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सड़क पार करने के लिए बनी सफेद पट्टियों को जेब्रा क्रॉसिंग क्यों कहते हैं? नहीं जानते होंगे कारण

जेब्रा क्रॉसिंग को काला सफेद खास कारण से बनाया जाता है. (फोटो: Canva)

जेब्रा क्रॉसिंग को काला सफेद खास कारण से बनाया जाता है. (फोटो: Canva)

साल 1930 में इंग्लैंड में एक एक्सपेरिमेंट (When was Zebra Crossing came in existence) किया गया. इंग्लैंड का ट्रैफिक बढ़ने लगा था जिसके चलते सड़कों पर जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही थी. तब यहां पर क्रॉसिंग बनाई गई. जानिए जेब्रा क्रॉसिंग से जुड़े रोचक तथ्य.

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जब भी किसी को सड़क पार करनी होती है तो वो सफेद पट्टियों के जरिए ही रास्तों को पार करते हैं. इन्हें आमतौर पर जेब्रा क्रॉसिंग कहा जाता है. ये क्रॉसिंग लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए जाते हैं जिससे गाड़ी चलाने वाले लोगों को पता रहे कि उन्हें कहां पर गाड़ी की स्पीड धीमी करनी है और रोड क्रॉस करने वालों को पता रहे कि रास्ता कहां से क्रॉस करना है. मगर सवाल ये उठता है कि इन पट्टियों को जेब्रा क्रॉसिंग (Why crosswalks are called Zebra Crossing) ही क्यों कहते हैं और ये काली-सफेद ही क्यों होती है?

सबसे पहले आपको बताते हैं कि जेब्रा क्रॉसिंग (Why crossing on road are called Zebra Crossing) नाम कैसे पड़ा. द हिन्दू वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार साल 1930 में इंग्लैंड में एक एक्सपेरिमेंट (When was Zebra Crossing came in existence) किया गया. इंग्लैंड का ट्रैफिक बढ़ने लगा था जिसके चलते सड़कों पर जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही थी. तब यहां पर क्रॉसिंग बनाई गई. एक दिन सड़क पर ब्रिटिश मंत्री निकले जिन्हें उस क्रॉसिंग के निरीक्षण के लिए नियुक्त किया गया था. जब उन्होंने काले और सफेद रंग की क्रॉसिंग को देखा तो उसे जेब्रा प्रिंट का बताया. तभी से क्रॉसिंग को जेब्रा क्रॉसिंग (Who gave the name zebra crossing) कहा जाने लगा.

काली-सफेद ही क्यों होती है जेब्रा क्रॉसिंग
डामर से बनने वाली सड़कें काली (why zebra crossings are black and white) होती हैं. ऐसे में जब उनपर सफेद धारियां प्रिंट की गईं तो वो कंट्रास्ट में दिखने लगे. क्रॉसिंग बनाने से पहले कई रंगों का प्रयोग किया गया मगर सबसे उपयुक्त सफेद धारियां लग रही थीं क्योंकि उसपर चलने वाले लोग आसानी से नजर आ जा रहे थे. तब से इसे काला-सफेद माना जाने लगा. हालांकि कई देशों ने अपने हिसाब से क्रॉसिंग की डिजाइन या रंगों को चेंज कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन में एक शहर है जिसमें पट्टियों की जगह पोल्का डॉट्स बना दिए गए हैं. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उस इलाके की गायों के शरीर पर इसी तरह के डॉट्स होते थे. इसे काउ क्रॉसिंग कहा जाने लगा. हॉन्ग कॉन्ग में पीली पट्टियां बनाई गई हैं जिसे टाइगर क्रॉसिंग कहते हैं.

जेब्रा के शरीर पर क्यों होती हैं धारियां
अब अगर जेब्रा से जुड़ी बात हो ही रही है तो ये भी बता देते हैं कि जेब्रा के शरीर पर ऐसी धारियां क्यों होती हैं. जैसा की आप जानते होंगे कि प्रकृति ने कई प्राणियों को छलावरण की शक्ति दी है. वो अपने आसपास के माहौल में, अपने रंग और रूप के कारण इस तरह से घुलमिल जाते हैं कि उन्हें देखकर लगता ही नहीं कि वो वहां मौजूद हैं. जेब्रा के प्रिंट भी काफी हद तक उन्हें मदद करते हैं हालांकि वैज्ञानिकों ने इन पट्टियों का अलग अंदाजा लगाया. उनका मानना है कि जेब्रा की 3 नस्लें ऐसी जगहों पर होती हैं जहां हॉर्स फ्लाय जैसे खतरनाक कीड़े पाए जाते हैं. एक एक्सपेरिमेंट में घोड़ों को काले और सफेद रंग से पेंट कर दिया गया. तब उनपर हॉर्स फ्लाय छोड़ी गई जो उनके शरीर पर बैठी ही नहीं या फिर टकराकर लौट गई.

Tags: Ajab Gajab news, Weird news

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