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1000 साल पहले आसमान से अचानक गायब हो गया था चांद! साइंटिस्ट्स ने अब ढूंढ निकाला इसका कारण

प्राचीन इतिहासकारों ने लिखा है कि उस रात जब चांद गायब हुआ तो आकाश में सब कुछ पहले जैसा था
प्राचीन इतिहासकारों ने लिखा है कि उस रात जब चांद गायब हुआ तो आकाश में सब कुछ पहले जैसा था

प्राचीन इतिहासकारों ने लिखा है कि उस रात जब चांद (Moon) गायब हुआ तो आकाश में सब कुछ पहले जैसा था, तारे चमक रहे थे मगर सिर्फ चांद गायब हो गया था. लोगों ने अंदाजा लगया कि ये चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) हो सकता है मगर विज्ञान के मुताबिक चंद्र ग्रहण में भी जो रोशनी चांद के द्वारा रिफलेक्ट होती है वो नजर में आती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 1, 2021, 10:39 AM IST
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नए साल का सूर्य उदय हो चुका है. आज नए साल की पहली रात होगी होगी. आज फिर चंद्रमा निकलेगा. देखा जाए तो ये आम बाते हैं. हर दिन सूरज और चांद निकलते हैं. इसमें ऐसी कोई बात नहीं है जिससे आपको हैरानी हो, मगर आपको ये जानकर जरूर हैरानी होगी की आज से करीब 1000 साल पहले चांद (Moon) आकाश से गायब हो गया था! आपने सही पढ़ा, सन् 1110 में चंद्रमा एक दिन के लिए गायब हो गया था. इस तरह का ये अपने आप में अनोखा और इतिहास का पहला मामला था. उस दौरान से लेकर आज तक साइंटिस्ट चांद के इस तरह गायब होने की वजह को जांचते रहे हैं. पहले कहा गया कि 1104 में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद निकले आग और अन्य पदार्थों की वजह से ऐसा हुआ था, लेकिन हाल ही में साइंटिस्ट इसको लेकर एक नया खुलासा किया है.

माना जाता है कि चंद्रमा शुरु में कुछ-कुछ नजर आ रहा था मगर फिर धीरे-धीरे उसकी रोशनी कम होती गई और फिर वो आसमान से गायब हो गया. चंद्रमा से जुड़े इस अजीबोगरीब वाकये के बारे में लोगों ने उस समय लिखा भी है जो आज तक सुरक्षित है. एक अंग्रेज ने इस बारे में लिखा है- "मई के महीने की पांचवीं रात को चांद शाम के वक्त नजर आ रहा था फिर धीरे-धीरे उसकी रोशनी गायब होने लगी और जैसे ही रात आई, ना चांद, ना उसकी रोशनी नजर आई."

प्राचीन इतिहासकारों ने लिखा है कि उस रात जब चांद गायब हुआ तो आकाश में सब कुछ पहले जैसा था, तारे चमक रहे थे मगर सिर्फ चांद गायब हो गया था. लोगों ने अंदाजा लगया कि ये चंद्र ग्रहण हो सकता है मगर विज्ञान के मुताबिक चंद्र ग्रहण में भी जो रोशनी चांद के द्वारा रिफलेक्ट होती है वो नजर में आती है. हैरानी की बात ये है कि उस दिन चांद अपने आप गायब हो गया था और फिर कुछ देर बाद नजर आने लगा.



पहले इसे माना जाता था चांद के गायब होने का कारण
वैज्ञानिकों ने इस बारे में शोध किया और उन्होंने पाया कि दक्षिणी आइसलैंड में हेक्ला नाम का एक ज्वालामुखी था जिसे गेटवे टू हेल भी कहा जाता था. उसी दौरान वो ज्वालामुखी फटा और सल्फ्यूरिक गैस निकलीं. ये गैस आकाश में कई दिनों तक छाई रही और उसी वक्त ऐसा लगा होगा कि चांद गायब हो गया. ग्रीनलैंड की बर्फ से वैज्ञानिकों ने ये पाया कि उनमें सल्फर के कण मौजूद हैं. जिससे वो समझ गए कि ये ज्वालामुखी से ही निकले हैं. इसी से वैज्ञानिकों ने अंदाजा लगाया कि ऐसे ही चांद गायब हुआ होगा. मगर हाल ही में इस थ्योरी को नकार दिया गया है.

वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली वजह
वैज्ञानिकों के अनुसार जिस साल चंद्रमा के गायब होने की ये घटना है उस साल ज्वालामुखी नहीं फटा था. ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ और कारण था चांद के गायब होने का. एलियन तक की बात की गई मगर एलियन थ्योरी को भी नकार दिया गया. अब कहा जा रहा है कि जापान के माउंट असामा में चांद के गायब होने वाली घटना के दो साल पहले ही ज्वालामुखी फटा था जिसकी गैस से चांद गायब हो गया था. एक जापानी व्यक्ति का उस वक्त का रिकॉर्ड दर्ज है. अभी भी इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है मगर वैज्ञानिक जापान के ज्वालामुखी को ही चांद के गायब होने का कारण मान रहे हैं.
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