कुलधरा: क्या है यहां नज़र आने वाली रहस्यमय परछाइयों का राज?

News18Hindi
Updated: February 17, 2018, 11:47 PM IST
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कुलधरा जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है. ये गांव अब भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है. इस गांव में आज भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा पहले था. गांव के मकान आज भी अपने अतीत की गवाही देते हैं.

बदलते वक्त के साथ आसपास के 82 गांव तो दोबारा बस गए लेकिन दो गांव ब्राह्मणों के श्राप के कारण आज भी आबाद नहीं हो पाए. इनमें एक है कुलधरा और दूसरा है खाभा. कुलधरा घर के आंगन, चौखट, सीढ़ियां, कमरे सब कुछ वैसे के वैसे दिखाई देते हैं. जिसे दिन की रोशनी में सैलानियों के लिए रोज खोल दिया जाता है.

यहां सैकड़ों पर्यटक रोजाना आते हैं देश की इस विरासत को करीब से देखने के लिए और जब वो वापस लौटते हैं तो अकेले नहीं होते. उनके साथ होती है कुलघरा के उजड़ने की कहानी. इस गांव में केवल मंदिर है, जो श्राप से मुक्त है. मंदिर के पास ही एक बावड़ी है, जो उस दौर में पीने के पानी का जरिया थी. कहते हैं कि शाम ढलने के बाद अक्सर यहां कुछ रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं. आसपास के लोगों का मानते हैं कि वो आवाजें 18वीं सदी का वो दर्द है, जिनसे कभी पालीवाल ब्राह्मण गुजरे थे.

कुलधरा गांव के कुछ मकान ऐसे हैं, जहां रहस्यमय परछाई अक्सर नज़रों के सामने आ जाती है. दिन की रोशनी में यहां सब कुछ इतिहास की कहानी जैसा लगता है, लेकिन शाम ढलते ही कुलधरा के दरवाजे बंद हो जाते हैं और दिखाई देता है रूहानी ताकतों का एक रहस्यमय संसार.

इसी रहस्यमयी गुत्थी को सुलझाने के लिए न्यूज 18 की टीम पैरानॉर्मल सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम के साथ इस डरावने गांव में दाखिल होती है और इस रहस्य को उजागर करने में साथ दे रहे थे कुलधरा के 24 साल पुराने केयर टेकर.

न्यूज 18 का मकसद है उन अलौकिक शक्तियों को समझना जिसे विज्ञान की भाषा में पैरा विज्ञान नाम दिया गया है. इसके लिए टीम उस कमरे में पहुंची, जिसमें आज से 200 साल पहले दीवान सालम सिंह ने बहुत से जुल्म ढाए थे. कहते हैं कि ये कमरा उस पुजारी की बेटी का था, जिसपर सालम सिंह सम्मोहित था. पलायन के वक्त वो लड़की अपने कुनबे के साथ यहां से चली तो गई थी, लेकिन लोगों का कहना है कि बरसों बाद भी उसकी आत्मा यहीं भटकती है.

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इस बात की वैज्ञानिक पुष्टी करने के लिए टीम पैरा विज्ञान के कुछ आधुनिक मशीनों को लेकर कमरे में गई और उन कहानियों का सच जानने की कोशिश करने लगी. आधुनिक मशीन के-2 मीटर के जरिए ये देखने की कोशिश होने लगी कि क्या वाकई हमारे आसपास कोई ऊर्जा मौजूद है. जिसे इलाके के लोग अलौकिक शक्ति मानते हैं. के-2 मीटर में अगर तीन लाइट जलती है तो उससे साफ हो जाएगा कि यहां कोई ताकत जरूर है. टीम करीब आधे घंटे तक कमरे की पड़ताल करती रही लेकिन न के-2 मीटर पर कुछ दिखा और न ही मोशन सेंसर पर.

क्या "कुलधरा" में है कोई अदृश्य शक्ति या वो महज एक मनोवैज्ञानिक डर है. जानिए अंतिम भाग में....
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