OMG! दरगाह पहुंचे डॉक्टर ने वही तरकीब आज़माई, जो चमत्कारी बाबा आज़माते हैं!

आधी हकीकत आधा फसाना : लखनऊ से 50 किलोमीटर दूर बाराबंकी की बांसा शरीफ की दरगाह के बारे में कहते हैं कि रूहानी ताकतों की सबसे बड़ी अदालत है. इस दरगाह में लोगों के विश्वास और साइंस के दावों की पूरी दास्तान.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2018, 6:39 AM IST
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एक दरबार का दावा है कि वहां शैतानी ताकतों की पेशी की जाती है. कहते हैं कितनी बड़ी प्रेतबाधा हो, दरबार में पहुंचते ही सब दूर हो जाता है. हमने जब इस पूरे मामले का सच जानने की कोशिश की तो मेडिकल साइंस और दरगाह की मान्यताओं को आमने-सामने खड़े करने का फैसला किया. इस पूरे सिलसिले का सच जानने के लिए हमारे कहने पर डॉक्टर एक ही बार में दरगाह आने के लिए तैयार हो गए.

मगरिब के वक्त जब रोशनी की जाती है तो कब्र पर भी चिराग जलाए जाते हैं. कहा जाता है कि इन चिरागों को देखने से आंखों में असर होता है और वो मरीज़ ठीक हो जाते हैं. अब इन बातों का हमारे लिए कोई मतलब नहीं रह गया था, क्योंकि अपनी पड़ताल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अब हम कुछ ऐसा करने वाले थे, जो इस दरगाह में आज तक किसी ने नहीं किया था.

अब हम मेडिकल साइंस और दरगाह को एक दूसरे के सामने खड़ा करने वाले थे. इसका मकसद डॉक्टर से इन बदलावों की वजह जानना था और उस पर दरगाह से जुड़े लोगों का जवाब जानना था. हम चाहते थे कि दरगाह में सबके सामने ही पड़ताल का नतीजा आए. जब हमने ऐसा किया तो एक ऐसी बात सामने आई जिसकी कल्पना हमने क्या किसी ने नहीं की थी.



दरगाह पहुंचकर हम अपने काम में जुट गए थे. सब कुछ सामान्य था. दरगाह में हमें रज्जाक भी नज़र आया जो हर तरीके से फिट नजर आ रहा था. फिर हमारी मुलाकात अपने तीसरे केस साबिर के परिवार से हुई जो मेडिकल टेस्ट कराकर आ चुके थे. हमने पूछा कि डॉक्टर ने क्या बताया? हमारी पड़ताल रंग लाने वाली थी लेकिन इस पर अंतिम मुहर तो एक डॉक्टर ही लगा सकता था.
दरगाह पहुंचते ही डॉक्टर ने अपना मकसद साफ कर दिया कि हम किसी के विश्वास को चुनौती नहीं दे रहे थे बल्कि असलियत समझने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन दरगाह में कोई भी डॉक्टर की बात सुनने को राजी नहीं हुआ. सुनना तो दूर, कोई अपनी समस्या बताने तक के लिए तैयार नहीं था. कुछ लोक-लाज, कुछ हिचक तो कुछ अविश्वास. इन सब वजहों से डॉक्टर से कोई बात करने के लिए तैयार नहीं था. फिर डॉक्टर ने वही किया जो एक बाबा चमत्कार के नाम पर करता है. वो मरीज़ को बताए बगैर उसकी बीमारी बताने लगे.

हमने यही फॉर्मूला सब पर अपनाया और नतीजे भी सामने थे. डॉक्टर के मुताबिक ऐसी मानसिक बीमारियों के होने और पनपने के लिए कई बातें जिम्मेदार होती हैं. फिर हमने शमीमा और रज्जाक के केस का जिक्र किया तो डॉक्टर के मुताबिक कुछ समय के अंतराल पर उनका सामान्य दिखना उनकी बीमारियों का ही एक लक्षण है. कुछ दिन बाद ये फिर पहले जैसे हो जाएंगे. फिर वैसी ही अजीब हरकतें करने लगेंगे.

अब सारा खेल हमारे साथ वहां मौजूद सभी लोगों को समझ में आ चुका था. हम किसी के विश्वास पर सवाल नहीं खड़ा कर रहे और हम ये नहीं कह रहे हैं कि आप दुआ मत कीजिए. हम तो बस यही कह रहे हैं दुआ कीजिए, बिल्कुल कीजिए लेकिन दुआ के साथ बीमारी को मिटाने के लिए मरीज को दवा भी खिलाइए. डॉक्टर से इलाज भी कराइए.
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