ये अनोखी कलाकृति समुद्री झाग से बनी है

समुद्री झाग पर कलाकृति बनाना सच में आश्चर्यजनक तो था, साथ ही यह इतना नाज़ुक आर्ट था कि महज़ 13 साल की उम्र में हर्षवर्धन छाजेड़ जी फेमस हो गए

News18Hindi
Updated: July 16, 2018, 5:16 PM IST
News18Hindi
Updated: July 16, 2018, 5:16 PM IST
जीवन के 70 बसंत देख चुके अदभुत, असाधारण और अजब-गजब प्रतिभा के मालिक हैं हर्षवर्धन छाजेड़. रंगीले राजस्थान के उदयपुर शहर के रहने वाले छाजेड़ जी ऐसे अमेजिंग टैलेंट के मालिक हैं, जिसे शायद ही किसी ने देखा हो. इनकी खूबसूरत कलाकृतियों और एक से एक डिज़ाइन को देखकर कोई भी वाह-वाह कर उठता है.

हर्षवर्धन जी ने जिन कलाकृतियों को अपने हाथों से तराशा है, वो सभी समुद्री झाग से बने हैं. समुद्री झाग पर बनी कलाकृतियों में हर्ष जी ने मनमोहक श्रीनाथ जी की प्रतिमा के अलावा महावीर स्वामी, राधा नृत्य औऱ गणेश की प्रतिमाएं भी बनाई हैं. हर्ष जी की यह कला अपने आप में अनूठी है और इसकी प्रेरणा उन्हें कहीं से और किसी से भी नहीं बल्कि स्वयं से मिली, वो भी क़रीब सत्तावन साल पहले. जैसे-जैसे हर्ष जी का अजब गज़ब शौक परवान चढ़ता गया. वो अपने इस अनूठी आर्ट में एक्सपेरिमेंट्स करने लगे और अपनी कला को निखारने लगे. शुरूआत में छोटे-छोटे मॉडल्स बनाने के बाद उन्होंने बड़े-बड़े और कठिन मॉडल्स बनाने शुरू किये.

समुद्री झाग पर कलाकृति बनाना सच में आश्चर्यजनक तो था, साथ ही इतना नाज़ुक काम था कि उस पर आर्ट बनाना कोई आसान काम नहीं होता. लेकिन हर्ष जी ने इसको बनाने के लिए जुगाड़ से बने टूल्स भी इस्तेमाल किया. महज़ 13 साल की उम्र से शुरू हुई हर्ष जी की एक छोटी सी कोशिश ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिला दी. लेकिन तकरीबन सत्तावन साल का उनका यह अनूठा करियर चुनौतियों से भी भरा रहा.



दरअसल समुद्री झाग बेहद ही नाजुक पदार्थ होता हैं, जिस पर बारीक काम करना हर कलाकार के बस की बात नहीं है. हर्ष जी का शौक उनके लिए जुनून बन चुका था. उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और फिर क्या यह अनोखी कला और बारीक कारीगरी देखने वालों को दीवाना बनाती गयी. अपने करियर में अभी तक हर्ष जी हजारों कलाकृतियां बना चुके हैं. हर्ष जी की कला कितनी बारिक है उससे पता चलता है कि कई बार उन्हें एक कलाकृति बनाने में एक साल से भी ज्यादा का वक़्त लग जाता है.

समुद्री झाग पर बारीक कारीगरी करने के दौरान कई बार पूरी कलाकृति खराब हो जाती है, जिसके चलते उन्हें दोबारा मेहनत करनी पड़ती है. असाधारण प्रतिभा के कलाकार हर्ष छाजेड़ जी के इस अनोखी कला पर इंदौर की एक रिसर्च स्कॉलर ने पीएचडी तक कर डाली है.
Loading...

और भी देखें

पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...