Video: वैज्ञानिक का कमाल, अब बिना पैसे खर्च किए किसान करेंगे खेतों की सिंचाई

सुकमा के गिरदालपारा में लगे हाईड्रो पावर बेस्ड पंम्पिंग सिस्टम का मुआयना करने पहुंचे मंत्री कवासी लखमा

सुकमा के गिरदालपारा में लगे हाईड्रो पावर बेस्ड पंम्पिंग सिस्टम का मुआयना करने पहुंचे मंत्री कवासी लखमा

बैगलुरू के वैज्ञानिक डाक्टर पुनीत सिंह और सुकमा जिला प्रशासन की मेहनत रंग लाई है. यहां पर बिना ईधन के चलने वाली माईक्रोहाईड्रो टरबाइन स्थापित किया गया है जिससे गांव के करीब 50 किसानों की 200 हेक्टेयर खेती सिचिंत की जाऐंगी.

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  • Last Updated: March 21, 2021, 4:26 PM IST
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सुकमा. जिले के नक्सल प्रभावित गांव गिरदाल पारा जहां बैगलुरू वैज्ञानिक डाक्टर पुनीत सिंह व जिला प्रशासन की मेहनत रंग लाई है. यहां पर बिना ईधन के चलने वाली माईक्रोहाईड्रो टरबाइन स्थापित किया गया है, जिससे गांव के करीब 50 किसानों की 200 हेक्टेयर खेती सिचिंत की जाऐंगी. एनएच 30 से महज 6 किमी दूर गिरदालपारा गांव के समीप नाले में बने स्टाप डेम के पास हाईड्रो पावर बेस्ड पंपिग स्कीम शुरू की गई है. इस योजना का लाभ गांव के करीब 50 किसानों को मिलेगा जिसमें 160 हेक्टेयर रबी की फसल व 40 हेक्टेयर गर्मी की फसल होगी. इस योजना की शुरूआत हो चुकी है और पहली टेस्टिग सफल हो चुकी है. जिसे देखने के लिए मंत्री कवासी लखमा पहुंचे थे. इस प्रोजेक्ट को लेकर जिला प्रशासन से चर्चा की और कहा कि ऐसे ही प्रोजेक्ट को पुरे जिले में लागू किया जाऐ.

इस तरह काम करता ही है मशीन

डाक्टर पुनीत सिंह ने करीब इस पर 30 साल का काम किया उसके बाद अब जाकर यह अविष्कार करने में सफल हुए है. नाले में बने स्टाप डेम से पाईप के जरिए पानी पास में ही स्थापित टरबाइन मशीन में जाता है. पानी के तेज बहाव के सहारे पानी पाईप की मदद से करीब 22 मीटर लीफ्ट कर डेढ़ किमी. दूर बनी टंकी में स्टोरेज होता है। उसके बाद वहां से केनाल की मदद से पानी को खेतों तक पहुंचाया जाऐंगा। इस तरह यह मशीन काम करती है. ये बिना इधन वाली मशीन है इसलिए किसानों  को किसी भी प्रकार का खर्च नहीं करना होगा. जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 80 लाख खर्च किए है. और यह प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो चुका है.

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अपने खर्च से लगाई मशीन

वैज्ञानिक डाक्टर पुनीत सिंह पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है. लेकिन सुकमा में महज चार महिनों में यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो गया है. भले ही जिला प्रशासन ने काफी खर्च किया हो लेकिन करीब 18 लाख की टरबाइन मशीन को वैज्ञानिक पुनीत सिंह ने खुद के खर्च पर लगवाई है. बताया जाता है कि वैज्ञानिक पुनीत सिंह काफी मेहनती और इस प्रोजेक्ट से काफी लगाव है. उन्हे जर्मनी से कई आफर आए लेकिन वो सिर्फ अपने देश में काम करना चाहते हैं.

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