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फैशन नहीं पैशन : 'मैं अंधा तक होने के लिए तैयार था'

दिल्ली के करण के लिए टैटू कोई फैशन या ट्रेंड नहीं बल्कि पैशन है, ऐसा पैशन जिसके लिए वो हर दर्द सहने को तैयार थे. दर्द ऐसा मानो गर्म लाल सुई आंखों में चुभो दी हो. आंखों से पानी बहता रहा. दिन की रोशनी मानो कांटे सी चुभती हो. पर वो रुका नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 29, 2019, 7:13 PM IST
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एक चैलेंज. एक्सेप्ट करने में खतरा यह था कि वो अंधा हो सकता था, सब कुछ खो सकता था. दूसरा रास्ता था, इस चैलेंज को एक्सेप्ट न करना. लेकिन, उसने हर जोखिम उठाने और हर दर्द बर्दाश्त करने की ठानी. एक नए अंदाज और नए खिताब के साथ सामने आया. भले ही, दुनिया इसे सनक या अजीब फितूर कहे, 13 साल की उम्र से पनपता उसका पैशन 15 सालों से बरकरार है.

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बॉडी आर्ट का कल्चर बदलते वक्त के साथ फैशन बनता जा रहा है, फिर चाहे वो शरीर पर टैटू हो या कान-नाक में पीयरसिंग. बॉडी आर्ट के इस फैशन में कई नई और खतरनाक चीजें शामिल होने लगी हैं. लेकिन दिल्ली के करण के लिए टैटू कोई फैशन या ट्रेंड नहीं बल्कि पैशन है, ऐसा पैशन जिसके लिए वो हर दर्द सहने को तैयार था. दर्द ऐसा मानो गर्म लाल सुई आंखों में चुभो दी हो. आंखों से पानी बहता रहा. दिन की रोशनी मानो कांटे सी चुभती हो. पर वो रुका नहीं.



'आई बॉल टैटू के लिए सब दांव पर लगाने को तैयार था. मैं अंधा हो सकता था. मैं बेंकरप्ट हो सकता था. यहां तक कि मेरा करियर भी खत्म हो सकता था. पर मैं इन सब के लिए तैयार था. आंखें काली कराने से पहले मैं अपनी आंखें बंद कर घर पर काम करता था.'
दिल्ली में रहने वाले करण ने दो साल पहले ही आई बॉल टैटू करवाया और ऐसा करने वाले वो पहले भारतीय बने. टैटूग्राफर करण दिल्ली के पंजाबी बाग में अपना टैटू स्टूडियो चलाते हैं. करण का कहना है कि उन्हें लोगों के ओपिनियन से फर्क नहीं पड़ता. आई बॉल टैटू का एक्सपीरियंस शेयर करते हुए करण कहते हैं कि आंखों में इंक इंजेक्ट करने के बाद उनकी आंखों से 24 घंटे पानी बहता था. 'मेरी आंखें पूरी सूज गई थीं और हीलिंग के दौरान मैं 3 महीने तक अंधेरे कमरे में रहा, फोन की रोशनी भी आंखों को
चुभती थी.'

आईबॉल टैटू का जोखिम और ट्रेंड
आई बॉल टैटू को स्क्लेरल या कॉर्नियल टैटू भी कहा जाता है. आई बॉल टैटू का जोखिम यह है कि एक छोटी सी चूक से आंखों की रोशनी जा सकती है. आंखों में इंजेक्शन से इंक डाली जाती है. आंखों के अंदर कुछ छोटे-छोटे छेद इंक को सोखते हैं. कुछ समय बाद पूरी आंख में कलर फैल जाता है. विकिपीडिया ने एक लेख के हवाले से लिखा है कि इंडिया इंक के इंजेक्शन के ज़रिये इस तरह का टैटू करवाया जाए तो अच्छे कॉस्मेटिक नतीजे मिल सकते हैं.

हालांकि सुनने में जितना आसान लगता है, यह उतना ही मुश्किल है. साल 2017 में कनाडा की एक महिला आई बॉल टैटू कराने के दौरान आंशिक रूप से अंधी हो गई थी. भारत में सबसे पहले और अब तक इकलौते आई बॉल टैटू होल्डर करण के मुताबिक कई लोग उनसे ये टैटू बनवाने के बारे में बात करते हैं लेकिन इसके जोखिम जानने के बाद पीछे हट जाते हैं. करण ने खुद ये आई बॉल टैटू लाखों रुपये के खर्च से न्यूयॉर्क में करवाया था क्योंकि फिलहाल इसकी एडवांस तकनीक भारत में नहीं है.

यह पैशन जोखिम भरा होने के साथ ही खर्चीला भी है और यह विदेशों में बेहतर ढंग से होता है, इसलिए अब तक भारत में आई बॉल टैटू ट्रेंड में नहीं आ पाया है. इसके बावजूद लोगों की दिलचस्पी इस तरफ धीरे धीरे ज़ाहिर हो रही है. खुद करण भी कहते हैं कि उनसे कई लोग इस बारे में कॉंटैक्ट करते हैं.

करण के पैशन के बाकी पहलू
आई बॉल टैटू के अलावा करण ने अपने सारे दांत हटवाकर मेटल के दांत लगवाए हैं और ऐसा करने वाले भी वो पहले भारतीय हैं. करण ने अपने कान भी मोडिफाई करवाए हैं. बॉडी मोडिफिकेशन का ट्रेंड दुनिया में पिछले कई सालों से चल रहा है और धीरे धीरे भारत में भी इसकी शुरूआत होने लगी है.



टैटू के अलावा बॉडी मोडिफिकेशन में कान-जीभ कटवाना, त्वचा के अंदर आकृतियां लगवाना, शरीर के अंगों में छेद करवाना भी शामिल है. बॉडी मोडिफिकेशन के इस पैशन को आगे ले जाते हुए अब करण फुल बॉडी टैटू सूट की तैयारी में हैं. सिर से लेकर पैर के पंजे तक एक टैटू का काम जारी है जिसके बारे में करण अपने फैंस को सोशल मीडिया के जरिए अपडेट करते रहते हैं.

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