परमाणु बम से भी खतरनाक था ये हथियार, दूसरे विश्वयुद्ध में मचाई थी तबाही, गई थी लाखों की जान

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद नापाम बहुत फेमस हथियार बना था, जिसका इस्तेमाल कोरियन वार, वियतनाम युद्ध तथा 2003 में इराक युद्ध के दौरान हुआ था (सांकेतिक फोटो, AP News)
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद नापाम बहुत फेमस हथियार बना था, जिसका इस्तेमाल कोरियन वार, वियतनाम युद्ध तथा 2003 में इराक युद्ध के दौरान हुआ था (सांकेतिक फोटो, AP News)

द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में पहली बार प्रयोग किये जाने के बाद से नापाम और अन्य ऐसे ज्वलनशील जेलों का कोरियाई युद्ध (Korean War), वियतनाम युद्ध और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के 2003 में इराक (Iraq) पर आक्रमण में भी भारी मात्रा में इस्तेमाल किया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 9:34 PM IST
  • Share this:
ऐसा माना जाता है कि परमाणु बम (Nuclear Bomb) अब तक का सबसे खतरनाक हथियार है. लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध में नापाम (Napalm) नाम के जिस हथियार का इस्तेमाल हुआ था, उसे परमाणु बम से भी ज्यादा भयावह माना गया था. जो 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत (deaths) का कारण बना था. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह सबसे फेमस हथियार बना था, जिसका इस्तेमाल कोरियन युद्ध (Korean War), वियतनाम युद्ध (Vietnam War) तथा 2003 में इराक युद्ध (Iraq War) के दौरान हुआ था.

दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मन (German) और जापानी शहरों के खिलाफ नापाम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था. नापाम एक गाढ़ा ज्वलनशील जेल (inflammable gel) है जो जिस भी चीज पर फेंका जाए, उसी पर चिपक जाता है. फिर इसे लकड़ी या अन्य दहनशील पदार्थों (combustible materials) से बनी इमारतों को नष्ट करने के लिए जलाया जाता है. यह जलकर अत्याधिक तापमान पैदा करता है. ज्वलनशील होने के बावजूद, नापाम उच्च तापमान (High Temprature) पर भी आसानी से नहीं जलता, जिसके चलते इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है. द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में पहली बार प्रयोग किये जाने के बाद से नापाम और अन्य ऐसे ज्वलनशील जेलों का कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के 2003 में इराक पर आक्रमण में भी भारी मात्रा में इस्तेमाल किया गया.

गैसोलीन मिश्रण के विकल्प के तौर पर किया गया था आविष्कार
नापाम का आविष्कार लुईस फिशर के नेतृत्व में हार्वर्ड के केमिस्टों के एक समूह ने किया था. तब इसे मित्र देशों की सेनाओं के उपयोग मे आने वाले जैलीनुमा गैसोलीन मिश्रण के विकल्प के रूप में देखा गया था. आग लगाने वाले हथियारों के शुरुआती रूपों में लेटेक्स का उपयोग किया गया था, लेकिन जापान द्वारा मलाया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड में रबर के बागानों पर कब्जा करने के बाद, ड्यूपॉन्ट और स्टैंडर्ड ऑयल सहित कई अमेरिकी कंपनियों के लिए प्राकृतिक रबर प्राप्त करना दुर्लभ हो गए था. इसलिए इनके विकल्प की तलाश की की गई.
burning tokyo
जापान की राजधानी टोक्यो के जलने का आसमान से लिया गया चित्र, साभार: US Army Air Forces)




1942 में, लुईस फिशर और उनकी टीम ने इस तरह के एक वैकल्पिक-कृत्रिम पाउडर यौगिक को विकसित किया, जो कि गैसोलीन के साथ मिश्रित होने पर एक अत्यंत चिपचिपा और ज्वलनशील पदार्थ में बदल जाता है. एजेंट के दो मुख्य घटक "नेफ्थेनिक एसिड" और "पामिटिक एसिड" होने के चलते उन्होंने इसे नापाम नाम दिया.

टोक्यो में करीब 1 लाख लोगों की मौत की वजह बना था
नापाम का पहली बार हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पास एक फुटबॉल मैदान पर परीक्षण किया गया था. लेकिन जर्मन और जापानी शहरों के खिलाफ हथियार की प्रभावशीलता के परीक्षण के लिए अधिक व्यापक परीक्षण की आवश्यकता थी. बाद में इसके और बड़े परीक्षण हुए.



यह भी पढ़ें: दुनियाभर की इन 9 सबसे रहस्यमयी जगहों पर जाना है BAN, हो सकते हैं गिरफ्तार, जा सकती है जान

इस बम का सबसे बड़ा निशाना टोक्यो बना. जब 9 और 10 मार्च, 1945 की रात को टोक्यो में आग लगा दी गई. इस घटना को इतिहासकारों ने मानव इतिहास में सबसे विनाशकारी बमबारी की घटना बताया है. सैकड़ों अमेरिकी B29s विमानों ने दो हज़ार टन आग लगाने वाले बमों की राजधानी में बारिश की थी. इससे लगी आग से शहर का एक-चौथाई हिस्सा नष्ट हो गया था और एक अनुमान के अनुसार 1,00,000 नागरिक मारे गए थे. ये बम ज्यादातर 500 पाउंड के क्लस्टर डिवाइस थे जो हवा में छोड़े जाने के बाद ही 38 अलग-अलग "M69" में टूट जाते थे. ये M69 नीचे जाकर पतली छतों को भेद देते थे और 3 से 5 सेकंड में ज्वलंत नापाम का थक्का घरों में फेंक देते थे, जो उस हर चीज में आग लगा देता था, जिसे यह छूता था. युद्ध के दौरान करीब 67 जापानी शहरों को ऐसे आग लगाने वाले हमलों का शिकार बनाया गया था. इन हमलों में करीब 40,000 टन M69 का इस्तेमाल किया गया था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज