जन्म दर घटेगी और महिलाओं में बढ़ेगी कामुकता, COVID के बाद इस तरह बदल जायेगी दुनिया: स्टडी

कोरोना वायरस के बाद दुनिया में कई सारे बदलावों की आशंका विशेषज्ञों ने जताई है (सांकेतिक फोटो, AP)
कोरोना वायरस के बाद दुनिया में कई सारे बदलावों की आशंका विशेषज्ञों ने जताई है (सांकेतिक फोटो, AP)

अमेरिका (America) के विशेषज्ञों ने 90 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा कर ये निष्कर्ष निकाले हैं. इन विशेषज्ञों (experts) की टीम में कई विषयों के जानकार शामिल थे. इस अध्ययन से उन्हें यह अनुमान लगाने में मदद मिली कि COVID-19 सामाजिक व्यवहार और लिंग मानदंडों (Gender norms) में कैसे बदलाव लायेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 9:28 PM IST
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लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान वॉट्सऐप (WhatsApp)  पर ऐसे चुटकुले बहुत शेयर किये जा रहे थे, जिनमें कहा जा रहा था कि इस दौरान लोग देश की आबादी बढ़ा देंगे लेकिन दुनिया भर में हुए कई रिसर्च (Research) का अध्ययन करने के बाद अब कई विषयों के जानकार विशेषज्ञों की एक टीम ने पूर्वानुमान लगाया है कि कोविड-19 के प्रकोप (COVID-19 oubbreak) के बाद अब दुनिया भर में बच्चों की जन्म दर में और कमी आयेगी. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि महामारी (Pandemic) के जाने के बाद भी लोग अधिक समय तक अकेले रहेंगे और महिलाओं की कामुकता (sexuality) बढ़ेगी.

अमेरिका (America) के विशेषज्ञों ने 90 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा कर ये निष्कर्ष निकाले हैं. इन विशेषज्ञों (experts) की टीम में कई विषयों के जानकार शामिल थे. इस अध्ययन से उन्हें यह अनुमान लगाने में मदद मिली कि COVID-19 सामाजिक व्यवहार और लिंग मानदंडों (Gender norms) में कैसे बदलाव लायेगा. उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ उनपर प्रभाव नहीं पड़ेगा जो कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए बल्कि कोरोना वायरस का प्रकोप सभी को प्रभावित करेगा.

कुछ देशों की आबादी सिकुड़ जायेगी
इन जानकारों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है वैश्विक स्वास्थ्य संकट के चलते लोग गर्भधारण की योजना को टाल देंगे क्योंकि लोग शादी और बच्चों की प्लानिंग को टाल रहे हैं, जिससे कुछ देशों की आबादी सिकुड़ जायेगी.
जन्म-दर में गिरावट का समाज और अर्थशास्त्र पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, नौकरी के अवसर और बुजुर्ग आबादी की सहायता जैसी चीजें प्रभावित होंगीं.



लिंग असमानता को बढ़ावा मिल सकता है
इसके अलावा, लॉकडाउन के चलते आए अतिरिक्त घरेलू श्रम के असमान विभाजन से लिंग असमानता को बढ़ावा मिल सकता है और समाज अधिक रूढ़िवादी हो सकता है. इसके अलावा महिलाओं में अपनी पसंद के पुरुष की चाह में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा के चलते, कामुकता में इजाफा होगा.

शोधकर्ताओं ने कहा, कई मायनों में 'महामारी दुनिया भर में किया जा रहा एक सामाजिक प्रयोग बन गया है'- जिसके पूरे परिणाम अब भी आने बाकी हैं.

मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सामाजिक परिणाम लंबे समय तक बने रहेंगे
इस पेपर को लिखने वाले लॉस एंजिल्स विश्वविद्यालय के लेखक और मनोवैज्ञानिक मार्टी हैसल्टन ने कहा, 'COVID-19 के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सामाजिक परिणाम बहुत लंबे समय तक बने रहेंगे.'

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इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा, 'जितने लंबे समय तक COVID-19 का प्रकोप जारी रहेगा, इन परिवर्तनों में और अधिक मजबूत होते जाने की संभावना रहेगी.'
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