क्या आप जानते हैं योगी आदित्यनाथ के गुरु बाबा गोरखनाथ की कहानी?

आधी हकीकत आधा फसाना के इस अंक में पढ़िए योगी आदित्यनाथ से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां जिनका ज़िक्र पहले कभी नहीं हुआ. ये कहानी जुड़ी है योगी आदित्यनाथ के गुरु बाबा गोरखनाथ से. उनके चमत्कारों से, उनके शिव रुप से, उस नाथ संप्रदाय से जो चारों युगों में मौजूद था.

News18India
Updated: September 14, 2018, 6:58 PM IST
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क्या कभी आपने सोचा है, कि योगी आदित्यनाथ और बाबा गोरखनाथ के बीच रिश्ता क्या है? या, आखिर उनके नाम के आगे योगी, और नाम के पीछे नाथ शब्द क्यों जोड़ा गया? आखिर कौन होते हैं योगी और क्या मतलब है आदित्यनाथ होने का? क्या नाथ शब्द सिर्फ एक उपनाम है, या कोई उपाधि भी? आखिर क्यों अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गोरखनाथ जैसे धाम से भी नाथ शब्द से जोड़े गए? हर सवाल का एक ही जवाब है - भोलेनाथ यानी महादेव शिव.

योगी आदित्यनाथ के बारे में आप बहुत सी कहानियां जानते होंगे लेकिन क्या ये जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ के भगवा कपड़ों का मतलब क्या है? उनके कानों में जो बड़े से कुंडल दिखते हैं, उसका मतलब क्या है? आमतौर पर साधुओं में सफेद जनेऊ की परम्परा है, फिर योगी आदित्यनाथ काला जनेऊ क्यों पहनते हैं? इसका रिश्ता है नाथ संप्रदाय से और नाथ संप्रदाय का रिश्ता है बाबा गोरखनाथ से.

हिंदू पुराणों और वेदों में कहा गया है कि बाबा गोरखनाथ कोई आम योगी नहीं हैं, बल्कि शिव का अंशावतार हैं. जो आज भी इसी धरती पर मौजूद हैं. शायद किसी नए भेष में, किसी नए योगी के रूप में. तो आज चलते हैं गोरखपुर के गोरखनाथ धाम की ओर. बाबा गोरखनाथ और नाथ पंथ के योगियों की इस अद्भुत दुनिया और गोरखनाथ पीठ के अद्भुत चमत्कारों के बारे में जानते हैं.



ऐसा कहा जाता है कि शिव हैं, तो योग है. योग है, तो योगी हैं, योगी हैं, तो शक्तियां हैं और इन्हीं शक्तियों से शुरु हुआ था शक्तिशाली नाथ पंथ. कुछ यही लिखा है चारों वेदों में और 18 पुराणों में भी. लेकिन सवाल ये कि आखिर वो कौन सी शक्ति है जिसके लिए कोई आम इंसान योगी बन जाता है? क्यों योगी आदित्यनाथ ने जीवन का हर सुख छोड़कर योग को ही ज़िंदगी का सहारा बना लिया? सिर्फ आदित्यनाथ ही क्यों देश के लाखों इंसानों के योगी बनने की वजह क्या है?

आखिर योगी अलग-अलग वेश-भूषाओं में क्यों दिखते हैं? क्यों योगी आदित्यनाथ भगवा धारण करते हैं? कानों में कुंडल और गले में काले ऊनी की माला क्यों होती है? इन सवालों का जवाब तलाशने हम गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ के धाम पहुंचे. गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ज़िला जिसका नाम भी बाबा से जुड़ा है और पहचान भी. बाबा के दरबार में पहुंचे, तो जितनी सुनी थी, कहानी उससे कहीं ज्यादा बड़ी थी और अद्भुत भी.

मंदिर के गलियारे में हमारी निगाहें बाबा गोरखनाथ के दरबार को तलाश रहीं थीं लेकिन उस दरबार में पहुंचे तो नया अचम्भा सामने था. बाबा की प्रतिमा हमें महादेव शिव के जैसी दिखाई दी. योग की कुछ वैसी ही मुद्रा, वैसे ही त्रिनेत्र, वैसे ही केश, गले में रुद्राक्ष की माला और सिर पर चंद्रमा भी. पूछा, तो पता चला कि बाबा का यही रुप है क्योंकि बाबा गोरखनाथ महादेव के अंशावतार हैं.

वहां मौजूद लोगों का कहना था कि 'हम गोरखनाथ को शिव का अवतार मानते हैं. आप मूर्ति में पाएंगे कि शिव के ही रुप की झलक है'. 'गोरखनाथ जी तो शिव का रुप हैं. योग की परम्परा के मुताबिक गोरखनाथ जी शिव के अवतारी मान लिए गए. ये भगवान शिव के अंशावतार हैं. लोगों में आज भी आस्था है कि गोरखनाथ शिव के ही रुप हैं.'
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'मैं ही शिव हूं' यानी 'शिवोहम्'. नाथ संप्रदाय में जितना महत्व शिव का है उतना ही गुरु गोरखनाथ का भी है. गोरखनाथ को शिव का अवतार माना जाता है. गोरखनाथ खुद शिव के ही एक रुप है जो उस समय प्रकट हुए जब विध्वंस फैला हुआ था. उसे रोकने के लिए गोरखनाथ ने अवतार लिया. माना जाता है कि वो अवतारी हैं, हर युग मे मौजूद हैं और ये गोरखधाम मंदिर नाथ संप्रदाय का सबसे बड़ा धाम है.

यक़ीन करना मुश्किल था कि कोई योगी सतयुग से कलयुग तक यानी चारों युगों में मौजूद हो लेकिन बताया गया कि इस कहानी के सबूत भी हमें यहीं मिलते हैं इसी इस धाम में. लेकिन उससे पहले जरूरी था, बाबा गोरखधाम की पौराणिक कहानी को समझना, जो शुरु हुई थी गोरखनाथ के गुरु योगी मत्येन्द्रनाथ से जिन्हें स्थानीय भाषा में योगी मछिन्दरनाथ भी कहते हैं.

गोरखनाथ की कहानी को समझने के लिए आपको मछेंद्रनाथ की कहानी को समझना होगा, ये कहानी शुरू होती है उस रात से जब शिव पार्वती को योग के बारे मे बता रहे थे पार्वती को नींद आ गई थी. इस कहानी का ज़िक्र शिव पुराण में हुआ है जिसके मुताबिक जिस वक्त देवी पार्वती को नींद आई, उस वक्त महादेव शिव को आदियोग का रहस्य सुना रहे थे. जिसे देवी पार्वती तो नहीं सुन पाईं. लेकिन वहां मौजूद एक मछली शिव के रहस्य को गौर से सुनती रही. माना जाता है कि वो मछली ही शिव का रुप बनी और शिव के रुप से ही योगी मत्येन्द्रनाथ की कहानी भी शुरु हुई.

लोगों का कहना है कि 'परम्परा ये कहती है कि जिस वक्त शिव पार्वती को योग की शिक्षा दे रहे थे उस वक्त एक मछली इस ज्ञान को सुन रही थी और वहीं से मछेंद्रनाथ का जन्म हुआ.' हालांकि दूसरी मान्यताओं में बाबा मत्येन्द्रनाथ से जुड़ी एक और कहानी भी है. माना जाता है कि धरती पर बढ़ते अधर्म को रोकने के लिए महादेव शिव ने नौ-नाथों के रुप में अवतार लिया था. हर नाथ आदियोग के रहस्य को जानता था और उन्हीं में थे योगी मत्येन्द्रनाथ और योगी गोरखनाथ.

हमने थोड़ी तलाश की, तो ये कहानी हमें बाबा गोरखनाथ के इसी धाम में मिल गई. तो गोरखनाथ मंदिर को सबसे बड़ी विशेषता है — नाथ संप्रदाय से इसका जुड़ाव. यहां नव नाथ की नौ मूर्तियां मौजूद हैं. बाकी कहानी अगले अंक में.
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