OMG: इस रेंगने वाले जीव को पालतू जानवर की तरह रखते हैं लोग, पीने के लिए देते हैं अपना ही खून!

फोटो- सोशल मीडिया से

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लीच (Leech) पालने वाले शख्स ने बताया कि इन जीवों को ताजा खून पीना अच्छा लगता है. इसलिए वो व्यक्ति अपने हाथ पर ही इन्हें रख लेता है. इनका पहला डंक चुभता है मगर फिर जब वो खून पीना शुरू कर देते हैं तो पता भी नहीं चलता कि वो खून पी रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 29, 2021, 9:38 AM IST
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आपने अक्सर कई लोगों को पालतू जानवर (Pet Animals) रखते हुए देखा होगा. कोई पेट के तौर पर कुत्ता पालता है तो किसी को बिल्ली पालने का शौक होता है. कई लोग बकरी, भेड़, गाय, भैंस, मछली, पक्षी, सुअर, यहां तक की घोड़े भी पालते हैं. पहले के राजा-महाराजा शेर और चीते पाला करते थे. मगर क्या कभी आपने सुना है कि कोई व्यक्ति ऐसे जीवों को पालतू बनाकर रखे जो खून चूसता हो और वो भी अपने मालिक का ही. ये पढ़कर ही आपको सिहरन होने लगी होगी. लेकिन ये सच है कि इस दुनिया में कई लोग एक ऐसे जीव को भी पालने का शौक रखते हैं जो खून चूसता है.

इस जीव को जोंक (Leech) कहते हैं. आपने कभी ना कभी, 'जोंक की तरह चिपक जाना' मुहावरा सुना होगा. जोंक ऐसा जीव है जो खून चूसता है. अक्सर ये जंगली या पालतू जानवरों के शरीर पर चिपक जाते हैं और धीरे-धीरे उनका खून चूसते रहते हैं. ये जोंक अगर इंसानी शरीर पर चिपक जाएं तो उनके शरीर से भी खून चूस लेते हैं. वैसे तो ये जीव इंसानों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं मगर दुनिया में ऐसे भी कई लोग हैं जिन्हें जोंक पालने का शौक है. वो इन जीवों को अपने शरीर पर पनाह देते हैं और फिर अपना ही खून इन्हें चूसने देते हैं.

जोंक पालने वाले शख्स ने अपने पालतू जानवर के लिए क्या कहा?

साइंस अलर्ट नाम की एक वेबसाइट को एक अंजान जोंक पालने वाले व्यक्ति ने बताया- ये गजब के पालतू जानवर होते हैं जो तेजी से बढ़ते हैं. शख्स ने बताया कि उनके पास 4 लीच हैं. ये सारे भैंस के शरीर पर पड़ने वाले जोंक हैं जिन्हें एशियन लीच भी कहा जाता है. ये जानवर बड़े भी होते जाते हैं. कई ऑनलाइन स्टोर्स एक जोंक को 300 डॉलर के रेट पर भेचती हैं. ये जोंक 5 या साढ़े पांच इंच तक बढ़ जाते हैं. आप अंदाजा लगाइए कि ये आपकी हथेली के बराबर साइज के हो सकते हैं!
लीच पालने वाले शख्स ने बताया कि इन जीवों को ताजा खून पीना अच्छा लगता है. इसलिए वो व्यक्ति अपने हाथ पर ही इन्हें रख लेता है. इनका पहला डंक चुभता है मगर फिर जब वो खून पीना शुरू कर देते हैं तो पता भी नहीं चलता कि वो खून पी रहे हैं. जोंक के थूक के चलते ऐसा होता है कि खून पीने का एहसास व्यक्ति को नहीं होता है. जोंक का काटा हुआ घाव जल्दी भर जाता है और कोई निशान भी नहीं छूटता है. इसके अलावा कुछ लोग मीट की दुकानों से ताजा गोश्त भी ले लेते हैं जो वो जोंक को खाने के लिए देते हैं.

आपको बता दें कि जोंक का पालन करना नई बात नहीं है. मेडिकल के क्षेत्र में भी जोंक को काफी वक्त से पाला जा रहा है. 19वीं शताब्दी तक जोंक को हेडएक और निंफोमेनिया के इलाज के लिए बहुत कारगर माना जाता था. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी जोंक के इस्तेमाल को मेडिकल डिवाइस के तौर पर अप्रूव कर दिया है. जोंक थेरेपी (Leech Therapy) में जोंक को शरीर (Body) के उस भाग पर रखा जाता है, जहां समस्‍या होती है. भारत (India) में प्राचीन समय से ही जोंक थेरेपी से इलाज (Treatment) किया जाता रहा है. खून से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए जोंक से चुसवाया जाता है. जोंक खून चूसने के दौरान खून में हीरूडीन नामक रसायन को मिला देती है. यह रसायन जोंक की लार में पाया जाता है. हीरूडीन रक्त को जमने नहीं देता. इसके अलावा जोंक मरीज के शरीर में कई अन्य पेस्टीसाइड छोड़ती है, जो गैंगरीन से ग्रसित अंगों में ब्लड सर्कुलेशन शुरू कर देता है. यही नहीं इन रसायनों की वजह से घाव भी बहुत तेजी से भरता है.
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