चार साल पहले खोजी गई गुफा का ज़िक्र सदियों पुराने स्कंदपुराण में है!

आधी हकीकत आधा फसाना के इस एपिसोड के पहले भाग में देखिए एक रहस्यमयी गुफा का रोमांचक सफर. इस गुफा के अंदर कुदरती शिवलिंग के साथ ही शिव परिवार की कई निशानियों का होना बताया जाता है, लेकिन क्या है सच्चाई?

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2019, 7:48 PM IST
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आधी हकीकत आधा फसाना. इस बार एक ऐसी रहस्यमयी गुफा की यात्रा जिसके बारे में गिने-चुने लोग ही जानते हैं. हज़ारों साल पहले के स्कंदपुराण में इस गुफा का ज़िक्र है लेकिन हैरत की बात यह है कि इसे कुछ 4 साल पहले ही खोजा जा सका है. यह गुफा उत्तराखंड के किस कोने में है? वहां पहुंचना कैसे है? उसके अंदर कितने रहस्य हैं और क्या वो सभी सच हैं? चलिए इस रोमांचक यात्रा पर.

एक नहीं, दो नहीं, चार नहीं, पूरी नौ मंज़िला गुफा, जो दुनिया के सामने आज से करीब पांच साल पहले आई, लेकिन स्कंदपुराण में इस गुफा का ज़िक्र सैकड़ों साल पहले से है!

पहली बार होगा कि इस गुफा में मौजूद शिव परिवार की कुछ अद्भुत तस्वीरें दुनिया के सामने आएंगी. तो चलते हैं महादेव के उस संसार में जिसका ज़िक्र महर्षि वेदव्यास ने 5000 साल पहले ही कर दिया था.



इस गुफा में एक नहीं कई ऐसी बातें जो चौंका देती हैं. कहते हैं उस गुफा का जिक्र स्कंदपुराण में है, जबकि हकीकत में उसे महज़ 4 साल पहले ही उत्तराखंड के पहाड़ों में से खोजा गया है. सबसे ज्यादा हैरत में डालती है उस गुफा की बनावट जो 9 मज़िला बताई जाती है. हमने उत्तराखंड के अलावा कई गुफा की पड़ताल की, जिसमें से कोई जमीन के अंदर जाती थी तो कोई सीधी बहुत लंबी होती थी लेकिन एक ऊंची इमारत जैसी गुफा के बारे में हमने पहली बार सुना था.
यह भी दावा किया जाता है कि इस गुफा के अंदर पूरे शिव परिवार से जुड़ी कई निशानियां हैं जिनकी आकृति रोज़ बदलती है. ये सब सुनकर हमें वो गुफा एक चमत्कारी गुफा लगी, लेकिन वो गुफा है कहां? उत्तराखंड के किस कोने में है?

हैरत यह भी है कि जिस गुफा को महज़ 4 साल पहले ही खोजा गया है, उसका ज़िक्र स्कंदपुराण में कैसे हो सकता है? लोग तो कहते हैं उस गुफा तक पहुंचना ही बहुत कठिन है. उसे उत्तराखंड के कुछ ही लोगों ने देखा है. वहां जाने का कोई रास्ता नहीं है और शायद यही वजह है कि उस गुफा के बारे में इंटरनेट पर चंद तस्वीरों और कहानियों के अलावा कुछ नहीं है.

9 मंज़िल वाली एक गुफा, शिव परिवार से जुड़ी 9 निशानियां और हर निशानी के रोज़ बदलने का दावा! इंटरनेट पर उस अद्भुत गुफा से जुड़ी ऐसी कई कहानियां थीं लेकिन तस्वीर, एक भी नहीं.

अगर दावा झूठा है तो उस गुफा का ज़िक्र स्कंदपुराण में क्यों है? इन सभी सवालों का जवाब हमें उस दाणेश्वर महादेव गुफा में ही मिलेगा लेकिन इस सफर में हमें केवल मंजिल का नाम पता था, रास्तों की जानकारी नहीं थी. हां, इतना ज़रूर जानते थे कि हमें पहले पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट पहुंचना था.

उत्तराखंड के गंगोलीहाट को गुफाओं का गढ़ कहा जाता है. इन गुफाओं में ऐसी कई निशानियां हैं जिसे महादेव से जुड़े होने का दावा किया जाता है. दावा किया जाता है कि उस गुफा के अंदर नौ मंज़िलें हैं. इसी रहस्य को जानने के लिए हम दाणेश्वर महादेव गुफा की पड़ताल करेंगे. गंगोलीहाट में उस गुफा से जुड़ी कई कहानियां सुनने को मिलीं, बिल्कुल वैसी ही, जैसी हमने इंटरनेट पर पढ़ी थीं.
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