कुलधरा: परिंदे भी गांव की सरहद में दाखिल नहीं होते

कुलधारा राजस्थान का एक रहस्यमयी गांव है, जो करीब 200 साल पहले एक ही रात में उजड़ गया और ऐसा उजड़ा कि आज तक कभी नहीं बसा.

News18Hindi
Updated: February 17, 2018, 10:42 AM IST
कुलधरा: परिंदे भी गांव की सरहद में दाखिल नहीं होते
कुलधारा राजस्थान का एक रहस्यमयी गांव है, जो करीब 200 साल पहले एक ही रात में उजड़ गया और ऐसा उजड़ा कि आज तक कभी नहीं बसा.
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Updated: February 17, 2018, 10:42 AM IST
ये कहानी 200 साल पुराने एक अनसुलझे रहस्य की है. ये कहानी देश के सबसे डरावने गांव की है. ये कहानी कुलधरा की है. एक श्राप ने इस हंसते-खेलते गांव को हमेशा के लिए वीरान कर दिया. क्यों इस गांव में कुछ अजीब से हादसे होते हैं? क्यों उन वीरान घरों में अक्सर कुछ रहस्यमय आवाजें सुनाई देती हैं ? क्यों आसपास की आबादी को दिन के उजाले में भी यहां आना मंजूर नहीं है. क्यों देश की इस विरासत पर भूतहा होने की मुहर लग चुकी है?

न्यूज 18 यहां पर इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रहा है. इन जवाबों को पाने के लिए पैरानॉर्मल सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम ने की हमारी मदद. विज्ञान के आधुनिक उपकरणों ने खोजा रहस्यमय कहानी की उन परतों को, जिसने सदियों से इस गांव को बसने नहीं दिया. कुलधारा राजस्थान का एक रहस्यमयी गांव है, जो करीब 200 साल पहले एक ही रात में उजड़ गया और ऐसा उजड़ा कि आज तक कभी नहीं बसा.

वैसे तो कुलधरा से जुड़ी एक बड़ी ऐतिहासिक कहानी भी है लेकिन सदियों के वीराने ने इस कहानी को एक ऐसा मोड़ दे दिया कि यहां के लोग और आने वाले सैलानी भी ये दावा करते हैं कि इस गांव में कुछ अनजान शक्तियां मौजूद हैं. शायद यही वजह है कि कुलधरा पर सदियों से भूतहा होने का कलंक लगा है.

इसे देश की सबसे डरावनी जगहों में से एक माना जाता है. ये कोशिश कुलधरा की उन्हीं कहानियों की पड़ताल करने की है, जो 200 साल से कायम उस कलंक को मिटा सके. ये कोशिश है विश्वास और अंधविश्वास के बीच उसी बारीक लकीर को तलाशने की है.

एक समय था जब कुलधरा के आसपास 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे. किस्से-कहानियों में कहते हैं कि हंसते-खेलते कुलधरा को जिस शख्स की बुरी नजर लगी वो थे रियासत का दीवान सालम सिंह. आसपास के बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि गांव के एक पुजारी की बेटी पर सालेम सिंह की बुरी नज़र पड़ गई और वो पुजारी की खूबसूरत लड़की पर फिदा हो गए.

जिसके बाद सालेम सिंह ने उस लड़की से शादी करने के लिए गांव के लोगों को चंद दिनों की मोहलत दी. गांववालों ने मामले में चौपाल लगाई. इसी चौपाल में पालीवाल ब्राह्मणों की बैठक में तय हुआ कि 5000 से ज्यादा परिवार अपने सम्मान को बचाने के लिए सालेम सिंह की रियासत को छोड़ देंगे. चौपाल की अगली शाम कुलधरा कुछ यूं वीरान हुआ कि आज परिंदे भी उस गांव की सरहदों में दाखिल नहीं होते.

कहते हैं गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दे दिया. तब से आज तक ये वीरान गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में है, जो यहां आने वालों को अक्सर अपनी मौजूदगी का अहसास भी कराती हैं.

इन्हीं रहस्यों पर से पर्दा उठेगा "कुलधरा" के अगले भाग में...
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