VIDEO: शिव के जलकुंड में छिपा चमत्कार! हकीकत या फसाना

वैज्ञानिकों ने हमें बेलपत्र और उसकी संरचना से जुड़े कुछ तथ्य बताए. ऐसे तथ्य, जिनका सीधा रिश्ता उस कुंड में होने वाले चमत्कार से है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2019, 11:05 AM IST
  • Share this:
आधी हकीकत आधा फसाना. पौराणिक कथाओं के मुताबिक महादेव और बेलपत्र का नाता युगों पुराना है. महादेव का बेलपत्र से कितना लगाव है, इसको लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं लेकिन हमारे सामने जो दावा किया गया था उसे कहानी के सबूत के तौर पर पेश किया जाता है. दावे के मुताबिक मध्य प्रदेश में एक छोटे से इलाके में महादेव के धाम के पास एक कुंड है. कहते हैं उस कुंड में बेलपत्र डालते ही वो कुंड की तलहटी में चला जाता है. एक पत्ती जैसी हल्की चीज का पानी में डूबना किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है. दावे के मुताबिक ये चमत्कार उस कुंड के हर हिस्से में होता है. लोगों के मुताबिक उस धाम में महादेव का वास है और ये चमत्कार उस शिवलिंग का है जो कुंड की तलहटी में है. उस शिवलिंग के चमत्कार की वजह से ही बेलपत्र अपने आप पानी में डूबकर वहां पहुंच जाता है. उस अद्भुत कुंड के पास जाने पर दावे की एक-एक बात सच होती दिखाई दी.

कुंड में डूबने वाले बेलपत्र, पानी से भरी बाल्टी में क्यों नहीं डूब रहे थे. जब वो बाल्टी में तैर रहे थे तो वही बेलपत्र कुंड में कैसे डूब रहे थे. इस पहेली ने हमें भी उलझा कर रख दिया था. लोगों के मुताबिक यही महादेव के इस कुंड का चमत्कार है. फिलहाल हम भी इसे खारिज करनी की हालत में नहीं थे. अपनी पड़ताल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए हमने कुछ ठोस कदम उठाने की सोची. पहले बेलपत्रों को कुंड के दूसरे हिस्सों में डूबा कर देखा. कई और भी उपायों को आजमाया. कई जानकारों से मिले और नतीजों तक पहुंचने से पहले ही चमत्कार की असल तस्वीर करीब साफ हो चुकी थी.

ये भी पढ़े- व्हीलचेयर पर नामांकन भरने गई थीं साध्वी प्रज्ञा, वायरल वीडियो में डांस करती दिखीं



महादेव के इस धाम के कुंड में अभी तक वैसा ही हुआ जैसा दावा किया जाता रहा है. कुंड में बेलपत्र वाकई डूब रहे थे. जब हमने उसी कुंड के पानी को एक बाल्टी में भर उसमें बेलपत्र डाला तो वो तैरता रहा. लोगों ने कहा कि बेलपत्र केवल कुंड में ही डूबेगा क्योंकि महादेव का प्राचीन शिवलिंग कुंड के अंदर है और उसी शिवलिंग से कुंड का चमत्कार है. फिर हमने सोचा की अगर ये बात सही है तो चमत्कार पूरे जल कुंड में होना चाहिए.
अगर कुंड में कोई दैवीय शक्ति है तो बेलपत्र हर जगह डूबना चाहिए. ये परखने के लिए हम कुंड की दूसरी तरफ पहुंचे जहां आमतौर पर बेलपत्र के साथ पूजा करने के लिए कोई नहीं जाता. यहां भी बेलपत्र को कुंड के पानी में डालने पर वो अपने आप नीचे चला गया, मानो उसे कोई अंदर खींच रहा हो.

हम एक बार फिर लाजवाब थे. अभी तक की पड़ताल यही कह रही थी कि कुंड में कोई चमत्कारी शक्ति है जो बेलपत्र को को अपनी तरफ खींच लेती है. कुंड के दोनों हिस्सों में यही बात साबित हुई. हालांकि हमारा दिमाग इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था लेकिन लोगों ने कहा कि ये चमत्कार सदियों से होता चला आ रहा है. महादेव और बेलपत्र का जुड़ाव युगों पुराना है. इसके लिए हमें एक पौराणिक कहानी का हवाला दिया गया जिसकी शुरुआत होती है समुद्र मंथन से.

राम-सीता की तस्वीर वाले कार्ड के साथ भेजा निकाह का दावतनामा, देखें VIDEO

समुद्र मंथन से निकले विष से दुनिया जलने लगी थी. तब देवताओं के कहने पर महादेव ने विष को अपने कंठ में रख लिया लेकिन विष की तपिश से महादेव परेशान हो गए. फिर देवताओं ने शिव को शांत करने के लिए उन पर जल के साथ बेलपत्र चढ़ाए थे. तब जाकर महादेव को तपिश से मुक्ति मिली थी. कहते हैं तबसे महादेव और बेलपत्र का जुड़ाव चला चला आ रहा है.

ये पौराणिक कथा तो हम पहले भी कई बार सुन चुके थे लेकिन पड़ताल, कहानी सुनकर नहीं प्रयोग करके होती है और हमने भी अपने काम को आगे बढ़ाया. हमने मंदिर के हैंडपाइप के पानी पर भी ये प्रयोग करने की सोची. ऐसा करना का मकसद अपनी पड़ताल को विस्तार देना था. हम हर तरह से संतु्ष्ट होना चाहते थे. हमने बाल्टी में बेलपत्र को हर तरीके से डाला. कई बार कोशिश की लेकिन नतीजा एक ही था. एक भी बेलपत्र बाल्टी की पानी में नहीं डूबा.

अभी तक हमने हर तरह से परख लिया था. नतीजा यही था कि कुंड के अंदर बेलपत्र डूब रहे थे और कुंड के बाहर वो तैर रहे थे. यहां तक की कुंड के पानी से भरी बाल्टी में भी बेलपत्र नहीं डूबे. एक बार फिर धाम से जुड़े लोगों के चेहरे पर मुस्कान फैल गई क्योंकि हमारी पड़ताल का नतीजा उनके दावे के मुताबिक ही निकला. फिलहाल तो कुंड के चमत्कार पर विश्वास नहीं करने की कोई वजह ही नहीं है. नजरों के सामने ही बेलपत्र कुंड में डूब रहे हैं और दूसरी जगहों पर तैर रहे हैं. यानी हो न हो, कोई न कोई चमत्कार जरुर है. ये बात दूसरे कह सकते हैं, लेकिन हम नहीं. हमें तो इस पूरी घटना को विज्ञान की नजरों से भी समझना था.

वैज्ञानिक नज़रिए को समझने के लिए हम भोपाल के एक कॉलेज में पहुंचे जहां मुलाकात हुई वनस्पति विज्ञान और भौतिक विज्ञान के कुछ जानकारों से. चमत्कार का दावा बेलपत्र से जुड़ा था इसलिए वैज्ञानिकों ने हमें बेलपत्र और उसकी संरचना से जुड़े कुछ तथ्य बताए. ऐसे तथ्य, जिनका सीधा रिश्ता उस कुंड में होने वाले चमत्कार से है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक सारा माज़रा बेलपत्र की संरचना से जुड़ा है. अगर इस बेलपत्र को गौर से देखें, तो विज्ञान की ये थ्योरी आप भी समझ जाएंगे. बेलपत्र ट्राईफोलिएट होते हैं, यानी ये पत्ती तीन हिस्सों में बंटी होती है. जबकि आप पीपल या जामुन जैसे पत्तों को देखेंगे, तो पूरा पत्ता एक ही हिस्से में सिमटा होता है. बेलपत्र के तीन हिस्सों में बंटे होने के कारण पत्ती का सारा वज़न नीचे मौजूद डंठल पर आ जाता है और जब इसे पानी में डुबोया जाता है, तो डंठल के भार की वज़ह से पत्ती पानी में डूब जाती है. हम जबतक विज्ञान के इस सिद्धांत को समझते, हमें भौतिक विज्ञान की एक और थ्योरी समझाई गई जो ये साफ कर रही थी कि सिर्फ बेलपत्र की पानी में क्यों डूबता है, दूसरी पत्तियां क्यों नहीं.

विज्ञान कहता है कि पानी में कौन सी चीज डूबेगी, कौन सी नहीं ये निर्भर करता है उसके घनत्व पर. पानी की सतह पर जो फोर्स काम करती है उसे सरफेस टेंशन या पुष्ट तनाव कहते हैं. जो भी चीज़ इस तनाव को नहीं भेद पाती वो पानी के ऊपर ही तैरती रहती है. बेलपत्र का घनत्व दूसरी पत्तियों के मुकाबले ज्यादा होता है इसलिए बेलपत्र डूब जाती है और दूसरी पत्तियां तैरती रहती है. कुंड में बेलपत्र क्यों डूब जाता है और दूसरी पत्तियां क्यों तैरती हैं इसकी वज़ह हमारे सामने थी लेकिन एक सवाल अब भी था कि जो बेलपत्र उस शिवधाम के कुंड में डूब रहा था, वो किसी सामान्य पानी में तैर कैसे रहा था. विज्ञान के पास हमारे इस सवाल का भी जवाब है.

कुछ देर पहले तक जो कहानी हमें भी चमत्कार लग रही थी, वो अब विज्ञान का एक सिद्धांत बनकर सामने खड़ी थी. दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका था. इसबार में कोई शक नहीं कि महादेव पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र वाकई अद्भुत होता है. पुराणों में इस बेलपत्र की खास जगह भी है लेकिन इस तफ्तीश में हमने पाया कि पानी में बेलपत्र का डूब जाना सिर्फ विज्ञान का एक नियम है, कोई चमत्कार नहीं.

ऐसी ही अजब-ग़ज़ब कहानियों और VIDEOS के लिए क्लिक करें
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज