VIDEO: महादेव के इस अद्भुत कुंड में डूब जाता है बेलपत्र

अगर बेलपत्र कुंड में डूब रहा था तो इसे बाल्टी के पानी में भी डूबना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, तो क्या चमत्कार उस कुंड में है ?

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2019, 4:16 PM IST
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आधी हकीकत आधा फसाना. पौराणिक कथाओं के मुताबिक महादेव और बेलपत्र का नाता युगों पुराना है. महादेव का बेलपत्र से कितना लगाव है, इसको लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं लेकिन हमारे सामने जो दावा किया गया था उसे कहानी के सबूत के तौर पर पेश किया जाता है. दावे के मुताबिक मध्य प्रदेश में एक छोटे से इलाके में महादेव के धाम के पास एक कुंड है. कहते हैं उस कुंड में बेलपत्र डालते ही वो कुंड की तलहटी में चला जाता है. एक पत्ती जैसी हल्की चीज का पानी में डूबना किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है. दावे के मुताबिक ये चमत्कार उस कुंड के हर हिस्से में होता है. लोगों के मुताबिक उस धाम में महादेव का वास है और ये चमत्कार उस शिवलिंग का है जो कुंड की तलहटी में है. उस शिवलिंग के चमत्कार की वजह से ही बेलपत्र अपने आप पानी में डूबकर वहां पहुंच जाता है. उस अद्भुत कुंड के पास जाने पर दावे की एक-एक बात सच होती दिखाई दी.

जब इस कुंड में बेलपत्र डूब जाता है तो दूसरी पत्ती क्यों नहीं डूबती, जब दूसरी पत्ती नहीं डूबती तो बेलपत्र कैसे डूब जाता है. अब चमत्कार के इस दावे को खुद परखने का वक्त आ गया था. जैसे ही हमने बेलपत्र पानी में डाला तो वो डूबने के साथ ही गायब हो गया. यानी कि लोग जो इसे देखते हुए कहते हैं वो फिलहाल सच होता हुआ दिख रहा है.

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बेलपत्र को पानी में डूबते देख हमें काफी हैरत हो रही थी. दावे के मुताबिक ये चमत्कार केवल बेलपत्र के साथ होता है. किसी दूसरी पत्ते के साथ नहीं. अब इस बात की तस्दीक करनी थी. हमने सागवान का पत्ता पानी में डुबोया तो पत्ता पानी में सतह पर ही तैरने लगा. शिवालय के इस कुंड में जिस जगह पर बेलपत्र डूब रहा था. ठीक उसी जगह पर दूसरे पत्ते नहीं डूब रहे थे यानी तस्वीर वहीं दिखी जैसा दावा किया जाता है.
तो क्या ये कुंड चमत्कारी है, क्या इस कुंड के नीचे मंदिर और शिवलिंग के होने का दावा हकीकत है, लेकिन किसी ने कुंड के अंदर शिवलिंग के मौजूद होने की तस्दीक नहीं की. सबने कहा कि ये बात सबसे पहले एक सिद्धबाबा ने बताई थी जो कुंड में कई घंटे की जलसमाधि लेकर शिवलिंग की पूजा किया करते थे. उन्होंने अपना पूरा शरीर सुखा लिया था न खाना न पीना वो वहां दहार में जाते थे और 3-4 घंटे में बाहर निकलते थे. जल के अंदर 5 घंटे तक रहते थे.

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अब इस तालाब के तल में कोई मंदिर है भी या नहीं इसका पता लगाना तो हमारे लिए मुश्किल था लेकिन कुंड तो हमारे सामने ही था जिसमें बेलपत्र डूब रहे थे और दूसरे पत्ते तैर रहे थे. अब ये कैसे हो रहा था इसी रहस्य को हमें सुलझाना था. हमें ये पता करना था कि बेलपत्र के डूबने की वजह, कुंड का चमत्कार है, या ये कुंड के पानी की किसी खासियत का नतीजा है. ये देखने के लिए हमारे पास एक बाल्टी है. इसमें हम जलकुंड का पानी भरेंगे और इसमें सभी पत्तियों को डूबा कर देखेंगे.

हमने बैलपत्र जलकुंड के पानी में डाला तो पत्ता नहीं डूबा. नतीजा हैरान कर देने वाला था. पानी भी वही था और बेलपत्र भी वही, फर्क था तो केवल कुंड और बाल्टी का. कुंड के जल से भरे बाल्टी में बेलपत्र नहीं डूबा. अगर बेलपत्र कुंड में डूब रहा था तो इसे बाल्टी के पानी में भी डूबना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, तो क्या चमत्कार उस कुंड में है ?

लोगों के मुताबिक तो ये कुंड का ही चमत्कार था लेकिन हम इससे इत्तेफाक नहीं रखते. वैसे सच पूछिए तो हमारे पास भी लोगों के सवालों का जवाब नहीं था क्योंकि पड़ताल के इस नतीजे ने हमें भी लाजवाब कर दिया था.

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