अब मंगल ग्रह पर बच्चे पैदा कर सकता है इंसान, 200 साल तक जीवित रहेगा स्पर्म

अंतरिक्ष में जन्मे धरती के चूहों से थोड़ा अलग हैं. (Photo Credit-Teruhiko Wakayama, University of Yamanashi)

ISS में चूहों के स्पर्म को फ्रीज़ करके करीब 6 साल तक रखा गया. हैरानी की बात ये कि जब उन्हें धरती पर लाया गया, तो उनमें बच्चों (Space Mouse) को जन्म देने की पूरी क्षमता थी. उन पर रेडिएशन (Radiation effect on Sperms) का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. वैज्ञानिक (Scientist experiment on space) ये देखकर हैरान हैं.

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    अब तक वैज्ञानिकों (Scientist experiment on space) का मानना था कि रेडिएशन (Radiation Problem on Earth) का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रजनन की क्षमता पर पड़ता है. मान जाता था कि स्पर्म की फर्टिलिटी रेडिएशन (Radiation effect on Sperms) की वजह से कम हो जाती है, लेकिन एक नए प्रयोग ने इसे लेकर धारणा बदल दी है. ये प्रयोग चूहों पर किया गया. चूहों के स्पर्म्स को फ्रीज (Frozen sperms) करके करीब 6 सालों तक हाई रेडिएशन वाले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रखा गया. जब इन्हें वापस रिवाइज़ किया गया, तो नतीजे हैरान कर देने वाले थे. इनसे स्पेस रैट्स (Space Mouse)का जन्म भी हुआ और वे बिल्कुल स्वस्थ थे. उनमें किसी तरह की कोई जेनेटिक कमी नहीं देखी गई.

    ISS पर चूहों के शुक्राणुओं को फ्रीज-ड्राएड (Frozen sperms) फार्म में 5 साल और 10 महीने के लिए रखा गया था. इन्हें माइनस 95 डिग्री के तापमान पर फ्रीज किया गया था. जापानी रिसर्चर्स ने इतने लंबे वक्त तक कॉस्मिक रेडिएशन (Cosmic Radiation) का सामना करने वाले स्पर्म्स के जरिये ही चूहों की नई नस्ल के कई बच्चे पैदा कर डाले. दिलचस्प बात ये है कि इनमें से किसी चूहे में कोई कमी नहीं थी, वे पूरी तरह सामान्य हैं. इस स्टडी को ‘साइंस अडवांस’ (Science Advance) में पब्लिश किया गया. हालांकि डेवलपमेंट बायोलॉजिस्ट और इस स्टडी के प्रमुख लेखक तेरुहिको वाकायामा (Teruhiko Wakayama) ने कहा कि अंतरिक्ष (Frozen Sperms In Space) में स्टोर किए गए स्पर्म के जरिये जो नस्ल पैदा हुई, उसमें धरती के चूहों के मुकाबले थोड़ा सा अंतर है, लेकिन इसे कमी नहीं कहेंगे.

    3 बैच में नीचे लाए गए स्पर्म
    जीन परीक्षण में चूहे पूरी तरह सामान्य मिले हैं. चूहे के स्पर्म्स को फ्रीज करके 3 बॉक्स में रखा गया था. जापान के यूनिवर्सिटी ऑफ यामानाशी में वाकायामा (Teruhiko Wakayama)और उनके साथियों ने साल 2013 में ये बॉक्स भेजे थे. हर बॉक्स में 48 शीशियां थीं, जिनमें चूहों के स्पर्म थे. ये प्रयोग ये जानने के लिए था कि रेडिएशन (Effect of Radiation) से इन पर क्या प्रभाव पड़ता है? ये बॉक्स 3 बैच में अंतरिक्ष से धरती पर आए. पहला और दूसरा बैच थोड़ा जल्दी लाया गया, जबकि तीसरे बैच को करीब 6 साल बाद मंगाया गया. ड्रायड फ्रीजिंग की वजह से इस प्रयोग की लागत भी कम आई. धरती पर लाकर इन्हें रिवाइज़ करके बच्चों का जन्म कराया गया.

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    इंसानों की नस्ल बचाने में काम आएगा प्रयोग
    इस प्रयोग से अब वैज्ञानिकों को ये उम्मीद बंधी है कि इंसानों के स्पर्म्स को भी हाई रेडिएशन में जीवित रखा जा सकता है. अगर किसी दूसरे ग्रह पर इंसानों को बसाने ( Humaman Habitation on other Planet) की कोशिश हो, तो इस स्टडी के नतीजे काफी काम आ सकते हैं. स्टोर किए गए स्पर्म्स के ज़रिये इंसान का अस्तित्व खत्म होने से बचाया जा सकेगा. ये प्रयोग आने इंसानों के काफी काम आ सकता है.

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