अमेरिका के नाविक को मिला अजीबोगरीब केकड़ा, देखकर विशेषज्ञ हो गए कनफ्यूज़ !

मैरीलैंड के एक नाविक को मिला अनोखा केकड़ा. (Photo Credit- Delmarva Discovery Museum)

मैरीलैंड के एक नाविक को मिला अनोखा केकड़ा. (Photo Credit- Delmarva Discovery Museum)

जीवों के शरीर में कई बार ऐसे विकार देखने को मिलते हैं, जो हैरान कर देते हैं. कुछ ऐसी ही एक कंडीशन अमेरिका (United States, Maryland) में मिले एक क्रैब (Chesapeake blue crab ) में देखने को मिली है. इस क्रैब के अंगों में नर और मादा दोनों ही क्रैब्स का मिश्रण है. फिलहाल इसे म्यूजियम ( Delmarva Discovery Museum) में रखा गया है और रिसर्च जारी है.

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अमेरिका के मैरीलैंड (United States, Maryland) में एक ऐसा केकड़ा (Chesapeake blue crab ) मिला है, जो आधा नर और आधा मादा है. ऐसे केकड़े कम ही पाए जाते हैं. ऐसे में इसे फिलहाल मैरीलैंड के साइंस म्यूज़ियम ( Delmarva Discovery Museum) में रखा गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक ये चेसापिएक क्रैब (Chesapeake blue crab ) है, जिसमें आधे नर और आधे मादा के अंग हैं.

केकड़े की ये कंडीशन बेहद दुर्लभ है, इसे वैज्ञानिक भाषा में बायलेटरल जिनाड्रोमॉर्फी (bilateral gynandromorphy) कहते हैं. 4 इंच लंबे इस केकड़े की उम्र तीन साल बताई जा रही है. नर केकड़ों में नीले पंजे और टी शेप के एप्रॉन होते हैं जबकि मादा केकड़ों में ये लाल रंग के होते हैं और यू शेप में रहते हैं. जो केकड़ा मैरीलैंड के नाविकों के हाथ लगा है, इसे 15 साल बाद देखा गया है.

जारी है परीक्षण और मिल रहा है पौष्टिक खाना

जेरी स्मिथ (Jerry Smith) नाम के शख्स ने इस केकड़े को पकड़ा है और इसे डेल्मार्वा डिस्कवरी म्यूजियम ( Delmarva Discovery Museum) को डोनेट कर दिया. अब केकड़े को 70 गैलन के टैंक में रखा गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस केकड़े के पंजों में नर और मादा का रंगभेद अभी ठीक से दिख नहीं रहा है. उसे टैंक में शिफ्ट करने के बाद उसकी गतिविधियों पर ज्यादा नजर रखी जा रही है और उसे पौष्टिक आहार दिया जा रहा है.
इन जीवों में भी मिलती है ऐसी कंडीशन

बायलेटरल जीनैनड्रोमॉर्फी (bilateral gynandromorphy) के तहत केकड़ों (Crabs) के बीच के हिस्से के बाद ये बंटा हुआ होता है. पशु विशेषज्ञ सेप्टेम्बर मीग़र का कहना है कि ये केकड़ों में तब देखा जाता है, जब वे पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और उनकी उम्र कम होती है या फिर उनकी सेक्स क्रोमोसोम बंटी नहीं होतीं. इनके जननांगों का विकास होने के साथ ही इनका रंग भी बदलता है. इस तरह की कंडीशन केकड़ों के अलावा झींगा मछलियों, सांपों, मधुमक्खियों, तितलियों और कुछ चिड़ियों में भी पाई जाती है. इसकी वजह उनके गर्भ में रहने के दौरान मां का हॉर्मोन लेवल और वॉटर टेम्परेचर भी हो सकता है. ऐसे जीवों में प्रजनन की क्षमता करीब-करीब नहीं होती है.

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