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इस कलश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में भी दर्ज है

News18Hindi
Updated: May 23, 2018, 7:15 PM IST

कहा जाता है कि महाराजा की इच्छा का पालन करने के लिए साल 1894 में उनके आदेशानुसार शाही खज़ाने से तकरीबन 14000 चांदी के सिक्कों को आग में तपाकर बनाया गया यह कलश.

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कहते हैं कि देश और दुनिया से जयपुर आने वाले पर्यटकों की प्यास सिटी पैलेस आये बिना नहीं बुझती, क्योंकि इस पैलेस में मौजूद है दुनिया का सबसे बड़ा चांदी का कलश. जी हां, यहां मौजूद है दुनिया का सबसे बड़ा गंगाजली कलश.

चांदी के चमकते इस रिकॉर्डधारी कलश की ऊंचाई है 5 फ़ीट 3 इंच और गोलाई है 14 फ़ीट 10 इंच. जबकि इस कलश का वज़न है 345 किलोग्राम. इसलिए जो भी इस अनोखे गंगाजली कलश को देखता है, पलक झपकाए बिना बस देखता ही रहता है.

आज तक किसी ने इतने बड़े साइज़ का चांदी का कलश नहीं देखा होगा. ऐसा कहा जाता है कि महाराजा सवाई माधो सिंह की इच्छा का पालन करने के लिए साल 1894 में उनके आदेशानुसार शाही खज़ाने से तकरीबन 14000 चांदी के सिक्कों को आग में तपाकर बनाया गया यह कलश.

दरअसल 14000 चांदी के सिक्कों को पिघलाकर एक बड़ी सी चादर यानी शीट बनायी गयी और फिर उस चादर को लकड़ी के एक कलशनुमा सांचे के साथ पीट-पीटकर कलश का आकार दे दिया गया. शाही कारख़ाने में इस कलश को बनने में लगभग दो साल लगे थे.

कलश के ढ़क्कन और हत्थों यानी हैंडल्स को भी उन्हीं कारीगरों ने बनाया था, जिन्होंने इतने विशाल और सुंदर कलश को बनाया था. आश्चर्यजनक कला के बेहतरीन नमूने बन चुके चांदी का यह गंगाजली कलश दुनिया के सामने आया साल 1902 में, जब ये कलश रॉयल ट्रिप पर ब्रिटेन गया. उसके बाद से इसकी चर्चा सबकी ज़ुबान पर होने लगी.

इस अजूबे गंगाजली कलश के साथ एक दिलचस्प बात यह भी है कि इसे इंडिया से ब्रिटेन जिस पानी के जहाज से ले जाया गया था, उसे भी पहले गंगाजल से धुला गया था. देखने वालों को हैरान कर देने वाले चांदी का यह गंगाजली कलश अपने साइज और खूबसूरती के चलते गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में भी दर्ज है. इंडियन कल्चर और आर्ट का जीता जागता और बेहद शानदार उदाहरण माने जाने वाले यह कलश सच में हैं अजब भी हैं और गज़ब भी.

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First published: May 23, 2018, 7:15 PM IST
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