Dairy Milk में चरस मिलाकर बेच रहे थे स्टूडेंट्स, Boys हॉस्टल में ही खोल रखी थी फैक्ट्री

पड़ोसियों की शिकायत के बाद हॉस्टल में छापा पड़ा, जहां फैक्ट्री देख पुलिस भी हैरान थी

यूके (UK) पुलिस ने एक ब्वॉयस हॉस्टल (Boys Hostel) में चल रहे चरस मिले चॉकलेट फैक्ट्री (Chocolates Factory) का भांडाफोड़ किया. हॉस्टल के अंदर चरस मिलाकर डेरी मिल्क (Dairy Milk) की पैकिंग की जाती थी. इसे अलग नाम से बाकी स्टूडेंट्स और लोगों को बेचा जाता था.

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    आपने चॉकलेट तो कई बार खाए होंगे लेकिन अगर आपको पता चले कि इनमें गांजा और चरस मिलाकर बेचा जा रहा है तो? जी हां, यूके के नॉटिंघम (Nottingham) में पुलिस को जानकारी मिली कि एक हॉस्टल में कुछ स्टूडेंट्स चॉकलेट में चरस मिलाकर बेच रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने वहां छापा मारा. अंदर तो स्टूडेंट्स ने इसकी पूरी फैक्ट्री ही बना रखी थी.

    4 जून को मारे गए छापे में पुलिस ने अंदर से 600 बार बरामद किया, जिसमें चरस मिला बटर ऐड किया जा रहा था. इस बटर को मिलाकर फिर से डेरी मिल्क को पैक किया जाता था और अलग नाम से इसे बेचा जाता था. साथ ही इसकी कीमत भी बढ़ा दी जाती थी. अंदर फैक्ट्री में बाकायदा इस चॉकलेट को पिघला कर उसमें चरस मिलाया जाता था.

    ऐसे होता था प्रोडक्शन
    हॉस्टल के अंदर स्टूडेंट्स ने मिनी फैक्ट्री बना रखा था. इसमें चॉकलेट को पिघला कर इसमें चरस मिला बटर ऐड किया जाता था और फिर इसे जमा कर पैकिंग की जाती थी. ये पैकिंग डेरी मिल्क की जगह फ्लावा बॉय नाम से की जाती थी. पुलिस को अंदर से ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रमोशनल मैटीरियल्स भी मिले.

    भारी मात्रा में हो रहा था प्रोडक्शन
    मिनी फैक्ट्री में काफी मात्रा में चरस मिला बटर पाया गया. इसी बटर के जरिये डेरी मिल्क को नशीला बनाया जाता था. अंदर इतना बटर था, जिससे सैंकड़ों चरस वाले चॉकलेट बनाए जा सकते थे. छापा मारने वाली टीम के हेड Sergeant Mark Southgate ने कहा कि उन्हें खबर मिली थी कि यहां कुछ गड़बड़ है. लेकिन यहां आने पर तो पूरी की पूरी फैक्ट्री ही हाथ लग गई.

    मिले डेरी मिल्क के कई डिब्बे
    फैक्ट्री के अंदर चरस मिले करीब 600 बार पुलिस ने बरामद किये. इसके अलावा वहां डेरी मिल्क के 27 डिब्बे रखे थे. इन सभी को पिघला अंदर चरस वाला बटर मिलाने की तैयारी थी. स्टूडेंट्स ने ये फैक्ट्री बेडरूम रखी थी और इसका स्टोरेज दूसरे एरिया में करते थे. पड़ोसियों को इन स्टूडेंट्स पर तब शक हुआ जब उन्होंने यहां रहने वाले स्टूडेंट्स को काफी कम बाहर जाते देखा. ये लोग अंदर ही रहते थे और किसी को आने भी नहीं देते थे. इसी के बाद पड़ोसियों ने पुलिस में कंप्लेन की थी.