यहां बीमार बूढ़े मां-बाप को मार देती है अपनी ही औलाद, परंपरा के नाम पर दी जाती है मौत

कभी नारियल पानी पिलाकर तो कभी ठंडे पानी से नहलाकर मार दिए जाते हैं बुजर्ग

कभी नारियल पानी पिलाकर तो कभी ठंडे पानी से नहलाकर मार दिए जाते हैं बुजर्ग

तमिलनाडु असेंबली इलेक्शन 2021 (Tamil Nadu Assembly Elections 2021) की मतगणना (Counting)शुरू हो गई है. जल्दी ही नतीजे सामने आ जाएंगे. इसके बाद साफ़ हो जाएगा कि आखिर दक्षिण (South) के इस सबसे बड़े राज्य की सत्ता किसके हाथ में आएगी. इसी कड़ी में आज हम आपको तमिलनाडु की एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें परिवार वाले ही घर के बुजुर्गों की हत्या कर देते हैं.

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कहा जाता है कि घर के बुजुर्गों की वजह से घर में रौनक रहती है. भारत में काफी समय से जॉइंट फैमिली का चलन है. दादा-दादी से भरेपूरे घर में खुशियां होती है. लेकिन तमिलनाडु में एक बेहद अजीबोगरीब परंपरा है. यहां घर वाले बुजुर्गों को मार देते हैं. वैसे तो इस परंपरा पर बैन लगा हुआ है फिर भी इसे कई लोग आज भी मानते हैं. इस परंपरा को 'ठलाईकूठल' (Thalaikoothal)कहते हैं. इसमें घर वाले ही अपने परिवार के बुजुर्गों को जान से मार देते हैं.

उत्सव की तरह मनाते हैं मौत

'ठलाईकूठल' परंपरा कुप्रथा है, इसके बावजूद इसे लोग काफी अच्छे से मनाते हैं. इस कुप्रथा को तमिलनाडु में काफी लोग आज भी मानते हैं. इसमें घर के बुजुर्गों को अलग-अलग तरीकों से मौत दी जाती है. खासकर अगर किसी बुजुर्ग को अगर लाइलाज बीमारी हो गई है तो उसका इलाज करवाने की जगह उसे मार दिया जाता है.

अलग-अलग तरह से देते हैं मौत
तमिलनाडु के 'ठलाईकूठल' परंपरा में बुजुर्गों को मौत देने के कई तरीके हैं. इनमें से कुछ बेहद प्रचलित तरीके हैं उनका पेट खराब करवा देना. जी हां, 'ठलाईकूठल' में लोग बुजुर्ग मिट्टी मिला पानी पिलाते हैं. इससे उनका पेट खराब हो जाता है और उनकी मौत हो जाती है. इसके अलावा बुजुर्गों को इतना नारियल पानी पिलाया जाता है कि उनके गुर्दे खराब हो जाते हैं और दो दिन में हो जाती है.

ठंडे पानी से नहला देते हैं

'ठलाईकूठल' में कई बार घर वाले बुजुर्गों को ठंडे पानी से नहला देते हैं. इससे उन्हें हार्ट अटैक आ जाता है. साथ ही परंपरा के नाम पर हत्या के इस रिवाज में बुजुर्गों को नाक बंद कर दूध पिलाया जाता है. जिससे उनकी सांसें रुक जाती है. तमिलनाडु सरकार ने इस खौफनाक परंपरा को बैन कर रखा है लेकिन इसके बावजूद इसे आज भी कई परिवार मनाते हैं.
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