OMG! टेढ़ी खीर थी इस दरगाह के विश्वास को अंधविश्वास साबित करना!

आधी हकीकत आधा फसाना : लखनऊ से 50 किलोमीटर दूर बाराबंकी की बांसा शरीफ की दरगाह में कहते हैं कि रुहानी ताकतों की सबसे बड़ी अदालत है. इस दरगाह में लोगों के विश्वास और साइंस के दावों की पूरी दास्तान.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2018, 6:40 AM IST
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आधी हक़ीक़त आधा फ़साना-भाग दो. ऐसी बीमारियां और इलाज का ऐसा दावा आपने पहले भी देखा होगा लेकिन एक बात जो यहां तक खींच कर लाई, वो था यहां के इलाज का तरीका. एक चिराग़ का काफी अहम रोल है. कहते हैं कि दरगाह में पेशी के बाद सज़ा के तौर पर दरगाह की परिक्रमा कराई जाती है. उसके बाद तुरंत चौंका देने वाले नतीजे मिलते हैं. इन सारी चीजों को हमने एक-एक करके परखा. हर कदम पर रूहानी इलाज को चुनौती दी. यहां तक कि मेडिकल साइंस और दरबार को आमने सामने खड़ा कर दिया. नतीजा बेहद हैरत अंगेज था.

दरगाह में चमत्कारी इलाज के दावे की पड़ताल का आगाज़ हमने वहां से शुरु किया, जहां से ये प्रक्रिया शुरु होती है. पहले दरगाह में आने वाले मरीजों की पूरी जानकारी एक पर्ची पर लिखी जाती है. दरगाह के मुताबिक अर्जी लगाने के बाद शैतानी साये से पीड़ित मरीजों को मजार के सामने बैठा दिया जाता है. दरबार की भाषा में समझें तो शैतान की पेशी की जाती है.

अर्जी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पहली मरीज़ शमीमा ऐसी ही पेशी के दौर से गुजर रही थी. वहां कुछ और महिलाएं भी थीं. उधर रज्जाक का इलाज इससे आगे पहुंच चुका था. दरगाह के मुताबिक पेशी के बाद रज्जाक के अंदर बैठे बुरे साये की सजा मुकर्रर हो चुकी थी. रज्जाक को दरगाह के चक्कर काटने के लिए तैयार किया जा रहा था लेकिन वो अंदर जाने से घबरा रहा था.



हम उसके पीछे-पीछे गए. अचानक तभी बौखलाए रज्जाक ने हम पर हमला करने की कोशिश की. इसकी हरकतें खौफनाक होती जा रही थीं. एक छोटा सा लड़का आक्रामक व्यवहार कर रहा था. इसी तरह रज्जाक करीब 1 घंटे तक मजार के चक्कर काटता रहा. फिर अचानक वो बेहोश हो गया. जब होश में आया तो बिल्कुल ही बदला हुआ था.
वहीं, शमीमा की हालत देखकर तो हम और भी चौंक पड़े. इलाज से पहले और इलाज के बाद की हालत में ज़मीन आसमान का फर्क था लेकिन ये हुआ कैसे? लोगों के मुताबिक तो ये सब दरबार की अद्भुत शक्ति का नतीजा है. फिलहाल तो हमें ये विश्वास एक अंधविश्वास लग रहा था लेकिन इसे साबित कैसे किया जाए? ये समझ में नहीं आ रहा था. (शेष अगले अंक में..)
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