक कप का दाम!

(फोटो: Instagram/@twcoffeespeciality)

हेनरीक ( Henrique Sloper de Araújo) ने कहा कि आइडिया आने के बाद कॉफी (Coffee) बीन चुनने वालों को मल से कॉफी बीन चुनने के लिए मनाना काफी मुश्किल कार्य था. इसके लिए उन्होंने कॉफी चुनने वालों को ज्यादा रुपये दिया. उनके दिमाग को बदलना मुश्किल कार्य था मगर वो धीरे-धीरे कॉफी बीन मल से चुनने लगे.

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    कॉफी (Coffee) के शौकीनों के लिए ये खबर शॉकिंग हो सकती है क्योंकि आज हम आपको ऐसी कॉफी के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी नॉर्मल कॉफी से बहुत मेहंगी है. जाकू बर्ड कॉफी दुनिया की सबसे दुर्लभ और महंगी कॉफियों में से एक है. ब्राजिल का कैमोसिम एस्टेट, ब्राजिल का सबसे छोटा कॉफी प्लांटेशन है मगर इस कॉफी प्लांटेशन की आमदनी काफी ज्यादा है. वो इसलिए क्योंकि यहां जाकू बर्ड कॉफी (Jacu Bird Coffee) होती है. ये कॉफी एक हजार डॉलर प्रति किलो की मिलती है. यानी 72 हजार रुपये प्रति किलो.

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    (फोटो: Instagram/@bettoauge)


    यहां इस कॉफी को बनाने की शुरुआत 2000 के दशक में हुई. हेनरीक स्लोपर डी अराउजो नाम के व्यक्ति कॉफी प्लांटेशन था कैमोसिम एस्टेट. एक सुबह उसने देखा कि उसके कॉफी प्लांटेशन में जाकू चिड़िया ने तांडव मचा रखा है. चिड़िया ने कॉफी के प्लांटेशन को नष्ट कर दिया और सारे प्लांटेशन से कॉफी बीन्स को खा लिया. जाकू चिड़िया कॉफी की बहुत शौकीन नहीं थीं मगर हेनरीक की ऑरगैनिक कॉफी उनको शायद बहुत पसंद आई. जाकू चिड़िया ब्राजिल में विलुप्त होने वाली प्रजाति है इसलिए वहां कानून के जरिये इस चिड़िया को सुरक्षित रखा जाता है.

    हेनरीक ने पहले तो सारी चिड़िया को अपने कॉफी प्लांटेशन से भगाने की योजना बनाई. उसने पर्यावरण संरक्षकों को भी बुलाया मगर कानून के चलते कोई भी चिड़ियाओं को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचा पाया. मगर फिर हेनरीक को खयाल आया कि वो इंडोनेशिया के लोगों से एक आइडिया लें. दरअसल जब वो कम उम्र के थे तो सर्फिंग करने इंडोनेशिया गए थे. वहां उन्होंने देखा कि वहां दुनिया की सबसे मेहंगी कॉफी कोपी लुवाक को सिवेट जानवर के मल से निकाल कर बनाया जाता है. उन्होंने सोचा कि अगर इंडोनेशिया में जानवर के मल से कॉफी बीन निकालकर, प्रोसेक कर के बनाई जा सकती है तो ब्राजिल में क्यों नहीं!

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    (फोटो: Instagram/@badgeranddodo)


    हेनरीक ने कहा कि आइडिया आने के बाद कॉफी बीन चुनने वालों को मल से कॉफी बीन चुनने के लिए मनाना काफी मुश्किल कार्य था. इसके लिए उन्होंने कॉफी चुनने वालों को ज्यादा रुपये दिया. उनके दिमाग को बदलना मुश्किल कार्य था मगर वो धीरे-धीरे कॉफी बीन मल से चुनने लगे. मल से कॉफी चेरी चुनने का काम मुश्किल तो था मगर उसे भी मुश्किल था चेरी को मल से अलग करना, उसे साफ करना, और गंदगी से अलग करना. ये सब काम हाथ से किया जाता है. इसलिए ये कॉफी इतनी मेहंगी है.

    हेनरीक ने बताया कि जाकू चिड़िया सिर्फ सबसे अच्छी और पकी हुई कॉफी चेरी ही खाती है. वो कच्ची चेरी नहीं खाती. उन्होंने कहा- मैंने एक बार इस बात को गौर किया कि जाकू चिड़िया सिर्फ पकी हुई चेरी ही खाने के लिए चुनती है. वो कच्ची चेरी के गुच्छे छोड़ देती है. यहां तक की वो उन चेरी को भी छोड़ देती है जो अमूमन इंसान द्वारा चेरी तोड़ने के वक्त चुन लिए जाते हैं.

    कोपी लुवाक कॉफी, जो सिवेट के मल से बनती है, वो ज्यादा वक्त हजम होकर जानवर के शरीर से बाहर आने में लेती है. वहीं जाकू चिड़िया का खाना जल्द हजम हो जाता है जिससे बीन जल्दी मिल जाती है. बीन हासिल करने के बाद कई तरह से उसे प्रोसेस किया जाता है. जिसके बाद उसमें नटी और हल्का मीठा सा स्वाद आता है.

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