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VIDEO: बेहद अनोखा है चीन का ये पारंपरिक खेल, रैकेट की जगह पैर से मारते हैं शटलकॉक!

इस खेल को बिना रैकेट के खेला जाता है. (फोटो: Twitter)

इस खेल को बिना रैकेट के खेला जाता है. (फोटो: Twitter)

टी जियान जी (Ti Jian Zi) के नाम से फेमस इस खेल में रैकेट की जगह पैरों से शटलकॉक (History of shuttlecock kicking game) क ...अधिक पढ़ें

दुनिया में जितने देश हैं उनके अपने अलग-अलग पारंपरिक खेल (Traditional games of India) रहे हैं जो समय के साथ गायब होते जा रहे हैं. फुटबॉल और क्रिकेट के जमाने में कोई भी ऐसे खेलों को नहीं खेलना चाहता है. भारत में गिल्ली डंडे जैसे कई खेल रहे हैं जिसे शहरी बच्चे नहीं जानते. आज हम आपको चीन के एक अनोखे खेल के बारे में बताने जा रहे हैं जो वहां का पारंपरिक खेल (Tradition sport of China) माना जाता है और ये देखने में बैडमिंटन जैसा लगता है बस इसमें रैकेट का इस्तेमाल नहीं होता.

अब आप सोचेंगे के अगर रैकेट का इस्तेमाल नहीं होता यानी शटलकॉक का इस्तेमाल होता होगा, और अगर शटलकॉक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर बिना रैकेट के उसे मारते कैसे होंगे. चलिए आपको इस खेल के बारे में पूरी जानकारी देते हैं. हाल ही में ग्रीनबेल्ट और रोड इंस्टिट्यूट के प्रेसिडेंट एरिक सोलहेम (@ErikSolheim) ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस खेल से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है जिसमें दो लोग मजे से इस खेल को खेलते नजर आ रहे हैं. आपको बता दें कि इस खेल को कहते हैं शटलकॉक किकिंग (Shuttlecock kicking game).


ईसा पूर्व से खेला जा रहा है ये खेल
टी जियान जी (Ti Jian Zi) के नाम से फेमस इस खेल में रैकेट की जगह पैरों से शटलकॉक (History of shuttlecock kicking game) को मारते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये खेल आज का नहीं है. रिपोर्ट्स की मानें तो ये खेल चीन में हान वंश के दौर से खेल जा रहा है जिसका शासन 206 ईसा पूर्व से साल 220 एडी तक था. मिंड वंश (1368-1644) के दौर में इस खेल की प्रतियोगिताएं शुरू हो गईं और क्विंग वंश (1644-1911) तक इस खेल के लिए लगाव अपने चरम पर था जब लोगों ने किक मारने के अंदाज को बदला और खेल में नई-नई ट्रिक्स को अपनाया जाना शुरू हो गया.

खत्म होते खेल को लोगों ने फिर से किया जिंदा!
इस खेल में सिर्फ इतना नियम है कि एक बार में एक पैर से शटलकॉक को एक खिलाड़ी मारता है और उसे बिना गिराए हवा में रखना होता है. शटलकॉक को पैर के टखनों से मारा जाता है, मगर जैसे-जैसे लोगों का हुनर बढ़ता है, वैसे-वैसे मारने का तरीका और भी बेहतर होता जाता है. 1930 तक ये खेल खत्म होता जा रहा था मगर नए चीन के निर्माण के दौरान इसे फिर से बढ़ावा दिया गया और देश का पहला आधिकारिक शटलकॉक किकिंग कंप्टीशन गुआंग्जो शहर में साल 1956 में आयोजित किया गया. अब इस खेल को चीन में फिर से बड़े मजे के साथ लोग खेलते हैं.

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