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siberia 282 foot deep crater dubbed mouth to hell set to devour everything near it pratp

साइबेरिया में खुला 'नर्क का दरवाज़ा', सदियों के इंतज़ार के बाद तबाही को तैयार !

Batagaika Crater के नाम से मशहूर ये गड्ढा धरती की सतह पर बना रहस्यमयी छेद है, जो सबसे पहले साल 1980 में नापा गया था. (Credit- Twitter/Alexander Gabyshev, Research Institute of Applied Ecology of the North)

Batagaika Crater के नाम से मशहूर ये गड्ढा धरती की सतह पर बना रहस्यमयी छेद है, जो सबसे पहले साल 1980 में नापा गया था. (Credit- Twitter/Alexander Gabyshev, Research Institute of Applied Ecology of the North)

Siberia Mouth of Hell Opens : रूस की सबसे ठंडी जगह पर भी क्लामेट चेंज (Climate Change Effect) का ऐसा असर दिखाई दे रहा है कि यहां 282 फीट गहरा नर्क का दरवाज़ा खुल गया है, जो अपने आसपास के इलाके को तबाह करने के लिए तैयार है.

कुदरत के भी खेल ऐसे हैं, जो हमारी-आपकी कल्पना से परे होते हैं. चाहे वो समंदर में उठने वाली सुनामी लहरें हों या फिर रेगिस्तान में तपाने वाली गर्मी. एक ऐसा ही अजीबोगरीब नज़ारा कुदरत ने रूस के साइबेरिया (Siberia Mouth of Hell Opens) प्रांत में दिखाया है. यहां एक 282 फीट गहरा गड्ढा मौजूद है, जो मानो अपने आसपास की सारी चीज़ें निगल लेने को तैयार है. लोग इसे मौत का मुहाना (Mouth Of Hell) और नर्क का रास्ता (Way to Underworld) तक कह रहे हैं.

Batagaika Crater के नाम से मशहूर ये गड्ढा धरती की सतह पर बना रहस्यमयी छेद है, जो सबसे पहले साल 1980 में नापा गया था. तब से अब तक इस गड्ढे की लंबाई में 1 किलोमीटर का इज़ाफा हो चुका है और गहराई 96 मीटर यानि 282.1 फीट हो चुकी है. बताया जा रहा है कि धरती की सतह ये जो मिट्टी निकल रही है, वो 1 लाख 20 हज़ार से 2 लाख साल पुरानी है. गड्ढे की सबसे नीचे की सतर साढ़े 6 लाख साल पुरानी है. ये यूरेशिया का सबसे पुराना खुला हुआ गड्ढा है.

लोग कहते हैं इसे ‘नर्क का दरवाज़ा’
1980 से साइबेरिया में लोगों ने इसे देखा है और लगातार इसकी बढ़ती हुई आकृति को देखकर ही उन्होंने इस नर्क का दरवाज़ा कहना शुरू कर दिया. जिस रफ्तार से ये बढ़ रहा है, वो आस-पास के इलाके को अपनी ज़द में लेता जा रहा है. इस वक्त इसके बढ़ने की रफ्तार हर साल 20 से 30 मीटर की है. इसे रोका नहीं जा सकता और अगर ये इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही इलाके का सब कुछ गड्ढे में समाता जाएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस गड्ढे के बढ़ने की वजह आस-पास की मिट्टी का 2 साल से बेहद कम तापमान पर होना है. चूंकि साइबेरिया में तापमान जीरो से भी बहुत नीचे रहता है, ऐसे में मिट्टी की नमी बड़ी बात नहीं है.

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Climate Change का है असर
वैज्ञानिक बताते हैं कि जो मिट्टी धंस रही है, वो आज से 25 लाख साल पहले Quaternary Ice Age में जम गई होगी. 1960 में जब यहां जंगल साफ किए गए तो इस सतह गर्मी और सूर्य की रोशनी पड़ी, जिससे पिघलकर ये धंसने लगी. पर्यावरण के लिए ये बिल्कुल अच्छा नहीं है क्योंकि इससे खतरनाक ग्रीनहाउस गैस निकलती है, जो तापमान बढ़ा सकती है. माना जा रहा है कि ग्लोबल वॉर्मिंग इसी तरह बढ़ती गई और ऐसे और भी नर्क के दरवाज़े दुनिया में अलग-अलग जगह पर देखने को मिल सकते हैं

Tags: Climate Change, Russia, Weird news

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