VIDEO: भोपाल के चमत्कारी शिव कुंड की रहस्यमय कहानी

उस चमत्कारी कुंड की तलाश में हमारा सफर भोपाल से शुरु हुआ. हमारी मंजिल थी वहां से 170 किलोमीटर दूर सागर का एक शिव धाम.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2019, 7:35 PM IST
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आधी हकीकत आधा फसाना. पौराणिक कथाओं के मुताबिक महादेव और बेलपत्र का नाता युगों पुराना है. महादेव का बेलपत्र से कितना लगाव है, इसको लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं लेकिन हमारे सामने जो दावा किया गया था उसे कहानी के सबूत के तौर पर पेश किया जाता है. दावे के मुताबिक मध्य प्रदेश में एक छोटे से इलाके में महादेव के धाम के पास एक कुंड है. कहते हैं उस कुंड में बेलपत्र डालते ही वो कुंड की तलहटी में चला जाता है. एक पत्ती जैसी हल्की चीज का पानी में डूबना किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है. लोगों के मुताबिक उस धाम में महादेव का वास है और ये चमत्कार उस शिवलिंग का है जो कुंड की तलहटी में है. इस दावे की हकीकीत के बारे में जानने के लिए न्यूज़ 18 की टीम पहुंची भोपाल में उस कुंड में.

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उस चमत्कारी कुंड की तलाश में हमारा सफर भोपाल से शुरु हुआ. हमारी मंजिल थी वहां से 170 किलोमीटर दूर सागर का एक शिव धाम. दावे के मुताबिक महादेव की श्रद्धा के साथ उस उस कुंड में बेलपत्र डालने से वो हल्का पत्ता, पानी में डूबकर तालाब की तलहटी में पहुंच जाता है.



कहते हैं जिस जगह पर आज वो कुंड है, वहां कभी महादेव का एक मंदिर हुआ करता था. उस मंदिर का शिवलिंग बहुत चमत्कारी था. वक्त के साथ वो मंदिर जमीन के अंदर धंस गया. बाद में उस जगह पर एक कुंड बन गया. दावे के मुताबिक धाम के उस शिवलिंग में वो अद्भुत शक्ति आज भी बरकरार है जिसकी वजह से बेलपत्र डूबकर शिवलिंग पर अपने आप अर्पित हो जाते हैं.
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कुछ ऐसी कहानियां सुनते-समझते हम शिवालय पहुंच गए जो काफी बड़े इलाके में फैला था. ये धाम यहां कब से है, किसने बनाया, ये कोई नहीं जानता. यहां आने वाला हर शख्स केवल उस चमत्कारी कुंड को जानता है. मान्यता है शिव की पसंदीदा बेलपत्र जब उन्हें चढ़ाई जाती है तो वो उन्हें स्वीकार करते हैं. उसके अलावा कोई और पत्ता डाला जाता है तो वो तैरती रहती है जबकि बेलपत्र नीचे चली जाती है. लोगों की मान्यता ये भी है कि यहां पर नीचे कोई शिवलिंग है जिसके चलते भगवान स्वंय उसे स्वीकारते हैं.

कुंड पर कई लोग पूजा करते दिखे, सभी के हाथों में बेलपत्र था लेकिन दूर से कुछ साफ समझ में नहीं आ रहा था. चमत्कार के दावे को परखने के लिए हम लोगों के करीब पहुंच गए. उन लोगों ने हमारे सामने ही बेलपत्र कुंड में डाले और दोनों हमारे सामने ही डूब गए.

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