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प्लास्टिक का विकल्प है ये 'बर्तन बैंक', पर्यावरण के लिए सुरेंद्र की अनूठी पहल

सुरेंद्र बैरागी 'बर्तन बैंक' बैरागी चलाते हैं.

सुरेंद्र बैरागी 'बर्तन बैंक' बैरागी चलाते हैं.

पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए 'बर्तन बैंक' बनाया गया है. इसके जरिए बीते साल 45-50 परिवारों को कार्यक्रमों के लिए म ...अधिक पढ़ें

हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण की है. दुनियाभर में इस पर बात हो रही है तो कई जगह छोटे-छोटे स्तर पर भी व्यापक प्रयास हो रहे हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं सुरेंद्र बैरागी. छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और नो पॉलीथिन यूज को लेकर एक मुहिम चला रखी है. पहला प्रयास उन्होंने अपने परिवार से ही किया है. वहां उन्होंने ‘नो पॉलीथिन’ रूल लगाया हुआ है. वह एक बर्तन बैंक भी चलाते हैं. उनका प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोग प्लास्टिक के उपयोग से बच सकें.

न्यूज 18 से बात करते हुए 52 साल के सुरेंद्र कहते हैं, “मैं लोहे की फैक्ट्री में क्लर्क का काम करता हूं. 2014 से पर्यावरण के लिए काम कर रहा हूं. पीएम मोदी की बातों से प्रभावित होकर पर्यावरण के लिए काम शुरू किया. 2019 में बैग की जगह कपड़े की थैली का उपयोग करने के बारे में सोचा. इसके लिए पत्नी से सहायता मांगी. इसके बाद घर में पड़े हुए पुराने कपड़ों के उपयोग से उन्होंने थैले बनाने का काम शुरू किया. इस तरह उन्होंने 50 थैले बनाए. इसके बाद जन-जन में प्लास्टिक के वैकल्पिक माध्यम के तौर पर थैले के इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरूक करने के प्रयास में लग गए.”

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पर्यावरण को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए कर रहे हैं प्रयास.

सुरेंद्र बैरागी कहते हैं, “सबसे पहले क्षेत्रीय स्कूल में पहुंचे और बच्चों को प्लास्टिक के कम उपयोग के विषय में जागरूक किया. पर्यावरण को प्लास्टिक से बचाने के लिए स्कूल में बच्चों की निबंध प्रतियोगिता का आयोजन करवाया. इसमें जीतने वाले प्रतिभागियों को बढ़िया क्वालिटी के कपड़े के थैले इनाम के रूप में दिए. बच्चों को जागरूक किया और उन्हें घरों में ‘नो पॉलीथिन’ के लिए जागरूक किया.”

वह कहते हैं, “अपने साथियों के साथ मिलकर बाजार में जा-जाकर लोगों को मुफ्त के थैले बांटे और बाजार लाने का आग्रह किया. इससे उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग को काफी हद तक कम करने की कोशिश की. कोरोना काल के दौरान लोगों को मास्क भी बांटे. घर में रात-रात भर जागकर बिना प्लास्टिक वाले सिंगल यूज़ मास्क बनाए. साथ ही लोगों को मुफ्त में बांटे.” वह रोज घर से जहां भी जाते हैं चाहे मार्केट हो कोई कार्यक्रम हो या कुछ भी हो. लोगों को प्लास्टिक के उपयोग को रोकने की बात कहना नहीं भूलते. अपने इस जुनून से उन्होंने परिवार के साथ-साथ आस-पड़ोसियों के भी प्लास्टिक के उपयोग पर नियंत्रण लगाने में सफलता हासिल की है.

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पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल में निबंध प्रतियोगिता करवाई.

सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग इस तरह किया कम
शादी, समारोहों में उपयोग किए जाने वाले सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग का चलन बीते सालों में काफी हद तक बढ़ा है. इसको रोकने का वैकल्पिक समाधान निकालने के लिए उन्होंने ‘बर्तन बैंक’ बनाया. जिसके तहत आस-पास होने वाले शादी समारोह या दूसरे कार्यक्रमों में मुफ्त में बर्तन मुहैया करवाते हैं. इसकी शुरुआत 50 बर्तनों से की थी. इसमें अपने आस-पास के लोगों को कार्यक्रमों के लिए मुफ्त में बर्तन मुहैया करवाए. इससे प्लास्टिक के बर्तनों में खाने से बचा जा सके.

वह आगे बताते हैं, लोगों को फ्री में बर्तन देने के लिए कई लोग आर्थिक मदद करने आए, लेकिन वे सिर्फ बर्तन ही लेते हैं. इससे बर्तनों का भंडारण बढ़ने लगा. उनके पास लगभग 1000 लोगों के लिए बनाने से लेकर खिलाने तक के बर्तन उपलब्ध हैं. बीते एक साल के भीतर उन्होंने 45 से 50 परिवारों को कार्यक्रमों के दौरान बर्तन मुहैया करवाए हैं. वह दावा करते हैं कि उन्होंने 80 हजार डिस्पोजल के उपयोग को रोका है.

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कोरोनाकाल में लोगों को बांटे प्लास्टिक रहित मास्क.

नारियल के खोल से बर्तन बनाने की शुरुआत
सुरेंद्र कहते हैं, “उनका परिवार जब किसी कार्यक्रम में जाता है तो खाने के बर्तन साथ लेकर चलते हैं. जैसे थाली, गिलास, कटोरी और चम्मच.” उन्होंने विकल्प के तौर पर नारियल के बर्तन बनाने की भी शुरुआत की है. पानी पूरी बेचने वाले अक्सर प्लास्टिक की कटोरी का उपयोग करते हैं. उसके वैकल्पिक समाधान के तौर पर नारियल के खोल से कटोरी बनाई है. नारियल के खोल से बनाई हुई कटोरी धोकर बार-बार उपयोग में लाई जा सकती है. इसके साथ ही उन्होंने कप, चम्मच भी नारियल के खोल से बनाये हैं.

उनका कहना है कि किचन में उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक के डिब्बों के वैकल्पिक तौर पर हम नारियल के खोल से बनी हुई कटोरियों और नारियल के खोल के ढक्कन वाले डिब्बों का उपयोग कर सकते हैं. लंबे समय से सुरेंद्र बैरागी पर्यावरण की दिशा में काम कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिए पर्यावरण का प्रदूषण रहित रहना बहुत जरूरी है. जिससे हम आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की कामना कर पाएं.

Tags: Environment news, News18 Hindi Originals, Plastic waste

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