मंदिर के गर्भगृह में घुसा मगरमच्छ, पुजारी के साथ दिखा अनोखा कनेक्शन, तस्वीरें Viral

मंदिर के तालाब में रहने वाला ये मगरमच्छ दिन में दो बार प्रसाद खाता है. (फोटो साभारः ट्विटर/@mkbhat26)
मंदिर के तालाब में रहने वाला ये मगरमच्छ दिन में दो बार प्रसाद खाता है. (फोटो साभारः ट्विटर/@mkbhat26)

मगरमच्छ के मंदिर में प्रवेश करने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो ये मगरमच्छ शाकाहारी है और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है. कुछ रिपोर्ट्स में भी यह भी कहा गया है कि मगरमच्छ ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया जो कि ठीक नहीं है

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 12:43 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के तीर्थस्थल अपनी परंपरा के साथ कई ऐसे रहस्यों को अपने अंदर समेटे हुए हैं. कुछ रहस्यों पर से पर्दा उठ चुका, लेकिन कुछ अनसुलझे ही हैं. शायद यही रहस्य हैं जो देश ही नहीं बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं को भी अपनी ओर खींचते हैं. एक ऐसा ही रहस्या छिपा हुआ है केरल (Kerala) के कासरगोज स्थित अनंतपुर नाम के मंदिर में. कई सालों से इस मंदिर की रखवाली एक मगरमच्छ (Crocodile babiya) कर रहा है. इस मगरमच्छ का नाम बाबिया है. ये बात जानकार आपको हैरानी होगी कि इसे मंदिर का पुजारी भी कहा जाता है. मंगलवार को यह मगरमच्छ अचानक मंदिर में प्रवेश कर गया. मंदिर परिसर में मगरमच्छ का इस तरह से घुसना सबके लिए हैरान करने वाला था. मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद मगरमच्छ ने कुछ वक्त वहां पर बिताया और मुख्य पुजारी चंद्रप्रकाश नंबिसन के कहने पर वह मंदिर के तालाब में वापस चला गया.

मगरमच्छ के मंदिर में प्रवेश करने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो ये मगरमच्छ शाकाहारी है और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है. कुछ रिपोर्ट्स में भी यह भी कहा गया है कि मगरमच्छ ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया जो कि ठीक नहीं है

रहस्य है तालाब में मगरमच्छ का आना
बाबिया काफी समय में मंदिर के तालाब में रह रहा है. हालांकि अभी तक ये बात सामने नहीं आई है कि बाबिया मंदिर के तालाब में कैसे आया और यह नाम इसे किसने दिया. ऐसा कहा जा रहा है कि बाबिया मंदिर के तालाब में पिछले 70 सालों से है, लेकिन आज तक उसने किसी के साथ हिंसक व्यवहार नहीं किया है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाया है.
फोटो साभारः ट्विटर




दो बार मंदिर का प्रसाद खाता है मगरमच्छ
रिपोर्ट्स की मानें तो ये मगरमच्छ दिन में दो बार मंदिर में पूजा के बाद प्रसाद खाता है. प्रसाद लेकर मंदिर के पुजारी जैसे ही तालाब के पास जाते हैं बाबिया को आवाज देते हैं वो बाहर आ जाता है और शांति से प्रसाद खाता है. मंदिर के कर्मचारियों का कहना है कि बाबिया का पुजारी से अनोखा कनेक्शन है. उन्होंने कहा मंदिर के तालाब में ढेरों मछलियां हैं और हमें यकीन है कि बाबिया कभी उनका शिकार नहीं करता है. बाबिया पूरी तरह से शाकाहारी है.
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