Life On Mars: मंगल ग्रह की धरती पर बस सकेंगे इंसान ! NASA ने कर ली है पूरी तैयार

NASA ने दूसरे ग्रहों पर बसने के लिए इंसानों के DNA मं बदलाव की तैयारी कर ली है.

NASA के वैज्ञानिकों (NASA Scientists) ने मंगल पर इंसान को बसने (Life On Mars) के लिए जो ज़रूरी परिस्थितियां हैं, उनकी भी तैयारी कर ली है. खास तौर पर इंसान के अंदर के बदलाव (Modification in human DNA) पर NASA काम कर रहा है.

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    मंगल ग्रह पर इंसानों की बस्तियां बसाने (Life On Mars) के सपने वैज्ञानिक (NASA Scientists) पिछले कई सालों से देख रहे हैं. अब NASA इस दिशा में अपने कदम बढ़ाते हुए इंसान के DNA में भी वो बदलाव (Modification in human DNA) कर रहा है, जो मंगल ग्रह पर सर्वाइव करने के लिए ज़रूरी हैं. ये बात सच है कि मंगल पर रहना, धरती पर रहने की तुलना में कठिन है.

    Professor Chris Mason न्यूयॉर्क की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ( Cornell University, New York) में जेनेटिक्स पढ़ाते हैं और वे नासा के इस खास प्रोजेक्ट में मुख्य तौर पर काम कर रहे हैं. नासा के ट्विन प्रोजेक्ट (Twin Project) के तहत ये जानने की कोशिश की जा रही है कि अगर इंसान अंतरिक्ष (Astronaut's Gene Modification) में यात्राएं करता है, तो उसके शरीर पर इसका क्या प्रभाव होगा? प्रोजेक्ट के तहत इंसान के जींस में बदलाव भी किया गया है, जिससे उसे अंतरिक्ष (Space travel) में जाने में परेशानी न हो.

    इंसान के डीएनए में बदलाव है ज़रूरी
    रिसर्च के तहत नासा के एस्ट्रोनॉट्स के मेटाजीनोम्स को लेकर ऐसे जेनेटिक डिफेंस तैयार किए गए हैं, जो आने वाले वक्त में स्पेस ट्रैवेल में दद करेंगे. प्रोफेसर क्रिस बताते हैं कि डीएनए (DNA) के ये नए तत्व कभी खत्म नहीं होंगे और इनसे हाईब्रिड सुपरह्यूमन सेल बनाई जा सकेगी. उदाहरण के तौर पर वे बताते हैं कि एक खास जीन, जिसे Dsup कहते हैं, वो अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान होने वाले नुकसान से बचाता है. न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक लैब में तैयार किया गया ये नया ह्यूमन जीनोम और नई सेल अंतरिक्ष के रेडिएशन भरे माहौल में सर्वाइवल रेल बढ़ा देता है.

    मंगल पर बसने की तैयारी
    प्रोफेसर क्रिस का मानना है कि मानव जाति को मंगल ग्रह पर बसने के लिए वहां के माहौल में ढलने की क्षमता ज़रूरी है. ये जेनेटिक मॉडिफिकेशन के ज़रिये संभव है. जब जीन में बदलाव होगा तो हमारी जाति वहां सर्वाइव कर सकेगी. प्रोफेसर क्रिस ने अपनी किताबी The Next 500 Years में उन्होंने लिखा है कि जेनेटिक एडिटिंग के ज़रिये भविष्य में अंतरिक्ष यात्री कॉस्मिक रेडिएशन के दूरगामी प्रभाव से बच पाएंगे. लोगों को चांद और मंगल के साथ-साथ शनि जैसे ग्रहों पर भी अपनी बस्तियां बसाने में मदद मिलेगी. हालांकि वे ये भी मानते हैं कि जब इंसान के जीन में बदलाव होता है कि उसका बायोलॉजिकल सिस्टम भी चेंज होता है, इससे उसे कुछ मेडिकल परेशानियां भी हो सकती हैं.

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