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30 साल पहले जेल से भाग गया था कैदी, कोरोना काल में खुद लौटा वापस, बोला- 'मुझे गिरफ्तार कर लो'

डार्को डॉगी डिस्क (Darko Dougie Desic) को 13 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन वो बीच में ही जेल तोड़कर भाग गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

डार्को डॉगी डिस्क (Darko Dougie Desic) को 13 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन वो बीच में ही जेल तोड़कर भाग गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

1 अगस्त 1992 में जेल से फरार हुआ डार्को नाम का शख्स 29 साल तक वापस नहीं आया. आखिरकार साल 2021 में वो खुद पुलिस स्टेशन (Police Station) पहुंचा और अपनी गिरफ्तारी का इंतज़ार (Man Turns Himself after 30 Years ) करने लगा. हालांकि अब लोग उनकी रिहाई के लिए कोशिश कर रहे हैं. आइए जानते हैं, भला ऐसा क्यों हो रहा है?

  • News18Hindi
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    एक ऑस्ट्रेलियन (Australia) कैदी को अब से 29 साल पहले न्यू साउथ वेल्स के ग्रैफ्टन करेक्शनल सेंटर (Grafton Correctional Centre, New South Wales) से गायब पाया गया था. इसके बाद से इस शख्स का कोई पता नहीं चला. जब पुलिस को भी उसके मिलने की उम्मीद खत्म होने लगी, तो एक रोज़ उसने खुद आकर अपनी गिरफ्तारी दे दी.

    डार्को डॉगी डिस्क (Darko Dougie Desic) नाम के शख्स को अफीम उगाने के जुर्म में 13 महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. आधी सज़ा पूरी होने के बाद ही डार्को जेल तोड़कर भाग गया था. पुलिस के लाख खोजने के बाद भी 29 साल तक डार्को का कोई पता नहीं चला. आखिरकार कोरोना काल (Coronavirus) में जब उसके पास रहने और खाने का कोई ठिकाना नहीं बचा, तो वो खुद ही पुलिस स्टेशन आ गया.

    सिडनी में शांति से जी रहा था ज़िंदगी
    युगोस्लाविया में पैदा हुआ डार्को (Darko Dougie Desic) ये शरणार्थी है. वो जेल से भागकर सिडनी के नॉर्थ बीचेज़ (North Beaches) पर पहुंचा था. यहां सालों तक वो मजदूर और मिस्त्री का काम करता रहा. इस दौरान वो खुद को काफी बचाकर रहता था. कहीं भी जाना हो, वो पैदल ही जाता था. 29 साल तक वो न तो किसी डॉक्टर के पास गया, न ही किसी डेंटिस्ट के पास. पहचान लिए जाने के डर से वो बेहद लो प्रोफाइल (Low Profile Life) ज़िंदगी जी रहा था. इस दौरान 20 साल तक शरणार्थी रहने की वजह से उसे इम्मिग्रेशन ऑफिशियल्स भी ढूंढ रहे थे. साल 2008 में उसे आवास भी अलॉट किया गया था. हालांकि कोई भी उसे ढूंढ नहीं पाया.

    कोरोना ने जीना हुआ मुहाल, तो वापस लौटा कैदी
    दिहाड़ी मजदूर के तौर ज़िंदगी जी रहे डार्को के लिए मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब कोरोना आया. न तो रोज़गार बाकी रहा, न ही रहने के लिए कोई जगह. ऐसे में उसके पास कोई चारा नहीं बाकी रह गया था, सिवाय आत्मसमर्पण करने के. डार्को ने आखिरकार पुलिस स्टेशन (Dee Why Police Station) में जाकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया और उसे कस्टडी से भागने के लिए बिना जमानत जेल की सज़ा सुनाई गई. डार्को जेल से इसलिए भागा था, क्योंकि उसे वापस युगोस्लाविया प्रत्यर्पित किए जाने का डर था और वो वहां जाना नहीं चाहता.

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    दिलचस्प बात ये है कि अब उस कम्युनिटी के लोग उसकी रिहाई की मांग कर रहे हैं, जहां वो रह चुका है. नॉर्थर्न बीचेज़ के एक बिजनेसमैन की बेटी बेली हिगिंस (Belly Hinggis) डार्को के लिए फंड इकट्ठा कर रही हैं और उसके लिए एक वकील का भी इंतज़ाम किया गया है. इन लोगों का कहना है कि वो बेहद कर्मठ और ईमानदार इंसान है और उसे आज़ाद ज़िंदगी जीने का हक है.

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