सीतापुर: महादेव के कुंड का वो अजब सा चमत्कार, देखें VIDEO

विज्ञान कहता है, कि अगर पानी में कोई पत्ती डाली जाए तो वो पानी की सतह पर तैरती रहेगी लेकिन कुछ तो है इस कुंड में, कि यहां बेल पत्र तैरने नहीं, डूब जाते हैं.

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आधी हकीकत, आधा फ़साना. विज्ञान कहता है कि हल्की चीज पानी में तैरनी चाहिए और भारी वस्तु डूब जानी चाहिए, होता भी यही है. लेकिन कहते हैं कि महादेव के धाम में कुछ अजब सा चमत्कार है. वहां बेल के पत्ते जैसी हल्की चीज पानी में डूब जाती है और अनार और अमरूद जैसे भारी फल पानी पर तैरने लगते हैं. इतना ही नहीं जिस दूध को पानी की सतह पर तैरना चाहिए वो तीर की तरह पानी को चीरते हुए गहराई में चला जाता है. ये सुनकर हमें हैरानी हुई, हम भी ये जानना चाहते थे कि, आखिर वो कौन सी जगह ही जहां आज के आधुनिक विज्ञान के सारे सिद्धांत उल्टे हो जाते हैं. बताया गया है कि ये चमत्कार किसी धाम का नहीं बल्कि एक कुंड का है, जहां महादेव की एक अदृश्य शक्ति सबको हैरत में डाल देती है.

कहते हैं इस छोटे से कुंड में कुछ है, शायद महादेव की कोई शक्ति है. उस शक्ति से चमत्कार होता है और उस चमत्कार को युगों से नमस्कार किया जा रहा है. विज्ञान कहता है, कि अगर पानी में कोई पत्ती डाली जाए, तो वो पानी की सतह पर तैरती रहेगी लेकिन कुछ तो है इस कुंड में, कि यहां बेल पत्र तैरने नहीं, डूब जाते हैं. जैसे महादेव की कोई शक्ति उन्हें अपनी तरफ खींच रही हो. बेल पत्र भी छोड़िए, अगर आप पानी में दूध की धार डालें, तो विज्ञान के मुताबिक उसे भी पानी की तरह पर तैरना चाहिए लेकिन इस कुंड के सामने विज्ञान पर चकमा खा जाता है, दूध की धार सीधे कुंड की तलहटी में पहुंच जाती है.

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वैसे ये सबकुछ, सिर्फ इस कुंड में ही होता है. यही कोशिश कुंड के बाहर की जाए, वो वही होता है, जो विज्ञान के सिद्धांतों में लिखा है. लोग कहते हैं, कि ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि सदियों पहले इस नदी के बीच महादेव का एक अद्भुत धाम था. वो धाम आज भी पानी के नीचे मौजूद है और ये चमत्कार महादेव की के उसी धाम की शक्तियों का एक छोटा सा नमूना है. तो चलिए, आज आजमाते हैं उन शक्तियों को, मिलते हैं चमत्कार के उस दावे से और देखते हैं, कि क्या उस कुंड में वाकई कोई करिश्मा है. अगर नहीं, तो जो होता है, वो होता क्यों है.
वो धाम आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पास है. कहते हैं पुराणों में उस जगह को नैमिषारण्य के तौर पर लिखा गया है जिसका वाल्मिकी रामायण में भी जिक्र है और महाभारत में भी उस जगह के बारे में लिखा गया है. पौराणिक कहानियों के मुताबिक उस इलाके में कभी लाखों ऋषियों ने एक साथ तप किया था. कई देवताओं ने उस जगह पर अवतार लिया था. कहते हैं उसी तप की वजह से वहां एक नहीं चमत्कारा की कई कहानियां हैं. अब वो कहानियां, चमत्कार का दावा हकीकत है या फसाना. ये जानने के लिए हम उस धाम की तरफ निकल पड़े.

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दूध की जो धार है अन्य जगह पर डालते हैं तो वो धार बनाती चली जाती है लेकिन यहां दूध डालते हैं तो वो अंदर चली जाती है. जैसे लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति उसे खींच रही है. आस्था जब तर्क के पार चल जाती है तो चमत्कार कहलाती है. हिन्दुस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां पर हर कदम पर कोई न कोई चमत्कार दिख जाता है.

लखनऊ से करीब 90 किलोमीटर दूर है महादेव का वो अद्भुत धाम जहां आज का आधुनिक विज्ञान भी मौन हो जाता है. बेलपत्र जैसी हल्की चीज पानी में डूब जाती है और भारी फल ऊपर तैरने लगते हैं. इंटरनेट पर तस्वीरें तो बहुत थीं लेकिन हम अपनी आंखों से उस चमत्कार की तस्दीक करना चाहते थे. कुछ ही देर बाद हम महादेव के उस धाम में थे. मंदिर तो बेहद साधारण ही था. फिर लोगों ने बताया किया चमत्कार इस धाम या यहां के शिवलिंग में नहीं चमत्कार तो पास में बह रही गोमती नदी के कुंड में है जिसपर लोग आंख बंद करके विश्वास करते हैं.

उस चमत्कार को देखने के लिए हम कुंड पर पहुंचे जहां एक महिला बेलपत्र लेकर पूजा कर रही थी. उसने एक-एक करके सारे बेलपत्र कुंड में डालने शुरु कर दिए और वो बेलपत्र पानी में डूब गए. फिर हमारे सामने ही एक शख्स ने कुंड में 7 अमरुद डाले. थोड़ी देर बाद 4 अमरुद अपने आप तैर कर उपर आ गए. एक भक्त ने प्रसाद के तौर पर कुंड में दूध डाला. दूध की धार तीर की तरह कुंड में समा गई.

बाढ़ की वजह से पानी मटमैला हो चुका था. फिर भी सबकुछ साफ दिख रहा था. विज्ञान के मुताबिक बेल पत्र तैरना चाहिए था. सारे फल डूब जाने चाहिए थे और दूध को पानी की सतह पर रहना चाहिए था लेकिन यहां तो सब उल्टा हो रहा था. केला पानी में नहीं डूबता लेकिन अनार और अमरुद जैसे भारी फल कैसे तैर रहे थे.

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